जनसंख्या का आधा हिस्सा महिलाओं का अस्तित्व खतरे में

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11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस – विशेष

GEETANJALI POST…………

राज्य में दो बच्चों की नीति लागू है फिर भी 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की प्रजनन दर 2.4
पुरुष नसबंदी 0.2 प्रतिशत और कंडोम का उपयोग 8.7 प्रतिशत है, बच्चों की संख्या सीमित करने और अंतराल में पुरुषों की भागीदारी नही के बराबर

राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस से पूर्व परिवार कल्याण के लिए 5 से 10 जुलाई तक मोबलाइजेशन पखवाड़ा चलाया गया है वही 11 जुलाई से 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरत पखवाड़ा चलाया जाएगा। यदि राजस्थान की भौगोलिक व जनसंख्या की दृष्टि से परिवार नियोजन या जनसंख्या नियत्रण के लिए कार्य करना है तो जरूरी है कि पूरे वर्ष भर की कार्य योजना बना कर कार्य किया जाए। एक और जहां बढती जनसंख्या पर रोक लगाने के लिए प्रयास हो रहे हैं वही दूसरी ओर जनसंख्या का आधा हिस्सा महिलाओं का अस्तित्व खतरे में है। लगभग 6.86 करोड़ की जनसंख्या वाला राजस्थान देश का सातवां सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। इसमें महिलाओं की संख्या लगभग 3.29 करोड है, जो कि कुल जनसंख्या का 47.95 प्रतिशत है। अर्थात राज्य मे 14 लाख महिलाएं अभी भी गूम हैं। महिलाओं की निरंतर घटती संख्या के कई कारण है। गर्भस्थ शिशु की जांच करवाने के बाद गर्भपात और उच्च शिशु मृत्य दर के कारण बेटियां अपनी पहली सालगिरह नही मना पातीं है तथा पांच वर्ष की आयु में बच्चों की मृत्यु दर बच्चियों की संख्या को और कम कर देती है। समय पर क्वालिटी मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नही होने से राज्य में प्रति दिन एक महिला गर्भावस्था और प्रसव सम्बंधित कारणों से अनावश्यक मौत की भेंट चढ जाती है।

राजस्थान में महिलाओं की कम होती संख्या : कुछ तथ्य
तथ्य और स्रोत महिला पुरुष
जन्म के समय लिंग अनुपात
(एनएफएचएस -४: २०१४-१५) ८८७ १०००
बाल (०-६ वर्ष) लिंग अनुपात (जनगणना २०११) ८८८ १०००
लिंग अनुपात (जनगणना २०११) ९२८ १०००
शिशु मृत्यु दर (एसआरएस बुलेटिन दिसम्बर २०१६)) ४७ ४१
बाल -५ वर्ष से कम उम्र में- मृत्यु दर(अन्युअल हेल्थ सर्वे- २०१२-१३) ८१ ६८
मातृ मृत्यु अनुपात (अन्युअल हेल्थ सर्वे- २०१२-१३) २०८ –
दहेज़ हत्या (एनसीआरबी आंकड़े :वर्ष२०१४) ४०८ –
महिलाओं के विरूद्ध कुल अपराध (एनसीआरबी आंकड़े: वर्ष २०१४) ३११५१ –

राजस्थान में मातृ एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैरवी करने वाले संगठन सुमा’ द्वारा फरवरी 2017 में राजस्थान के 14 जिलों में लगभग दो हजार परिवारों से गर्भधारण और गर्भनिरोध से सम्बंधित प्राप्त जानकारियों के अनुसार लगभग 44 प्रतिशत दम्पत्तियो ने कहा की तब तक गर्भनिरोध के साधन का इस्तेमाल नहीं करना चाहते जब तक पुत्र की प्राप्ति नहीं हो जाती। पुत्र की चाहत महिलाओं को बार.बार गर्भ धारण करने के लिए बाध्य करती है, कम उम्र में कम अंतराल में अनेक गर्भ धारण होने से माँ और बच्चे दोनों की मृत्यु होने की सम्भावना बढ़ जाती है। परिवार नियोजन कार्यक्रमों में पुत्र की चाह को ध्यान में रखते हुए समाजिक बदलाव के प्रयास भी करने जरूरी है। सुमा राजस्थान सुरक्षित मातृत्व गठबंधन राज्य में मातृ और नवजात मृत्यु को कम करने के लिए वर्ष 2002 से कार्य कर रहा है। सुमा – मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की क्वालिटी बढाने और महिलाओं को गरिमापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने के लिए भी पैरवी करती है।
हालांकि राज्य में दो बच्चों की नीति लागू है फिर भी 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की प्रजनन दर 2.4 है जो 2.1 होनी चाहिए। लगभग 35.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम आयु में होने और गर्भ निरोध के साधनों तक सीमित पहुँच होने से लड़कियां कम उम्र में गर्भधारण करती हैं। राज्य में लगभग 60 प्रतिशत दम्पत्ति किसी भी प्रकार के परिवार नियोजन का इस्तमाल करते है। इनमे 41 प्रतिशत महिला नसबंदी, 1.2 प्रतिशत आई यु सी डी और 2.4 प्रतिशत गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करती हैं। बच्चों की संख्या सीमित करने और अंतराल में पुरुषों की भागीदारी नही के बराबर है जहाँ पुरुष नसबंदी 0.2 प्रतिशत और कंडोम का उपयोग 8.7 प्रतिशत है। पिछले 10 वर्षों में परिवार नियोजन के तरीकों के उपयोग में स्त्री नसबंदी के अलावा कोई विशेष परिवर्तन नही आया है। (स्त्रोत एनएफएचएस- 4 , 2015-16)
हर दंपत्ति को यह तय करने का अधिकार है कि उन्हें कब और कितने बच्चे चाहिए। इसके लिए जरूरी है लोगों को सक्षम करना ताकि वे जेंडर समानता के लिए कदम उठाएं, बालिकाओं के प्रति अपना नजरिया बदले और उनके जन्म लेने पर स्वागत करे। हर महिला -पुरुष को अपने शरीर और गर्भ निरोधकों के बारे में जानकारी हो, इसके आधार पर महिला -पुरुष दोनों मिलकर स्वास्थ्य सम्बंधित फैसले लें।
हर वर्ष 11 जुलाई को को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या से जुड़े मुद्दों के समाधान की जरूरत और जनसंख्या नियंत्रण के महत्व के प्रति पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करना है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यकम (यूएनडीपी) द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस का मूल विषय परिवार नियोजन, लोगों का सशक्तिकरण, राष्ट्र का विकास रखा गया है। राज्य में जनसंख्या से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए जरूरी है कि महिलाओं का सशक्तिकरण हो ताकि वे अपने स्वयं और अपने परिवार के बारे निर्णय लेने में सक्षम हो सके। इसके साथ ही पुरुषों में भी महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवार के निर्णय में भागीदारी के महत्व पर समझ बढाने और जन स्वास्थ्य केन्द्रों में मानव संसाधन की कमी दूर करने के भी प्रयास की जरूरत है। इससे राज्य में मातृ व शिशु स्वास्थ्य की स्थिति सुधरेगी और जनसँख्या नियंत्रण के लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकेगा।

राजन चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार
राजन चौधरी
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार