आत्महत्या करने वाले को शहीद का दर्जा देना क्या शहीद का अपमान नहीं हैं

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रेणु शर्मा , संपादक गीतांजलि पोस्ट

रामकिशन ग्रेवाल के आत्महत्या करने पर जिस प्रकार सियासत गरमा गयी पहले दिल्ली के अस्पताल में तो फिर हरियाणा के भिवानी के पास बामला गांव में नेताओं का जमावड़ा लगा समझ नहीं आता जो नेता हॉल ही में बॉडऱ पर शहीद होने वाले शहीदों के परिजनों से मिलने कोई नही गया और पूर्व सेनिक के आत्महत्या करने पर वो अपने सारे काम छोड़ कर वहा गये , आखिर ये नेता जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं ?

मंगलवार को दिल्ली में आत्महत्या करने वाले हरियाण के 65 वर्षीय सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल ने सुसाइड नोट में लिखा था कि उन्हें वन रैंक वन पेंशन स्कीम के वादे के मुताबिक बढ़ी हुई पेंशन नहीं मिली और उन्होने सेलफॉस खारकर आत्महत्या कर ली उसकी आत्महत्या के बाद दिन भर दिल्ली में सियासी नाटक चलता रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल कह रहे हैं कि मैं दिल्ली का मुख्यमंत्री हूँ  ओर दिल्ली में एक आदमी के आत्महत्या करने पर , मृत्क और उसके परिजनों से मिलने गये दिल्ली के मुख्यमंत्री को पुलिस द्वारा मृत्क और उसके परिजनों से मिलने से रोका गया क्या दिल्ली के मुख्समंत्री दिल्ली में आत्महत्या करने वाले सभी मृत्कों और उनके परिवार वालों से मिलते हैं ? लेकिन यहा तो दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नही बल्कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित दिल्ली की आधी केबिनेट मृत्क एंव उसके परिवार से मिलने के लिये दिन भर पुलिस से उलझती रही ।

एकाएक आत्महत्या करने वाला आदमी इतना बड़ा कैसे हो गया कि उससे मिलने के लिये पूरी दिल्ली सरकार ही आ गयी साथ ही ऐसा क्या कारण था जिसके कारण पुलिस उनको मिलने से रोक रही थी। इसी प्रकार कांग्रेस  के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एंव वर्तमान में कांग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गांधी भी अपना सारा काम-काज छोड़ कर उनसे मिलने के लिये आया यही नहीं दूसरे दिन भी उनके गांव में भी राहुल गांधी , हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री सहित कांग्रेस के सेकड़ों नेता वहा पहुंच गये इसी प्रकार केजरीवाल और भाजपा के सांसद धर्मवीर सिंह , रतनलाल कटारिया और परिवहन मंत्री कृष्णपाल पंवार भी वहा रहे जबकि देश की रक्षा के लिये उड़ी , जम्मू-कश्मीर , पढ़ानकोट में हॉल ही में बॉडऱ पर शहीद होने वाले शहीदों के परिजनों से मिलने के लिये इन नेताओं के पास समय नहीं था जो उनसे मिलने नहीं गये और नाही केजरीवाल सरकार ने उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रूपये दिये । तरस आता है ऐसे नेताओं की मानसिकता पर ऐसे नेताओं से राष्ट्र के चरित्र निर्माण के उत्थान के लिये क्या अपेक्षाए कि जा सकती हैं ?

आत्महत्या करना ऐसा कोनसा महान काम हैं जिसके कारण आत्महत्या करने वाले रामकिशन ग्रेवाल को केजरीवाल एंव राहुल गांधी द्वारा शहीद का दर्जा देने के साथ ही केजरीवाल ने पीडि़त परिवार को एक करोड़ रूपये ओर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टन ने10 लाख रू की आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर ड़ाली और उसके परिवार के एक सदस्य को नोकरी देने की घोषणा भी की गयी साथ ही खट्टन ने बामला गांव के स्कूल और पार्क का नाम भी रामकिशन ग्रेवाल के नाम पर रखे जाने को कहा । स्कूल का नाम ग्रेवाल के नाम से रखने से उस विद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थियों को क्या संदेश जायेगा ?

मुझे समझ नही आता इन नेताओं के दिमाग को क्या हो गया हैं जो आत्महत्या करने वाले को सहयोग देकर आम जनता में आत्महत्या जैसे जघन्य काम को बढ़ावा दे रही हैं । संसार में हर इंसान किसी ना किसी रूप से परेशान हैं कल को कोई भी अपने साथ 20-25 लोगों को लेकर धरने पर बेठ जायेगा और आत्महत्या कर लेगा क्योकि वो जानता हैं कि उसके इस प्रकार आत्महत्या करने के बाद उसके परिवार को केजरीवाल , खट्टन जैसे नेताओं से आर्थिक सहायता दे दी जायेगी।

देश के लिये अपने प्राणों की बाजी लगाने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाता रहा हैं लेकिन आत्महत्या करने वालों को भी शहीद का दर्जा दिया जाता हैं तो ये राष्ट्र के लिये प्राण न्यौछावर करने वालों को शहीदों का अपमान होगा साथ ही शहीद शब्द का भी अपमान होगा। हम नही चाहते कि देश के लिये बलिदान होने वालो वीरों को अपमानित करने वाले शब्द से सम्मानित किया जाये अत: हमारे देश के लिये अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले हमारे वीरों को सम्मानित करने के लिये हमें शहीद के बजाय किसी  अन्य शब्द की खोज करनी होगी ।

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