अनर्गल बोल पर अंकुश जरूरी

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गीतांजलि पोस्ट…… (रेणु शर्मा, जयपुर) पैसा बोलता है, यह सच है। पैसे के लालच में इंसान कुछ भी कर जाता है। हमारे यहाँ तो नेता और मस्जिद के शाही इमाम ही लोगों को पैसों का लालच देकर अपराध करने को प्रेरित कर रहे हैं। कल ही एक बीजेपी यूथ विंग के नेता योगेश वार्ष्णेय ने अपने बयान में पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ”राक्षस” बताया और उनका सिर काटकर लाने वाले को 11 लाख रुपए का ईनाम देने का ऐलान किया है। वहीं दूसरी ओर टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम नूरूर रहमान बरकती ने वार्ष्णेय के बयान देने के बाद अपना बयान दिया कि वार्ष्णेय का सिर काट कर लाने वाले को 22 लाख रुपए का ईनाम दिया जायेगा।

वार्ष्णेय द्वारा ऐसा बयान दिया गया है, वो सरकार के किये गये कार्यों का परिणाम है, यह समझ में आ गया, लेकिन मस्जिद के शाही इमाम रहमान ने ऐसा बयान क्यों दिया, यह समझ नहीं आया? आखिर हमारे नेता और मस्जिद के शाही इमाम चाहते क्या हैं ? क्यों सत्ता एवं धर्म के लिये वे मरने- मारने की बातें करके देश का वातावरण खराब कर रहे हैं ? ऐसी बयानबाजी करके वे आमजन को क्या संदेश देना चाहते हैं ? क्या उनका मकसद विवादित बयान देकर पत्रकारों का ध्यान अपनी ओर खींचकर सुर्खियों में आना है या सच में किसी का सिर कटवाना है। इस बात का जवाब तो वो ही दे सकते हैं, लेकिन जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों के ऐसे बोल कहाँ तक उचित हैं? ऐसे बयान देकर वे अपने साथ-साथ अपनी पार्टी और अपने धर्म की छवि भी खराब कर रहे हैं। जब कोई इंसान एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के बारे मेें यह कहता है सिर काटकर लाने वाले को 11 लाख रुपए का ईनाम देगा, वहीं दूसरी ओर मस्जिद के शाही इमाम यूथ विंग के नेता का सिर काटकर लाने वाले को 22 लाख रुपए का ईनाम देने जैसे वक्तव्य दे सकते हैं, ऐसे नेता और मस्जिद के शाही इमाम से क्या अपेक्षा की जा सकती है?

यद्यपि यह सही है कि ममता बनर्जी सरकार पश्चिमी बंगाल में बहुसंख्यक समाज की घोर अपेक्षा कर रही है, उन्होंने कभी भी सरस्वती की पूजा नहीं करने दी और ना ही कभी रामचन्द्रजी की शोभायात्रा का जुलूस निकालने की ईजाजत दी । रामनवमी पर भी जन-जन के आराध्य देव रामचन्द्रजी की शोभायात्रा का जुलूस निकालने की ईजाजत नहीं दी। यही नहीं जहाँ पर शान्तिपूर्वक जुलूस निकाला जा रहा था, उन श्रृद्धालुओं पर पुलिस ने जबरन बर्बरता पूर्वक लाठियां बरसा कर श्रृद्धालुओं को घायल कर दिया।

ममता बनर्जी सरकार के इस कृत्य को कोई भी सभ्य समाज उचित नहीं कहेगा। सरकार के इसी कृत्य के परिणामस्वरूप बीजेपी यूथ विंग के नेता योगेश वार्ष्णेय द्वारा ऐसा बयान दिया गया। हालांकि इस बयान के लिये बाद में वार्ष्णेय ने खेद भी प्रकट किया है। फिर भी ऐसी मानसिकता रखने वाले को सही नहीं कहा जा सकता। साथ ही सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वो बहुजन समाज की भावनाओं की कद्र करे। ऐसे विवादित बयान देने वालों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जानी चाहिये, जिससे भविष्य में कोई भी इस प्रकार की बयानबाजी करने से पहले 100 बार विचार करे।