क्या रानी पद्मिनी का चरित्र- हनन एक अक्षम्य अपराध नहीं हैं

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गीतांजलि पोस्ट ……. अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर हमारे तथाकथित बुद्विजीवियों द्वारा हमारी सामाजिक परम्पराओं, इतिहास, धार्मिक-आयोजन, महापुरुषों के चरित्र- हनन, अश्लील चरित्र-चित्रण किये जा रहे हैं और हमारा मीडिय़ा अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिये उनका प्रचार-प्रसार करने में लगा है साथ ही जो लोग इनका विरोध करते हैं, उनको बुलाकर उस विषय पर बहस आयोजित करवाकर उनके हौंसले बढाने में लगे हैं। यदि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार कोई कार्यवाही नहीं करती है तो जनता को कानून हाथ में लेने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसा ही वाकया जयपुर में संजय लीला भंसाली की फिल्म की जयगढ में चल रही शूटिंग को लेकर हुआ क्योंकिं फिल्म के डॉयरेक्टर द्वारा हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा था, जिसके कारण करणी सेना ने फिल्म की शूटिंग को रूकवाया और फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मारा। भंसाली नेे सिर्फ राजपूत समाज का ही नही बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का अपमान किया है। उन्होने चितौडग़ढ की रानी पद्मिनी को अलाउदीन खिलजी की प्रेमिका के रूप में बताया है। इससे पहले राजपूत समाज ने पत्र लिखकर भंसाली को मना किया था कि वो अपनी फिल्म में ऐसा दृश्य नहीं दिखाये लेकिन भंसाली ने वो दृश्य नहीं हटाये तो मजबूर होकर करणी सेना को कार्यवाही करनी पड़ी और थप्पड़ मारना पड़ा जो कि ऐसे अक्षम्य अपराध के लिये बहुत ही कम सजा है ।
भंसाली को किसने यह अधिकार दिया कि वो रानी पद्मिनी को अलाउदीन खिलजी की प्रेमिका बताकर रानी पद्मिनी का चरित्र- हनन करे, जबकि रानी पद्मिनी ने तो अपने पति की वीरगति के बाद सेकड़ों महिलाओं के साथ जौहर किया था। इसलिये हमारे इतिहासकारों ने रानी पद्मावती के बलिदान के कारण महिमामंडऩ किया जाता रहा है, भंसाली द्वारा बहादुर वीरांगना का चरित्र- हनन किया जाना समाज स्वीकार नहीं करेगा। यह एक महिला के साथ-साथ एक सती का भी अपमान है। भंसाली के इस कदम की जितनी निन्दा की जाये, उतनी ही कम है ताकि भविष्य में कोई भी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर हमारे इतिहास, हमारे धर्म, हमारे संस्कारों पर टिप्पणी करने की हिम्मत ना जुटा पाये। अगर यही कार्यवाही जोधा-अकबर फि़ल्म बनाने के समय आशुतोष गोवारिकर के साथ हुई होती तो आज संजय लीला भंसाली की रानी पद्मिनी पर फि़ल्म बनाने की हिम्मत न हुई होती..जो भी है …देर आये दुरुस्त आये।