पिप्लाद तीर्थ में स्नान से नष्ट होता है ब्रह्महत्या का पाप

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GEETANJALI POST

परबतसर(अखिल दाधीच)सम्पूर्ण विश्व् मे भारत वर्ष एक परम पावन वंदनीय दीव्य देश है। स्वर्ग के समस्त सुख भोगने वाले देवताओं ने भी इस धरा धाम का गुणगान करते हुये यहाँ जन्म लेने की सदैव कामना की है राजस्थान के नागौर जिले मे परबतसर से 10 किमी दूरी पर स्थित पिपलाद ग्राम पदम पुराण के 157-158 अध्याय के अनुसार पिप्लाद तीर्थ के रूप मे जाना जाता है यहाँ महर्षि दधिची के पुत्र पिप्लाद मुनि ने अनन्त काल तक तपस्या की थी तथा पीपल के पत्रों का ही आहार किया सन् 1975 मे सलेमाबाद मे विराट धर्म सम्मेलन हुआ जिसमें धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज, जगदगुरु शंकराचार्य, जगदगुरु रामानुजाचार्य, जगदगुरु निम्बार्काचार्य आदि द्वारा इसकि पुष्टि की गई वर्तमान मे जो पिपलाद है यही पिप्लाद तीर्थ है उस समय परबतसर का अस्तित्व ही नही था पिप्लाद तीर्थ से परबतसर मुख्य बाजार तक इस तीर्थ की सीमा मानी जाती थी उस समय मे पिप्लाद तीर्थ की गणना अजमेर जैसे नगरों मे की जाती थी इसकी सीमा 10 किमी के दायरे मे थी तथा मेह गाँव,निटुटि,रोहिण्डी आदि इसके उपनगर थे आबादी की दृष्टि से यह विशाल नगर के रूप मे था यहाँ पर हर जाति के लोग आवास करते थे इसमें श्री माली समाज जाति के 300 से अधिक घर थे तथा वे कर्मकाण्ड का कार्य करते थे।दाधीच ब्राह्मणों के भी काफी घर थे आज श्री माली समाज के केवल 3-4 घर ही है शास्त्रो व पदम पुराण आदि मे बताया है कि इस तीर्थ मे स्नान करने से ब्रह्म हत्या का पाप भी नष्ट हो जाता है पिप्लाद तीर्थ जो अब पिपलाद नाम से पुकारा जाने लगा है अवस्थित है सभ्र्मति नदी तो यहाँ से मात्र 2 किमी. करकेडी मार्ग पर बहती है।पिप्लाद तीर्थ से पुष्कर सरोवर 50किमी.दुरी पर है जहाँ पर दधीचि आश्रम प्राचीन काल से है पिप्लाद आश्रम की पहाड़ी पर स्थित गुफा का सम्बंध पुष्कर सरोवर व महर्षि दधिची के आश्रम तक माना जाता है।