यहां तो पिछले डेढ साल से 500-1000 रुपये नहीं चल रहे

1
65
akola-2
गीतांजलि पोस्ट…………..नोटबंदी से जहां पूरे भारत में कैश को लेकर के अफरातफरी मची हुई है वहीं गुजरात में एक छोटा सा गांव नोटबंदी को लेकर बिलकुल भी चिंतित नहीं है क्योंकि वहां के लोग कैश में डील ही नहीं करते और यह काम अब से नहीं बल्कि पिछले डेढ साल से है के बारे में  गीतांजलि पोस्ट की विशेष रिपोर्ट……………
गुजरात के अहमदाबाद शहर से लगभग 90 किमी दूर साबरकांता डिस्ट्रिक्ट में पड़ने वाला अकोदरा गांव कैशलैस है यहां लोग लेन देन का काम कैश में नहीं बल्कि ई-बैंकिंग के जरिए करते है। अगर आपको 10 रुपये का बिस्किट का पैकेट भी खरीदना है तो आपको 10 रुपये कार्ड या फिर एसएमएस के जरिए पे करने होंगे। गुजरात का यह गांव इंडिया का पहला डिजिटल विलेज है और असल में यहां डिजिटल इंडिया को फॉलो किया जाता है।
एसएमएस और कार्ड से होती पेमेंट: गांव की सभी पेमेंट से रिलेटिड ट्रांजेक्शन या तो कार्ड के जरिए होती है या फिर एसएमएस से। दरअसल गांव में दुकानों के आगे एक बोर्ड लगा हुआ है जिसमें उनका फोन नंबर मेंशन है और वही फोन नंबर वहां के बैंक में रजिस्टर्ड है जिससे कोई भी कस्टमर उस फोन नंबर के जरिए दुकानदार को सीधा उसके बैंक में अमाउंट ट्रांसफर कर देता है पर इसके लिए आपका ICICI बैंक में अकाउंट होना चाहिए। इसके अलावा गांव में हर दुकानदार के पास स्वैप मशीन है।
akola-3
ICICI बैंक ने गोद लिया हुआ है गांव: ICICI बैंक ने अकोदरा गांव को 2 जनवरी, 2015 में गोद लिया और वो सारी चीजें की जिससे गांव को डिजिटल बनाया जा सके। ICICI बैंक की सीइओ चंदा कोचर ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लालकिले से गांव को गोद लेने और उसे डिजिटल बनाने की स्कीम का ऐलान किया था तब हमने यहां इसे इम्पलिमेंट करने का सोचा फिर हमने गांव की सरपंच तारा बेन से बात की। इसके बाद हमने गांव में कुछ यंगस्टर्स की टीम बनाई फिर उन्हें ट्रेनिंग सेशन प्रोग्राम के जरिए उन्हें ई-बैंकिग का प्रोसेस समझाया। इसी तरह से फिर हमने धीरे धीरे गांव की महिलाओं और बुजुर्गों को इस बारे में ट्रेनिंग दी और आज भी हम इसी तरह की ट्रेनिंग गांव में करते रहते है। जिसका रिजल्ट यह है कि गांव का अब हर व्यक्ति इस प्रोसेस में विश्वास रखता है और अब हम 100 गांवों को डिजिटल बनाने का प्लान कर रहे है।
पूरा गांव है वाईफाई: अकोदरा गांव पूरा वाईफाई है और दिल्ली शहर के जैसे इसकी कोई लिमिट नहीं है कि आपका वाईफाई आधे घंटे बाद बंद हो जाएगा।
screenshot-59
दरअसल गांव वालों के लिए ने पंचायत से वाईफाई का टावर लगवाया हुआ है जिससे गांव के लोग आसानी से 24 घंटे वाईफाई यूज़ करते है। इसके लिए पंचायत ने गांव वालों को काफी सस्ते रेट्स पर वाईफाई प्रोवाइड करता है। जैसे 90 रुपये में 1 एमबीपीएस की स्पीड के साथ अनलिमिटेड वाईफाई, इसके अलावा गांव में टूरिस्टों के लिए डमी वाईफाई का भी ऑप्शन होता है जिसके लिए उन्हें कुछ पे नही करना होता।
स्कूल्स में होती है टैबलेट्स और लैपटॉप से पढ़ाई: अभी भले ही शहरों के स्कूल्स और कॉलेजों में टैबलेट और लैपटॉप से पढ़ाई ना होती हो लेकिन डिजिटल विलेज यानि की अकोदरा विलेज में स्टूडेंट्स टैबलेट और लैपटॉप से पढ़ाई करते है। अकोदरा विलेज में 3 तरह के स्कूल्स में स्टूडेंट पढ़ते है पहला आंगनवाड़ी में, दूसरा प्राइमरी स्कूल में जहां 8th क्लास तक के स्टूडेंट पढ़ते है और तीसरे 12th क्लास तक के, इन तीनों स्कूल्स में ही स्टूडेंट्स को लैपटॉप और प्रोजेक्टर से पढ़ाया जाता है।
akola
पशुपालन है इन्कम सोर्स: अकोदरा गांव के लोगों का मेन इन्कम सोर्स पशुपालन है। लेकिन किसी भी गांव वाले ने अपने जानवर अपने घर के तबेले में नही रखे हुए बल्कि गांव एक एनिमल हॉस्टल है जहां गांव वालों के सभी जानवर एक साथ रहते है। सन 2011 में पीएम मोदी ने सीएम रहते हुए इस हॉस्टल को बनवाया था। यह एनिमल हॉस्टल एशिया का पहला एनिमल हॉस्टल है। गांव वालों के सभी जानवर यहां रहते है और गांव वाले यहीं आकर उन्हें चारा और दूध जैसी चीजें निकालने का काम करते है। इसके लिए गांव वालों से पर जानवर 300 रुपये साल के हिसाब से चार्ज किया जाता है। पशुपालन के बाद गांव में कपास की खेती होती है।
dsc_0091
गांव में नहीं है गंदगी: डिजिटल गांव होने के साथ-साथ गांव में किसी भी तरह की कोई गंदगी नहीं है। लोग रास्ते में किसी भी तरह का कूड़ा ना फेंके इसके लिए गांव में जगह जगह पर कूड़ेदान लगे हुए है जिसमें लोग कूड़ा डाल सके।
img_20161127_172145301_hdr
कैसे जा सकते है: अकोदरा गांव जाने के लिए आपको सबसे पहले अहमदाबाद या फिर गांधी नगर आना पड़ेगा फिर वहां से आपको हिम्मत नगर की बस मिलेगी। अकोदरा गांव हिम्मत नगर से 10 किमी दूर है। अकोदरा गांव टोटल 2 किमी के रेडियस में ही फैला है और टूरिस्ट स्पॉट होने की वजह से यहां कोई होटल भी नहीं है इसलिए अकोदरा से 10 किमी दूर हिम्मत नगर में होटल आसानी से 250 रुपये से मिल जाते है।
क्यां खाएं: अगर आप गुजरात जा रहे है तो वहां पर मिलने वाला बादाम शेक, गुजरात की लस्सी और फाफड़ा,गठिया जैसी गुजराती चीजें ट्राई करें।