काला धन – काला मन , सफ़ेद धन – सफ़ेद मन

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पंकज चौधरी (आई.पी.एस)
पंकज चौधरी (आई.पी.एस)

उन तमाम कालाधन प्रेमिओं को मेरी सहानुभूति एंव संवेदना है , जिन्होंने ताउम्र कालाधन नामक तिलिसम को प्राप्त करने में लगा दी । इस कार्य के लिए अपना भविष्य दाँव पर लगाया की अपने आने वाली पीढ़ियों को सुखों का सागर छोड़ कर जायेंगे ।मुझे अफ़सोस होता है , जिन महानुभावों ने काले धन की चाहत में प्रतिदिन के भागदौड़ में निद्रा के लिए न्यूनतम 6 घंटे में से भी 2-3 घंटे कालाधन प्राप्त करने के दिवास्वप्न में लगा दिये होगें ।एक कहावत है , जिसका धन गया समझों कुछ गया , जिसका हैल्थ गया समझें बहुत कुछ गया , जिसका चरित्र गया समझो सब कुछ गया । आज जिसका काला धन गया समझो उसने नये जीवन की आहट पा ली है ।

जब हम काले धन की आर्थिक , सामाजिक , धार्मिक , अध्यात्मिक विवेचना करते है तो सिर्फ़ इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि काले धन से बड़ा शत्रु और कोई नहीं हो सकता है । हो भी क्यों ना ? जिस काले धन को पाने में लाखों ग़रीबों की रोटियाँ छीनी गयी होंगी, लाखों ग़रीबों , असहायों की मजबूरियाँ का फ़ायदा उठाया गया होगा । लाखों ग़रीबों की उम्मीदों , विश्वास को चकनाचुर किया गया होगा । लाखों ग़रीबों की आत्माओं को दुखाया गया होगा । ये कालाधन कोई मामुली धन थोड़े ही है। पापों के पश्चात्ताप के लिए कुम्भ स्नान , मंदिर , मस्जिद , चर्चों में याचना की जाती है कि बुरे करमों से मुक्ति मिले एंव सदबुदधी प्राप्त हो । कालाधन प्रेमियों को यह समझ लेना चाहिए कि आज़ादी के बाद एक सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है जिसमें संचित किये काले धन को शरीर , आत्मा , मन से दुर किया जा सके ।

वर्तमान दौर में एेसा आभास हो रहा था कि ग़रीब महागरीब हो रहा है । काले धन की घोर नकारात्मकता/छाया हमारे आसपास के वातावरण को निरन्तर प्रभावित कर रही है ।सफाई अभियान से तात्पर्य एंव भावना मात्र कुडाकरकट नहीं है यह एेसे भारत का निर्माण की कड़ी है जिसमे मन भी साफ़ हो और शरीर भी ।यह काला धन न सिर्फ़ व्यक्तित्व को काला करता है बल्कि राष्ट्र निर्माण में बाधक है ।

वे लाखों भारतवासी जिनका हज़ार की नोट अपनी जेब में रखना एक सपना होगा , आज इस एेतीहासिक विमुदरीकरण से अपने पास १०,५०,१०० रुपये को अटुट प्यार दे रहे होगें । एेसा आभास कर रहे होगे कि वास्तव में धन हाथ की मैल है और कालाधन आत्मा की मैल है ।

” न जाति , न धर्म , न क्षेत्र , देश सर्वोपरि , जय हिंद “

 लेखक पंकज चौधरी भारतीय पुलिस सेवा ( राजस्थान कैडर ) के युवा अधिकारी है जिनके लिए देश से बढ़कर कुछ नहीं है ।