गरीब मुस्लिम लड़कियों का सामूहिक विवाह कराएगी यूपी सरकार

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लखनऊ, 12 अप्रैल 17 प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में लम्बित तीन तलाक के केस में मुस्लिम महिलाओं की राय के आधार पर प्रदेश सरकार अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की राय जानने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देते हुए कहा कि इसके लिए विभागीय मंत्री और मंत्रिमण्डल की सभी महिला मंत्री महिला संगठनों के साथ बैठक करें। उन्होंने अनिवार्य विवाह पंजीकरण हेतु नियमावली के प्रख्यापन के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
मंगलवार रात अल्पसंख्यक कल्याण, महिला कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभागों के प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने ये निर्देश दिए। उन्होंने गरीब मुस्लिम लड़कियों के सामूहिक विवाह राज्य सरकार की ओर से करवाए जाने के भी निर्देश दिए। योगी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का प्रस्तुतीकरण के दौरान निर्देश दिया कि मदरसों के पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाया जाए। इसमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, गठित, अंग्रेजी आदि की शिक्षा को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि मदरसों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए प्रत्येक जिले में कम्युनिटी सेण्टर के लिए भूमि की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि हज यात्रियों के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं और उनकी समस्याओं का समाधान तत्परता से किया जाए।महिला एवं बाल विकास विभाग प्रस्तुतीकरण के दौरान श्री योगी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। लोक कल्याण पत्र 2017 के अन्तर्गत भाग्य लक्ष्मी योजना को लागू करने के लिए उन्होंने वृहत प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। इस योजना के तहत प्रदेश के हर गरीब परिवार में बेटी के जन्म पर 50,000 रुपये का विकास बाण्ड  दिया जाएगा। बेटी के कक्षा 6 में पहुंचने पर तीन हजार रुपये,कक्षा 8 में पहुंचने पर  पांच हजार  रुपये, कक्षा 10 में पहुंचने पर सात हजार रुपये, कक्षा 12 में पहुंचने पर  आठ हजार रुपये दिये जाएंगे। बेटी के 21 वर्ष की होने पर 2 लाख रुपये दिये जाएंगे।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये  कि लाभार्थियों की पात्रता को भली प्रकार सुनिश्चित करके ही योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित भी न हो। आधार कार्ड से सम्बद्ध करके लाभार्थियों की सत्यता सुनिश्चित की जाए। लाभार्थियों को धनराशि का भुगतान उनके बैंक खाते में ही किया जाए।उन्होंने यह निर्देश भी दिये कि प्रदेश के विधानमण्डल द्वारा विगत 20-25 वर्षों में पारित कानूनों के सम्बन्ध में नियमावलियां बनाकर लागू की गयीं या नहीं, इसका अध्ययन करा लिया जाए। साथ ही, ऐसे कानून जो वर्तमान स्थितियों  में अनुपयोगी हो गये हैं, को समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।
उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कारों की तारीफ की और निर्देश दिया कि रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के तहत विधवा और ऐसी महिलाओं जिनके पति शराबी हैं और उनका कोई अन्य आय का स्रोत भी नहीं है, की सहायता के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने बाल संरक्षण योजना तथा महिला शरणालयों में मिल रहे भोजन की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।मुख्यमंत्री ने सभी विधवा महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन योजना के अन्तर्गत लाने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रारम्भिक चरण में 500 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हुए सहायता बढ़ाने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।उन्होंने पति की मृत्यु के उपरान्त निराश्रित महिलाओं से पुनर्विवाह करने पर दम्पत्ति को दिये जाने वाली पुरस्कार राशि को 11,000 से बढ़ाकर51,000 करने, दहेज पीड़ित महिलाओं को प्रति माह 125 रुपये की आर्थिक सहायता राशि को बढ़ाकर प्रथम चरण में 500 रुपये करने तथा दहेज पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता के रूप में एकमुश्त मिलने वाली 2500 रुपये की सहायता धनराशि को बढ़ाकर 10,000 रुपये करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रस्तुतिकरण के दौरान निर्देश दिया कि पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना, दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना तथा दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाए।

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