खेतों में लगे इस काले सोने की सुरक्षा में किसानों की नींदें हराम हो रही हैं

0
292

मंदसौर। जिले के तकरीबन 15 हजार अफीम उत्पादक किसानो को न दिन का चैन है और न ही रात को आराम। अफीम की फसल (काला सोना) यौवन पर है अब डोडो से दूध आने लगा है।
कुछ गांवो में अफीम की लुनाई- चिराई भी शुरु हो गई है। ऐसे में अफीम उत्पादक किसान रतजगा कर रहे हैं। पक्षियों खासतौर पर तोतो को अफीम खासी प्रिय है। वे अफीम का सेवन तो कम करते हैं, पर डोडो का नुकसान ज्यादा करते हैं। कई गांवो में रोजड़ो का भी भय है। रोजड़ो को भी अफीम की फसल खासी पसंद है। इसके अलावा दूध वाले डोडो की चोरी का भय भी बना रहता है। यही कारण है कि किसान रात भर जाग कर फसल की सुरक्षा में तैनात हैं।
यह कर रहे हैं किसान जतन:
किसानों ने अफीम खेत के चारों ओर ज्वार या मक्के के पौधे लगा रखे हैं। वहीं काग भगोड़े भी जगह-जगह लगाए हैं। कोई टेप रिकार्डर बजाकर तो कोई टीन का डिब्बा या थाली बजाकर पक्षियों को भगा रहे हैं। अफीम खेत के चारों ओर पुरानी ऑडियो- वीडियो कैसेट की रीलें लगा रखी हैं ताकि हवा के चलते फिल्म की आवाज से पक्षी व रोजड़े दूर रहें। इसके अलावा किसान थोड़ी- थोड़ी देर में पटाखे भी चलाते हैं। कुछ किसानों ने बल्लियां लगाकर वायर फेसिंग कर रखी है तो कुछ ने लोहे की जालियां तक लगा रखी है। 10 से 15 आरी की अफीम फसल के लिए लगभग पूरा किसान परिवार ही ड्यूटी दे रहा है।
काली मां को पूजकर शुरु की अफीम लुनाई:
शहर के पास के गांव लालघाटी व आसपास के गांवो में कई किसानों ने अफीम लुनाई का कार्य भी शुरु कर दिया है। सोमवार को गोपाल गुर्जर ने मां काली की पूजा कर चीरा लगाने का कार्य शुरु किया। गुर्जर ने बताया कि अफीम की फसल काफी नाजुक फसल है। सुबह से लेकर शाम तक पक्षियों व रात को रोजड़ो से बचाने के लिए पूरा परिवार दिन-रात एक कर रहा है। इसके बाद भी पक्षी फसल को नुकसान पहुंचा रहे है। खासतौर पर वे डोडो को खा रहे है। इससे अफीम औसत पर भी बुरा असर होने का डर बना हुआ है।