जाके पेर ना फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई

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GEETANJALI POST

ये कहावत हमारे केन्द्रीय पर्यटन राज्यमंत्री के.जे.एल्फोंस पर चरितार्थ सिद्व हो रही हैं, पेट्रोल एंव डीजल की मूल्य वृद्धि को लेकर 16 सितम्बर को को उन्होने बयान दिया कि पेट्रोल और डीजल का उपभोग करने वाले कार और स्कूटर मालिक भूखे नहीं मर रहे हैं। जब आप कार और स्कूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर टैक्स चुकाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
आजकल अन्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की किमत लगातार कम हो रही हैं लेकिन हमारे यहंा बढ रही हैं। पेट्रोलियम पर अप्रैल 2014 में पेट्रोल पर टैक्स 34 फीसदी था और डीजल पर 21.5 फीसदी था, लेकिन जुलाई 2017 में पेट्रोल पर टैक्स 58 फीसदी और डीजल पर 50 फीसदी के स्तर को भी पार कर चुका है। यदी भारतीय तेल की कीमतों की तुलना अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ करे तो आप पायंगें कि हमारे यहंा सबसे ज्यादा टैक्स लिया जा रहंा हैं। पेट्रोल एंव डीजल के मूल्य में वृद्वी का असर सिर्फ वाहन चलाने पर ही नहीं होता बल्कि उसका असर किराने का सामान, फल-सब्जी, कपडे सभी पर होता हैं महंगाई बढती हैं इसका असर आम व्यक्ति पर पड़ता है। माना की डीजल की मूल्य वृद्धि से मंत्री महोदय को कोई फर्क नहीं पडता क्योकि जिस व्यक्ति को मुफ्त में पेट्रोल मिलता रहा हो उसे सामान्य इंसान की पीड़ा समझ में नहीं आएगी। पहले जब वे लगभग 40 साल तक आईएएस रहे उन्हें मुफ्त पेट्रोल मिलता था और आज मंत्री हैं तो भी उन्हें मुफ्त पेट्रोल मिल रहा है। मंत्रीजी से जनता को अपेक्षा थी कि वे तेल की किमत बढने का कोई सार्थक कारण कबतायेगें ये तेल की किमतों को कम करेगें लेकिन उन्होने जो बयान दिया हैं वो जनता के लिये जले पर नमक छिडकने जैसा हैं। मंत्री महोदय का ऐसा वक्तव्य देना उचित नहीं हैं जन प्रतिकनिधि को ऐसे विवादित बयान से बचना चाहिये। सरकार को आम आदमी को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल एंव डीजल का मूल्य निर्धारण करना चाहिये।