पत्रकारिता पुरोधा पुरूष व नेताजी स्व. शिवदत पारीक की द्वितीय पुण्य तिथि पर विशेष’

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‘‘स्वतंत्र पत्रकार स्व. शिवदत जी पारीक की द्वितीय पुण्य तिथि पर विशेष’’
आने वाली पीढी को ‘‘खुद की नही, सबकी सोचो’’ जैसी नई सोच दी
गीतांजलि पोस्ट…..रतनगढ 16 नवम्बर 2016 ( दिनेश सैनी ) आजादी पूर्व 14 सितम्बर 1941 को चूरू जिले की रतनगढ तहसील मे एक साधारण ब्राहमण परिवार मे जन्मे स्व. शिवदत पारीक मेे बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा की झलक देखी गई थी। राजस्थान सरकार के सुचना एवं जनसम्पर्क निर्देशालय द्वारा स्वतंत्र पत्रकार के रूप मे अधिस्वीकृत स्व. पारीक ने पत्रकारीता क्षैत्र के साथ साथ राजनैतिक के क्षैत्र मे भी खाशी प्रतिष्ठा हासिल की। स्वतंत्रता पूर्व रतनगढ की हरिजन बस्ती मे हरिजन बालको को संस्कार व शिक्षा देने के लिये स्थापित प्राथमिक विधालय मे स्व. पारीक को दाखिला दिलवाकर उनके पिता पं. स्व. रामेश्वरलाल पारीक ने छुआछुत को मिटाने का प्रथम संस्कार दिया। क्योकि इस विधालय मे किसी ब्राहमण परिवार के बालक का प्रथम प्रवेश था। अपने पिता से प्राप्त संस्कारो के माध्यम से ही समाजसेवा के क्षैत्र मे उतरे स्व. पारीक ने सन 1962 से कांग्रेस पार्टी की सक्रिय सदस्यता तथा रतनगढ युवक कांग्रेस के पद पर रहते हुए कांग्रेस पार्टी को दल बल के साथ खङा किया। सन 1967 मे चूरू जिला युवक कांग्रेस महामंत्री पद पर तथा कांग्रेस केडर प्रशिक्षण प्रकोष्ट के जिला संयोजक व सन 1969 मे जिला कांग्रेस की प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। राष्ट्र के महान नेता बाबु जगजीवणराम ने स्व. पारीक को उनकी कार्यशैली को देखते हुए दलित सेवा संघ का बीकानेर संभाग का प्रभारी भी नियुक्त किया। स्वतंत्रता सैनानी स्व. फु लचंद जैन व वयोवृद्ध पं. हिरालाल शर्मा का सानिध्य प्राप्त कर दलितो के उत्थान के लिये चलाये गये कार्यक्रमो मे सक्रिय भागिदारी तथा शैक्षणिक व सहकारीता कार्यक्रमो मे, सामाजिक राजनैतिक जनजागृति के लिये ग्रामिण क्षैत्रो मे अनेक पदयात्राएं की। सन 1968 मे चूरू जिले मे पङे महाअकाल के समय अकाल पिङितो के राहत के विभिन्न कार्यक्रमो का संचालन भी किया। सन 1980 की दशक में प्रजा संदेश के नाम से राज्य स्तरीय समाचार पत्र का प्रकाशन कर तथा दैनिक लोकवाणी, दैनिक नवज्योति, दैनिक राष्ट्रदुत, हिन्दुस्तान समाचार, समाचार जगत आदि सहित अन्य दैनिक साप्प्ताहिक, पाक्षिक, मासिक समाचार पत्रों में अपना मार्गदर्शन कर एक दशक तक जीवंत पत्रकारिता की मिशाल कायम की। बीकानेर संभाग के जवाहरलाल नेहरू युवा केन्द्र के संयोजक व युवा विकास समिति के अध्यक्ष पद पर रहे स्व. पारीक को राजस्थान मे हिन्दी पत्रकारिता के विकास मे दी गई उल्लेखनिय सेवाओ व योगदान पर सम्मानपत्र देकर सम्मानित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निकटतम सहयोगी रहे है स्व. पारीक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व. फुलचंद जैन के साथ राजनीति के क्षैत्र में पदार्पण हुए थे। इसके पश्चात स्वतंत्र पत्रकार स्व. पारीक जिले व प्रदेश में ‘‘नेताजी’’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। सन 1981 व 1985 मे पारीक एक दशक तक सरपंच व उपप्रधान तथा रेलवे एवं दुरसंचार उपभोक्ता समिति के सलाहकार सदस्य के रूप मे रहकर भी इन क्षैत्रो का सक्षम मार्ग दर्शन दिया। निर्भीक एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के पुरोधा पुरूष एवं विलक्षण कार्य शैली के धनी माने जाने वाले तथा तहसील भर में पत्रकारिता के भीषम पितामाह कहे जाने वाले स्व. पारीक ने अपने जीवन में राजनीति क्षेत्र में पत्रकारिता को कभी प्रभावित नहीं होने दिया तथा अपने जीवन में निष्पक्ष, निर्भिक एवं स्वतंत्र पत्रकारिता की नई मिशाल कायम की। स्व. पारीक द्वारा प्रदेश की राजनैतिक मसलो पर होने वाली कठीनाईंयो पर परामर्श के लिये दी गई गुढ रहस्यो की बातो की जानकारी थी। उनके कार्य करने की शैली से प्रत्येक मिलने वाले शक्स को अपनी ओर आकर्षित करने का जज्बा हर समय उनके स्वभाव मे विधमान रहता था। वे स्मरण शक्ति के विलक्षण प्रतिभा के धनी माने जाते थे जिनको अपने राजनैतिक जीवन के दौरान होने वाली हर घटना तथा अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत के प्रथम सौपान के बाद मिलने वाले हर व्यक्ति की छवी को नही भुले थे। राजनैतिक मसलो पर किये गये विशलेषण काफ ी हद तक सटीक बैठते। स्व. पारीक मे कार्य करने की तत्परता एक युवा की भांति मुझे देखने को मिली उन्होने सबको साथ लेकर चलने की सिख दी। पत्रकारीता क्षैत्र मे प्रथम सौपान पर कदम रखते हुए बीकानेर संभाग के कई क्षैत्रो मे व्याप्त बुराईयो एवं आमजन की समस्याओ को उठाते हुए अनवरत जारी रहे। पत्रकारीता के माध्यम से स्व. पारीक ने जनता की समस्याओ को प्रशासन व सरकार के सामने बखुबी तरीके से प्रस्तुत किया। पत्रकारीता क्षैत्र के महानायक स्वतंत्र पत्रकार स्व. पारीक को विधा की देवी मां सरस्वती ने कलम का मालिक बनाया।
अपनी पत्रकारीता के दौरान उन्होने अनछुये पहलुओ को संसार के दृष्टी पटल पर दृष्टीगोचर किया। साथ ही राजनैतिक क्षैत्र मे उच्च पदो पर विराजीत महानभवो तक कलम के माध्यम से पहुॅच बनाने मे कामयाब रहे। पुरे प्रदेश मे विभिन्न राजनैतिक दलो के राजनीतिज्ञ स्व. पारीक की लेखनी के कायल थे। पीङीत का साथ देने वाले स्व.पारीक ऐसे विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे जिनको चिरकाल तक क्षैत्र की जनता हमेशा याद करती रहेगी तथा आने वाली पीढी को ‘‘खुद की नही, सबकी सोचो’’ जैसी नई सोच देने वाले तथा भविष्य की सोच रखने वाले स्व. पारीक की कमी हमेशा खलती रहेगी। स्व. पारीक की कथनी और करनी मे कभी फ र्क नही आया। स्व. पारीक के विषय मे यह विचार उनके जैसा ‘‘न भुतो न भविष्यती’’ कहना अतिश्योक्ति नही होगी। कार्य के प्रति समर्पण भाव तथा उसको पुरा करने की द्रढ इच्छा शक्ति के धनी स्व. पारीक के व्यक्तित्व मे शामिल वो गुण कुदरत की देन ही कहा जा सकता है।