ईलाज के नाम पर मरीज़ों से खिलवाड

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Geetanjali Post…

हमारे यहां डाक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन कुछ ऐसे भी तथा कथित डॉक्टर भी हैं जो बिना किसी प्रशिक्षण या डिग्री के अपना क्लिनिक खोल कर बैठे हैं और मरिजों का ईलाज कर रहे हैं। हम झोलाछाप डॉक्टर की बात कर रहे हैं जिनका जाल ग्रामीण मे ही नही शहरों में भी फैला हुआ है। हॉल ही में जैसलमेर के एक क्लिनिक में गलत इंजेक्शन लगाने से मरीज की हुई मौत हो गयी, उसके बाद डॉ ने मरीज की तबियत ज्यादा खराब होने का बहाना बनाकर दूसरे अस्पताल भेजा वहां के चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ऐसा वाकया पहली बार नही हुआ देश भर में चल रहे क्लिनिकों में कही ना कही इस प्रकार की घटना घटती रहती हैं, कुछ घटनाये लोगों की जागरूकता के कारण सामने आ जाते हैं तो कुछ वही दफन हो जाते हैं।
राजस्थान की राजधानी जयपुर की बात करे तो जयपुर में हजारों की तादात में ऐसे क्लिनिकों ने अपना जाल बिछा रखा हैं जहां तथा कथित डॉक्टर बिना किसी प्रशिक्षण या डिग्री के अपना क्लिनिक खोल कर बैठे हैं और मरिजों का ईलाज कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा इन पर शिकंजा नहीं कसने के कारण झोलाछाप डॉक्टरों का मनोबल बढ़ रहा हैं। ऐसे ही कुछ झोलाछाप डॉक्टरों सेे बात करने पर खुलासा हुआ कि उनके पास कोई डिग्री नहीं है लेकिन आज 8-10 सालों से हर मर्ज का इलाज करते चले आ रहे हैं, तो कुछ ने कहा की अपना पेट पालने के लिये क्लिनिक खोल कर बैठे हैं इसमें क्या गलत हैं। नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के डॉ.सतीश कुमार शर्मा ने बताया बिना किसी डिग्री के ऐसे कथित डॉ बुखार से लेकर किसी आपरेशन तक करने से नहीं चूकते अब ये अलग बात है कि इनके इलाज से कितने मरिजों का ईलाज हुआ हैं और कितने मरिजों को जान से हाथ धोना पड़ा है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पर शिकंजा नहीं कसने के कारण इनका मनोबल बढ़ता जाता है। बुखार तक तो ठीक है लेकिन पैसे के लिए ये आपरेेशन तक करने से गुरेज नहीं करते।
यद्यपी ईलाज के लिये सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क ईलाज होने के बावजूद जनता ऐसे क्लिनिकों पर ईलाज के लिये क्यो जाती हैं यह सोचने का विषय हैं लेकिन प्रशासन को ऐसे क्लिनिकों का संचालन करने वाले और साथ ही ऐसे मेडिकल स्टोर्स या दवा विक्रेता जो ऐसे क्लिनिकों को बिना किसी बिल के दवाईयां देते हैं उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिये जिससे कथित झोलाछाप डॉक्टरों और उनकी दुकानों पर रोक लग सके साथ ही ऐसे अस्पतालों की जांच की जानी चाहिये जो अस्पताल संचालन के मांपदण्डों को पूरा नहीं करने के बाद भी घडल्ले से अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।

रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र