संस्कृति एवं धार्मिक सुगन्ध से महकता ”धान के कटोरा“

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GEETANJALI POST (डॉ. प्रभात कुमार सिंघल – लेखक एवं पत्रकार, कोटा)

विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर की धार्मिक आस्था, भांगड़ा नृत्य की महक, हीर-रंाझा एवं सोहनी-महीवाल के अमर प्रेम कथा से सुवासित प्रदेश पंजाब की ओर अब आपको ले चलते हैं। यहीं पर हैं शिवालिक और हिमालय पर्वत मालाओं के उतंग शिखर तथा प्राड्डतिक परिवेश के साथ बल खाती प्राचीन नदियों की प्रचुरता।

”धान के कटोरे“ के रूप में विख्यात यह प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अपना अग्रणीय स्थान रखता है। लुधियाना में होजरी एवं ऊनी कपड़ों के उत्पादन से इसे ”भारत का मेनचेस्टर“ कहा जाता है। गुरूग्रंथ साहिब सिखों का सबसे पवित्र एवं पूज्यनीय गं्रथ है। इस गं्रथ की महत्ता इस बात से है कि सभी धर्मों के लोग गं्रथ के सम्मुख मत्था टेकते हैं। विश्व में प्रसिद्ध चण्डीगढ़ शहर अपनी सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित नगर के रूप में पहचान बनाता है। फ्रांसिसी वास्तुकार ली कोर्बूजियर ने इस नगर को अभिकल्पित किया था। समीप में चण्डी मंदिर होने के कारण इस शहर का नाम चण्डीगढ़ रखा गया। राज्य की राजधानी होने से ”केपिटल कॉम्पलेक्स“ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यहीं पर माहोली में है राज्य का अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्टेडियम।

देश के उत्तर में स्थित पंजाब राज्य की सीमाएं उत्तर में जम्मू एवं काश्मीर के राज्यों से, पूर्व में हिमाचल प्रदेश राज्य से, दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व में हरियाणा राज्य से, दक्षिण-पश्चिम में राजस्थान राज्य से तथा पश्चिम की ओर पंजाब प्रान्त से जुड़ी हुई हैं। चण्डीगढ़ इस राज्य की राजधानी एवं संघ राज्य क्षेत्र होने के साथ-साथ हरियाणा राज्य की भी राजधानी है। पंजाब राज्य पंजाबी भाषा के आधार पर वर्ष 1966 में अस्तित्व में आया। राज्य का क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किमी है तथा प्रशासनिक दृष्टि से दो संभागों एवं 22 जिलों में विभक्त किया गया है। यहां कि जनसंख्या 2.77 करोड़ से अधिक है तथा साक्षरता दर 75 प्रतिशत है। यहां प्रमुख रूप से सिखों व हिन्दुओं के साथ-साथ न्यूनाधिक सभी धर्मो के लोग निवास करते है। हिन्दी एवं पंजाबी यहां की प्रमुख भाषा है। राज्य में नदियों के साथ-साथ व्यापक नहर प्रणाली देखने को मिलती है। यहां सतलज, व्यास, रावी, चिनाब एवं झेलम प्रमुख पाँच नदियां राज्य की अपनी विशेषता हैं।

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वन एवं वन्यजीवों की दृष्टि से रोपड़, गुरूरदासपुर एवं होशियारपुर जिलों में समृद्ध वनस्पतियों एवं वन्यजीवों की उपलब्धता शिवालिक पर्वतमाला पर देखने को मिलती है, जिसके कारण इसे देश का सूक्ष्म स्थानिक क्षेत्र कहा जाता है। राज्य में बड़े पैमाने पर पशु-पक्षी पाये जाते तथा यहां चार अभ्यारणय दर्शनीय है। इनमें कपूरथला में शालीमार गार्डर अमृतसर का रामबाग, सिरहिन्द में आम खास बाग एवं संगरूर में छतबीर बसर गार्डन प्रमुख है।

पंजाब की अर्थव्यवस्था की दृष्टि से ड्डषि प्रधान राज्य है जहां सबसे अधिक उपजाऊ क्षेत्र पाया जाता है। यहां गेहूँ, चावल, गन्ना, कपास, मोती बाजरा, मक्का एवं जौ आदि फसले की जाती हैं। फिरोजपुर और फजिलका राज्य में गेहँू एवं चावल उत्पादन के सबसे बड़े जिले हैं। राज्य को ड्डषि विस्तार सेवाओं के लिए 10 बार राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राज्य में विभिन्न किस्मों के संतरे, सेव, अंजीर, बादाम, अनार, आडू, शहतूत, खुबानी एवं प्लम फलों की खेती बहुतायत से की जाती है। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में वैज्ञानिक उपकरणों, इलेक्ट्रोनिक्स सामान, होजरी, ड्डषि उपकरणों, बिजली के सामान, मशीन उपकरण, सिलाई मशीन, खेल सामान, साइकिल, उर्वरक, चीनी, इस्पात रोलिंग आदि के उद्योग अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते है। पर्यटन तीसरा बड़ा उद्योग है जिसका यहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है।

पंजाब साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक समृद्ध राज्य की श्रेणी में आता है। साहित्य के आकाश पर ऋग्वेद, पाणिनी की अष्टधायी, सकारायण की व्याकरण, चरक संहिता, भागवत गीता एवं महाभारत ऐसे प्राचीन गं्रथ है जो इस भूमि पर आंशिक या पूर्ण रूप से रचे गये। पन्द्रहवीं शताब्दी में यहां सिख धर्म का उदय हुआ और गुरूनानक देव, बांदासिंह तथा भाई मतीदास जैसे प्रभावी सिख गुरूओं ने इस पावन भूमि पर जन्म लिया। सांस्कृतिक दृष्टि से पंजाब में पुरूषों द्वारा किया जाने वाला भांगड़ा एवं महिलाओं का गिद्दा नृत्य सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्यों में माना जाता है। यहां के नृत्य अधिकतर फसल बोने एवं फसल पकने व काटने के समय उल्लास बिखेरते हैं। अन्य नृत्यों में धमाल, ढोला एवं सम्मी नृत्य प्रमुख है। इन लोक नृत्यों का पंजाबी संगीत के साथ विभिन्न आकर्षक मुद्राओं एवं भाव भंगिमाओं से प्रदर्शन किया जाता है। इस भूमि पर लोहड़ी, बसन्त एवं बैशाखी, गुरूनानक जयन्ति के साथ-साथ होली, दीवाली, दशहरा के पर्व पूर्ण उमंग से मनाये जाते हैं। भांगड़ा नृत्य की लोकप्रियता का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाड़ा और इग्लैण्ड की पश्चिमी दुनिया के साथ मिलकर यह हाईब्रिड नृत्य बन गया है तथा विभिन्न प्रकार की धुनों का विकास हुआ है। यहां मावली एवं पल्ली बोलियों में गाने, गाथा गीत एवं महाकाव्य और रोमांस के गीत गाये जाते हैं। संगीत के क्षेत्र में पंजाब घराना और पटियाला घराना अपना विशेष महत्व रखता है। मिर्जा साहिबान, सस्ती पुनन, जग्गा जाट, दुल्ला भट्टी, पुराण भगत, जीना मौड की लोक कथाऐं भी यहां प्रचलित हैं। सांस्ड्डतिक दृष्टि से सिख पगड़ी बांधने की अनेक कला शैलियां प्रचलित हैं। इनमें पटियाला शाही, मौनी दत्तार, पोचवी दस्तान, बरनाला शाही एवं अमृतसर शाही प्रमुख शैलियां हैं। राज्य में आकर्षक स्थल एवं समृद्ध संस्ड्डति होने के साथ फिल्मों की शूटिंग भी होने लगी है। मक्का की रोटी, सरसो का साग एवं छाछ यहां का सर्वाधिक लोकप्रिय व्यंजन है।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ;पंजाब विश्विद्यालय के पूर्व छात्रद्ध, जैव रसायन शास्त्री नोबल पुरस्कार विजेता हरगोविन्द खुराना, क्रिकेटर कपिल देव, युवराज सिंह, अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बलवीर सिंह, हॉटमेल के संस्थापक सुबीर भाटिया, रॉक गार्डन के निर्माता नेकचन्द, पंचकुला कैक्ट्स गार्डन के जन्मदाता जी. एस. सरकारिया एवं धावक मिल्खा सिंह इस धरती की शान हैं। खेल की दृष्टि से राज्य में क्रिकेट, गोल्फ, हॉकी, बैडमिटन, कैरम एवं शूटिंग रेंज के दस खेल परिसर एवं स्टेडियम उपलब्ध हैं। रायपुर ग्रामीण ओलंपिक के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटन की दृष्टि से अमृतसर एवं चण्डीगढ़ महत्वपूर्ण शहर हैं। यहां अनेक पर्यटक स्थल दर्शनीय हैं।