बेगुनाहों की मौत का जिम्मेदार राम रहीम के अनुयायी, सरकार या न्यायालय ! कौन ?

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गीतांजलि पोस्ट………..(रेणु शर्मा,जयपुर) साध्वी से यौन शोषण के मामले में सीबीआई पंचकुला स्थित अदालत के डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को धारा 376 और 506 के तहत दोषी करार देने के बाद जैसे ही पुलिस ने गुरमीत राम रहीम को हिरासत में लिया वैसे ही देशभर में फैले राम रहीम के लाखों समर्थकों में दुख की लहर फैल गई और वे गुंडागर्दी पर उतर आये। हिंसा की वारदातें पंचकुला से दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच गयी। दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन में खड़ी रीवा एक्सप्रेस के दो खाली डिब्बों में आग लगा दी, कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हमला कर दिया, आज तक टीवी चैनल की ओबी वैन को तोड दिया, पंजाब के संगरूर के बिजली घर और तहसील कार्यालय में आग लगा दी । राम रहीम के समर्थकों की गुंडागर्दी में करीब 30 बेकसूर लोगों की जान चली गयी एवं 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

सरकार द्वारा हिंसा को रोकने के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं । पंचकुला में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा सरकार की केबिनेट मिटिंग बुलाई,  पुलिस आंसू गैस के गोलों द्वारा हिंसा को कम करने की कोशिश कर रही हैं पंचकूला में ही सेना के 500 जवान तैनात कर दिये हैं और पूरे हरियाणा में सीपीएल की सौ कम्पनियों के साथ करीब बीस हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं,हिंसा कर रहे बाबा के 1000 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया ।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केन्द्रीय गृहमंत्री दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए जनता से शान्ति बनाये रखने की अपील की हैं। वर्तमान घटनाक्रम को देखते हुए राम रहीम के समर्थकों के आगे प्रशासन के प्रयास कमजोर दिखाई दे रहे हैं। नॉर्थ और सेंट्रल दिल्ली के 3 जिलों को छोड़कर दिल्ली के 11 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गयी। इस बीच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि राम रहीम की संपत्ति जब्त की जाए जिससे उसके समर्थकों द्वारा किये जा रहे नुकसान की भरपाई उसकी संपति को बेचकर कि जा सके। 

कानून विशेषज्ञ कहते हैं कि मामले में दोषी कराए दिए जाने के बाद राम रहीम को 7 साल की सजा सुनाई जा सकती है और पांच साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उसे ऊपरी कोर्ट से जमानत लेनी होती है यानी बाबा राम रहीम को अब हाईकोर्ट से जमानत लेनी होगी। जमानत मिलने तक उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।

ये सारा घटना क्रम ये बताता हैं बाबा राम रहीम कोई साधु-संत नहीं बल्कि ढौंगी बाबा था जिसने साधु का जामा पहना हुआ था। जैसा कि आप सभी जानते है कि सिरसा के डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ अप्रेल 2002 में एक साध्वी ने चिढी लिखकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को यौन शौषण की शिकायत भेजी थी। हाईकोर्ट ने इसके तथ्यों की जांच के लिए सिरसा के सेशन जज को भेजा और इसके बाद इसी साल दिसंबर में सीबीआई ने राम रहीम पर धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता साध्वी को तलाशने में ही जांच एजेंसियों को चार साल लग गए। साध्वी के बयान लेने के बाद बाबा राम रहीम के खिलाफ जुलाई 2007 में सीबीआई ने अंबाला सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट फाइल की थी। जहां से बाद में मामले को पंचकूला शिफ्ट कर दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान 52 गवाह पेश किए गए, इनमें 15 प्रॉसिक्यूशन और 37 डिफेंस के थे। जून में डेरा प्रमुख के विदेश जाने पर कोर्ट ने रोक लगा दी और जुलाई में इस मामले की रोज सुनवाई के निर्देश दिए गए थे। इसका असर ये हुआ कि 17 अगस्त को इस मामले में बहस पूरी हो गई और 25 अगस्त को फैसला सुना दिया, अब 28 अगस्त को कोर्ट उसकी सजा पर सुनवाई करेगा।

इस मामले में हरियाणा सरकार की भी कमी थी,जब हरियाणा सरकार को पहले से मालूम था की 25 को अगस्त को फैसला सुनाया जायेगा फिर भी सरकार ने पंचकुला एंव सिरसा में लाखों लोगों को एक जगह एकत्रित होने दिया जबकि वहा धारा 144 लगा दी गयी थी, फिर भी वहां इतना जन-सैलाब एकत्रित क्यों होने दिया ?

मीडिया वाले बार-बार डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की भीड के द्वारा दी जा रही धमकियों का सीधा प्रसारण कर रहे थे जो ये दर्शा रहा था कि सजा होते ही हालात बेकाबू हो सकते हैं ऐसे में कोर्ट को भी सजा देने की कार्यवाही को स्थिति सामान्य होने तक स्थगित कर देना चाहिये था, कानून व्यवस्था बनाये रखने में न्यायालय का भी सहयोग अपेक्षित था।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र

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