मंदिरों का नगर बांरा

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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल-लेखक एवं पत्रकार, कोटा
.कोटा से 72 कि.मी. दूर राजमार्ग 27 पर स्थित बांरा जिला मुख्यालय है। पष्चिम-मध्य रेल्वे मण्डल की कोटा-बीना रेलवे लाईन पर स्थित बांरा प्रमुख जंक्षन है। किसी समय यहां की बसावट परकोटे के भीतर थी परन्तु आज इसकी बसावट ने व्यापक विस्तार तो किया है।
रियासत के समय बांरा कोटा राज्य की निजामत थी। वर्श 1975 में राजस्व प्रषासन के पुनर्गठन के समय बांरा को उपखण्ड बनाया गया। आगे चलकर 10 अप्रेल 1991 को कोटा से अलग कर बांरा नाम से नया जिला बनाया गया और इसमें बांरा सहित किषनगंज, षाहबाद अंता, छबड़ा, छीपाबड़ोद, मांगरोल, अटरू तहसीलें षामिल की गई।
बांरा जिला राज्य के दक्षिणी पूर्वी भाग में 24.24“ से 25. 26 उत्तरी अंक्षांष एवं 76.12 से 77.26 पूर्वी देषान्तरों के मध्य स्थित है। जिले का क्षेत्रफल 6992 वर्ग किलोमीटर है। वश्र 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले क कुल जनसंख्या 12, 23, 921 है। परवन, पार्वती एंव कालीसिंध प्रमुख नदियां हैं। जिले में चावल, सरसों, गेहूं तथा धनिये की अच्छी पैदावार होती है। यहां की मण्डी प्रदेष की बड़ी मंडियों में षुमार हैं। षाहबाद तहसील में जिले की सबसे ऊँची पर्वत चोटिंया हैं। काफी बड़ा भू भाग वन क्षेत्र है। जिले का तापमान गर्मियों में 45 डिग्री सेन्टीग्रेट तक पहुंच जाता है तथा औसत वर्शा 60 सेन्टीमीटर होती है। बांरा जिले में बांरा नगर परिशद, अंता छबड़ा तथा मंागरोल नगर पालिकाऐं, सात पंचायत समितियां, 214 ग्राम पंचायतें एवं 1244 राजस्व गांव हैं।
बांरा षहर में बूंदी की राजमाता रायकंुवर बाई द्वारा संवत 1537 में बनवाया गया श्री कल्याणराय जी का मंदिर अंचल का श्रद्धा केन्द्र है। चौमुखा बाजार में स्थित सांवला जी का कलात्मक मंदिर कोटा के महाराव भीमसिंह प्रथम ने संवत 1766 में बनवाया था। डोल तालाब के समीप स्थित प्यारेलाल जी का मंदिर निज मंदिर है। मंदिर में लक्ष्मण जी, चारभुजा जी, राम-जानकी एवं भरत की प्रतिमाऐं हैं। यहां रामानंदी सम्प्रदाय के गुदड़ी पंथ की पीठ रही है। भूतेष्वर, रघुनाथजी, सत्यनारायण जी मंदिरों सहित नगर में करीब 200 मंदिर हैं। प्राचीन 17वीं सदी का जोडला जैन मंदिर सहित नगर के पूर्व में स्थित दिगम्बर जैन अतिषय क्षेत्र नसिया जी सिद्ध क्षेत्र माना जाता है। यह नगर 19वीं सदी में एक प्रमुख व्यापारिक केन्द्र था।

जिला बनने के बाद यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया। कलेक्ट्रेट (मिनी सचिवालय) न्यायालय कार्यालय षहर के बार कोटा मार्ग पर बनाये गये। रेलवे स्टेषन से जाने वाली षहर की सड़क को चौड़ा यिका गया। रेल लाईन पर ओर ब्रिज बनाये गये। बांरा षहर निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। वर्तमान में करीब 60 तेल मिलें, एवं चावल मिले तथा स्टील, लोहा एवं पीतल के बर्तन बनो की लभग 150 इकाईंया कार्यरत हैं। बांरा के समीप मांगरोल में खादी हस्तषिल्प का कार्य प्रसिद्ध है। बांरा में भाद्र माह की षुक्ल पक्ष एकादषी अर्थात जलझूलनी एकादाी को भव्य षोभा यात्रा एवं डोल मेले का आयोजन जिले का सबसे बड़ा मेला है। मंदि में पन्द्रह दिन पहले देव विमान सजाने की तैयारी षुरू हेा जाती है। डोल यात्रा में करीब 52 मंदिरों की श्रृंगारित देव विमान झांकियां षामिल होती है। श्रीजी के विमान के दर्जन भर व्यक्ति कंधे पर उठाकर चलते हैं। चौमुख चौक पर रघुनाथ जी एवं श्रीजी विमानों का “मिलन” व “नमन” होता है। डोल तलाब पर विमानों को पंक्तिबद्ध रखकर जलवा पूजन किया जाता है।