विमुद्रिकरण आमजन के हित में

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रेणु शर्मा , संपादक गीत पोस्ट

एकाएक मोदी सरकार के 500 एंव 1000 रूपयें के नोटों को बन्द करने के निर्णय ने सभी के दैनिक कार्यो को प्रभावित कर दिया पूरे देश में कोहराम मचा दिया लेकिन फिर भी सभी मोदी सरकार द्वारा लिये गये फैसले का स्वागत कर रहे हैं क्योकि देश की जनता जानती हैं कि थोड़ी सी परेशानी उम्र भर की खुशी बनने वाली हैंं।
मोदी का ये फैसला आमजन के हित में है इसे गलत न सोचें। इसकी गहराई में जाए भारतीय मुद्रा का थोड़ा भी अवमूल्यन नही हुआ हैं,उसकी वही हैं जो पहले थी। क्योकि जब काला धन बढ़ जाता हैं और देश की अर्थव्यवस्था के लिये खतरा बन जाता है तब इसे दूर करने के लिये विमुद्रिकरण किया जाता हैं जिसके अन्तर्गत पुरानी मुद्राओं को नष्ट कर दिया जाता हैं और नयी मुद्रा चालू की जाती हैं साथ ही जनता को उनकी पुरानी मुद्रा के बराबर नयी मुद्रा दी जाती हैं लेकिन उसी धन को बदला जाता हैं जिसका लेखा-जोखा होता हैं और जिसके पास कालाधन होता हैं वो नष्ट हो जाता हैं क्योकि गलत तरिकों से कमाया गया पैसों के बारे में कोई नहीं बताता क्योकि यदी वो अपने पैसों के बारे में बतायेगा तो उसे ये भी बताना होगा कि ये पैसा उसके पास कहा से आया सभी जानते हैं कि गलत पैसा अवैध काम से ही कमाया जाता हैं जिसके बारे में सरकार को नहीं बता सकते। जिनका पूरा आय-व्यय विवरण उनके पास मौजूद है, तो फिर उन्हें घबराहट क्यों होनी चाहिए मोदीजी के फैसले से उन लोगों को डर हैं जिन्होंने काला धन दबा रखा है।
जनता को उनकी मुद्रा के बराबर मुआवजा दिया जा रहा है फिर जनता को क्या समस्या हो सकती हैं लेकिन हॉ अचानक लिये गये निर्णय से कुछ समस्याए पैदा हो रही हैं लेकिन उन समस्याओं का निस्तारण भी सरकार द्वारा किया जा रहा हैं। इस फ़ैसले से आम आदमी को होने वाली समस्याओं का समाधान पहले ही कर दिया था लेकिन फिर भी कुछ ओर समस्याये हो सकती हैं सरकार द्वारा उन समस्याओं का समाधान भी तत्काल किया जा रहा हैं पैसों के कारण टोल नही देने से रोड़ जाम ना हो इसके लिये सरकार ने 2 दिन के लिये टोल फ्रि कर दिया , देशी-विदेशी पर्यटकों को समस्या ना हो स्मारकों के टिकट निशुल्क कर दिये।
हमेशा की तरह कुछ लोग , विपक्षी पार्टीयों द्वारा मोदी के द्वारा अचानक लिये गये इय निर्णय को तानाशाही का जामा , तो कोई इसे मोदी का ड्रामा बता रहा हैं जो उनके ज्ञान के स्तर को दर्शाता हैं कि उसे अर्थशास्त्र की कितनी जानकारी हैं। क्योकि विमुद्रिकरण ही ऐसा रास्ता हैं जिससे कालाधन और मुद्रा की कमी जैसी समस्याओं से निजात मिल सकती हैं – हमारे घोषणा-पत्र में भी लिखा हैं कि जल्द से जल्द नये नोट छपवाकर पुराने नोटों को पुराने नोटों को नष्ट किया जायेगा। 20 साल बाद विमुद्रिकरण किया जाना चाहिये। ये कोई नयी बात नहीं हैं मोदी से पहले 1978 में मोराइजी देसाई सरकार ने विमुद्रिकरण किया था उन्होने 1000 रूपयें के नोट बन्द करवाये थे। भ्रष्टाचार, जाली नोट, आतंकवाद ऐसे नासूर हैं जो देश को विकास की दौड़ में पीछे धकेलते हैं। ये देश-समाज को अंदर ही अंदर खोखला करते हैं। कुछ चन्द लोगों ने अपने स्वार्थ के लिये देश की अर्थव्यवस्था पर अपना आधिपत्य स्थापित किया हुआ हैं। जिससे देश में गरीबी बढ़ी रही है।
ये निर्णय अचानक हमारे लिये था मोदीजी ने तो पहले से ही इसकी पुरी तैयारी कर रखी थी। उन्होने एक साल पहले 0 बैलेन्स पर सभी लोगों का बेक में खाता खुलवाया जिससे सामान्य व्यक्ति 1000-500 रूपये भी अकाउन्ट में रख सके। इसके अलावा इसकी कवायद पिछले साल से ही चल पही थी जब वित्त मंत्री ने सभी काला धन वालो को 30 सितम्बर तक अपना काला धन सरेण्डऱ करने को कहा था उसके बाद उनके खिलाफ कार्यवायी करने का कहा। इसके बाद वित्त मंत्री ने सभी राज्यों के रिर्जव बेंक के प्रभारियों के साथ मिटींग करने के साथ ही कार्यवायी शुरू कर दी थी , पीएम ने दोपहर में सबसे पहले तीनों सेनाओं के चीफ्स से मुलाकात की थी। इसके बाद कैबिनेट की मीटिंग की। सबसे आखिर में वे प्रेसिडेंट से मिले जब सबसे इस निर्णय के बारे में चर्चा करके मोदीजी संतुष्ट हो गये कि उनका 500 एंव 1000 रूपयें के नोटों को बन्द करना उचित हैं तब राष्ट्र के नाम संदेश मे के सामने रखा।

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