क्या अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं?

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(आलेख- चन्द्रपाल प्रजापति, नोएडा)
 चन्द्रपाल प्रजापति, नोएडा
चन्द्रपाल प्रजापति, नोएडा

गीतांजलि पोस्ट……..चुनाव आयोग के फैसले मे समाजवादी पार्टी और चुनाव चिन्ह साइकिल का अखिलेश यादव गुट को मिल जाने के बाद मुलायम सिंह यादव का बयान कि अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं गले से नही उतरता है। इस बयान के बहुत सारे राजनीतिक मायने हैं। इस बयान की तहकीकात करने के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार के 2012 के बाद के कार्यकाल को देखते हैं तो दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो जाता है। मुजफ्फरनगर दंगों मे तो माननीय उच्चतम न्यायालय को सरकार से पूछना पड़ा था कि सिर्फ दंगा प्रभावित मुस्लिमो को ही मुआवजा क्यों दिया जा रहा है? क्या हिन्दू दंगो मे पीड़ित नही हैं? सरकार को दोनों पक्षो से जुड़े पीड़ितों के राहत एवं पुनर्वास की बात करनी चाहिए। दादरी कांड मे अख़लाक़ के परिवार को 45 लाख एवं घर, प्रतापगढ़ के कुन्डा हत्याकांड मे जिया उल हक के परिवार को 50 लाख का मुआवजा जैसे अनेक उदाहरण यूपी सरकार के मुस्लिम प्रेम को दर्शाते हैं और उसके मुखिया अखिलेश यादव हैं। मुलायम सिंह यादव का बयान कि अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं, ये केवल सियासी दांव पेंच है और बहुसंख्यक हिन्दू समाज को लुभाने का हथकंडा है। जहां सभी पार्टियों को हिन्दू – मुस्लिम मे भाई चारे को बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए वहीं यूपी सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये से एक दूसरे मे दुश्मनी की खाई और बढ़ी है। और माननीय उच्चतम न्यायालय को भी फैसला देना पड़ा कि धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर कोई भी वोट अपील नही कर सकता है।