प्रधानाचार्य तेतरवाल की कड़ी मेहनत व लगन को देख भामाशाहों ने शैक्षित सुधार में बहाए लाखों

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GEETANJALI POST (मुकेश पारीक)

शैक्षिक गुणात्मक व संख्यात्मक प्रगति के साथ बिसाऊ की राजकीय स्कूल ने फिर पाई अपनी खोई प्रतिष्ठा

बोर्ड परीक्षा की रात्रिकालिन कक्षाओं ने उठाई निजी स्कूल संचालकों की नींद

विद्यालय की प्रगति को देख मुख्यमंत्री राजे ने भी कहा वैल्डन प्रिंसिपल साहब

बिसाऊ  (मुकेश पारीक)। जिले के बिसाऊ कस्बा स्थित सेठ दुर्गादत जटिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का नाम राजकीय स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा के लिए प्रदेशभर में प्रसिद्ध है। हांलाकि करीब एक दशक पहले इस राजकीय स्कूल को कोई नही जानता था। चारों ओर निजी स्कूलों के शोर-शराबे में इस राजकीय स्कूल ने अपनी पहचान खो सी दी थी। इसी का नतीजा निकला कि कभी एक हजार से अधिक नामांकन संख्या वाले व दो पारियों में चलने वाले इस विद्यालय का नामांकन 2014 में घटकर 400 से कम रह गया, परीक्षा परीणाम भी न्यूनतम, बेरंग विद्यालय भवन, जर्जर दीवारे, टूटा फुटा फर्नीचर, पानी व शौचालयों की सुविधा ना के बराबर, जंगल रूप ले चुके खेल मैदान ही दिखाई देता था। इसी विचित्र स्थिति में विज्ञान, वाणिज्य व कला तीनों संकाय वाले इस स्कूल की प्रधानाचार्य के रूप में 21 अक्टूबर 2014 को कमलेश कुमार तेतरवाल ने बागडोर संभाली। इसी बाद तो इस राजकीय स्कूल के दिन फिरने लगे। जिसका नतीजा निकला कि पिछले दो वर्षो में ही प्रदेशभर में इस स्कूल के भौतिक व शैक्षिक विकास के गौरवगान होने शुरू हो गए। इस विद्यालय का वर्ष 2015-16 में कुल नामांकन 359, 2016-17 में 582 व 2017-18 में 800 से अधिक नामांकन हो चुका है, जबकि अभी भी प्रवेश की प्रकिया जारी है। इस वर्ष विज्ञान संकाय में अभी तक 160 से अधिक विद्यार्थियों द्वारा दाखिला लिया जा चुका है। वही वाणिज्य में 70 से अधिक व कला संकाय में 250 से अधिक विद्यार्थियों ने अभी तक प्रवेश ले चुके है। विद्यालय में अचानक बढ़े नामांकन के पीछे केवल विद्यालय का परीक्षा परिणाम ही बड़ा कारण रहा है। जिसमें सत्र 2014-15 व 15-16 के औसत सुधार के साथ ही सत्र 2016-17 में कुल 44 विद्यार्थियों के साथ कक्षा दस का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, 12वीं कला वर्ग में 66 विद्यार्थियों के साथ 97 प्रतिशत, 12वीं वाणिज्य संकाय में 27 विद्यार्थियों के साथ शत-प्रतिशत व विज्ञान संकाय के 47 विद्यार्थियों के साथ परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है।

विद्यालय की शैक्षित प्रगति से जुड़े भामाशाह

इस राजकीय स्कूल में बढ़ती शैक्षिक प्रगति व अच्छे नामांकन ने क्षेत्र के भामाशाहों को अपनी ओर आकृषित करना शुरू कर दिया। इसी का नतीजा निकला कि भामाशाहों द्वारा सभी विद्यार्थियों एवं स्कूल स्टॉफ के परिचय पत्र बनावाएं गए, विद्यालय में सभी छात्राएं नि:शुल्क पढ़ती है, पिछले वर्ष भामाशााहों द्वारा 50 हजार रूपये की राशि एवं इस वर्ष 70 हजार रूपये की राशि भामाशाहों द्वारा बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं की पहल पर जमा करवाई जाएंगी। इसके अलावा हर वर्ष जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल गणवेश एवं उनकी फीस भी भामाशाहों के सहयोग से जमा करवाई जाती है। स्कूल परिसर के पूरे प्रांगण में भामाशाह के सहयोग से हरा भरा गार्डन तैयार करवाया गया है। इस वर्ष 75 प्रतिशत से 85 प्रतिशत अंक बोर्ड परीक्षाओं में प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 5100 रूपये, 85 प्रतिशत से 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वालों को 11000 रूपये एवं 90 प्रतिशत से 95 प्रतिशत तक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 21000 रूपये तथा 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 51000 रूपये देकर पुरस्कार दिया जाता है। इस प्रकार गत वर्ष अच्छे अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 1,45,400 रूपये का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा चुका है। वहीं राज्य स्तरीय व राष्ट्र स्तरीय खेलों, एनसीसी व एनएसएस के लिए भी नगद पुरस्कार दिया जाता है। भामाशाहों द्वारा विद्यालय का श्रेष्ठ परिणाम देने वाले सभी अध्यापकों को 20-20 ग्राम के चांदी के सिक्के दिए गए, पिछले सत्र में राष्ट्रीय स्तर पर कवि संगोष्ठी व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्ष अखिल भारतीय वाद विवाद प्रतियोगिता व राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी भामाशाह के सहयोग से हुआ है। वहीं  भामाशाहों के सहयोग से ही स्कूल के सभी कमरों में पंखे, 1.50 लाख की राशि से खेल मैदान का लेवलिंग कार्य, विज्ञान लैब, कम्प्यूटर लैब का नवीनीकरण एवं स्मार्ट क्लास के साथ-साथ प्रधानाचार्य कक्ष व  कार्यालय स्टॉफ रूम सभी सुविधाओं से सृजित बनाया गया है।

अब स्कूल में होते है नित नए नवाचार

प्रधानाचार्य कमलेश कुमार तेतरवाल
प्रधानाचार्य कमलेश कुमार तेतरवाल

प्रधानाचार्य कमलेश कुमार तेतरवाल की कड़ी मेहनत व लगन के चलते विद्यालय में नित नए नवाचार होते है। जिसके चलते अगस्त माह में ही अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाती है, बोर्ड़ परीक्षा के दौरान रात्रिकालीन कक्षाएं निजी स्कूल संचालकों की नींद उठाती है। इसके अलावा नियमित रूप से योग कक्षा प्रात: 5 से 7 बजे तक स्वयं प्रधानाचार्य के नेतृत्व में योग शिक्षक यशवंत द्वारा अभ्यास करवाया जाता है। माइक सैट से संगीतमय प्रार्थना सभा एवं योगाभ्यास भी अभिभावकों को खूब आकृर्षित कर रहे है।

विद्यालय की प्रगति की गूंज पहुंची प्रदेशभर में

इस वर्ष विद्यालय में दो विद्यार्थियों द्वारा बोर्ड कक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर सभी को चोका दिया। जिसके चलते कई बाद विभाग निदेशालय उपनिदेशक कार्यालय से अधिकारी, जिला कलैक्टर व अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का दौरा व सराहना स्कूल परिवार प्राप्त कर चुका है। यहीं नही गत वर्ष शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय विडियो कांफ्रेस में स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रधानाचार्य कमलेश कुमार तेतरवाल से विडियो कांफे्रस पर 6 मिनट बात कर विद्यालय के बारे में जानकारी ली ओर कहा वैल्डन प्रिंसिपल साहब आप जैसे प्रधानाचार्य जैसा स्टॉफ अगर सरकार को 20 से 30 की संख्या में मिल जाए, जिसे हम पूरे राजस्थान में फैला दे, तो प्रदेश के राजकीय शैक्षिक व्यवस्था में कोई भी पिछड़ा जिला नही रहेगा।

प्रधानाचार्य से प्रेरित होकर भामाशाहों ने स्कूल विकास में बहाये लाखों

स्कूल प्रधानाचार्य कमलेश कुमार की विद्यालय के प्रति शैक्षिक लगन व इनसे प्रेरित होकर भामाशाह कमल पोद्दार ने करीब 5.25 लाख की लागत से पूरे भवन के एशियन कलर, डिस्टेम्बर,ऑयल पेंट के साथ स्कूल भवन में स्थिति सुधारी। साथ ही 1.50 लाख की लागत से विद्यालय के प्रचार प्रसार में हार्डिग्र्स, फ्लेक्स, पोस्टर, पंपलेट व प्रचार रथ पर सत्र 2016-17 के लिए खर्च किए गए। इसी के साथ एक लाख  रूपये की राशि प्रधानाचार्य कक्ष पर, 3 लाख रूपये के 200 सैट फर्नीचर  विद्यार्थियों के लिए, 50 हजार स्टॉफ कक्ष के फर्नीचर के लिए, 1.80 लाख जल मंदिर, वाटर कूलर व आरओ के लिए, 60 हजार एल्यूमिनियम पार्टीशन, खिडक़ी व अन्य खर्चे भामाशाह परिवार द्वारा किए गए है। इसी प्रकार कुल 13.65 लाख रूपये का आर्थिक सहयोग विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए भामाशाहों से स्कूल परिवार को मिल चुका है।