लेह .. देखते ही बनता है गोम्पाओं के उत्सवों में किये जाने वाला नृत्य

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(डॉ. प्रभात कुमार सिंघल)

प्रकृति का उपहार एवं लद्दाख क्षेत्र का प्रमुख शहर लेह सिंधु नदी द्वारा बनाये गये पठार के शिखर पर 11562 फीट ऊँचाई पर स्थिति एक छोटा सा नगर है। रव्री-त्सुगल्दे द्वारा इस नगर को 14 वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था। शुरू में इसका नाम स्ले या ग्ले था परन्तु 19 वीं शताब्दी में मोरोविलियन मिशनरी ने इसका नाम बदलकर लेह कर दिया। लद्दाख के राजाओं द्वारा लेह में कई महल, बौद्धमठ एवं धार्मिक भवनों का निर्माण करवाया गया। यहां यारकंद एवं कश्मीर के व्यापारियों द्वारा इस्लाम धर्म का आगमन हुआ। लेह में गोम्पाओं के उत्सवों में किये जाने वाला नृत्य नाटक देखते ही बनता है। नृत्य में भयानक आकृति के मुखौटे लगाकर, चमकदार ड्रेस पहनकर स्वांग रचना एवं विभिन्न धार्मिक पक्षों का प्रदर्शन करना प्रमुख आकर्षण होते हैं। पद्मासम्भव को समर्पित ”हेमिस“ सबसे बड़ा और प्रसिद्ध बौद्धमठ उत्सव है।

नौ मंजिला महल
लेह में देखने के लिए राजा सिंगे नामग्याल का नौ मंजिला महल तिब्बत वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है। यहां महात्मा बुध के जीवन की घटनाओं की दीवारों पर चित्रकारी की गई है जो अब धुमिल पड़ गई है। महल में 12 मंदिर एवं 2 शाही मठ बने हैं। महल को अब संग्रहालय में बदल दिया गया है। जहां ठंग्का चित्रों, स्वर्ण प्रतिमाओं एवं तलवारों का संग्रह किया गया है।

सेमो गोम्पा
नौ मंजिले महल के पीछे एक शाही मॉनेस्ट्री दर्शनीय है। यहां चम्बा की बैठी हुई मुद्रा में दो मंजिला ऊँची पवित्र प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा के अंगों की बनावट एवं सन्तुलन, चेहरे की सौम्यता तथा आँखों की भावपूर्णता देखने वालों को एक बारगी स्तब्ध और आश्चर्यचकित कर देती है।

लेह मॉनेस्ट्री
महल वाली पहाड़ी की एक चोटी पर स्थित 281 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बनी लेह मॉनेस्ट्री से शहर का सुन्दर नजारा देखने को मिलता है। अनेक गलियारे युक्त इस भवन गोम्पा में अमूल्य चित्रावलियां एवं पाण्डुलिपियां प्रदर्शित की गई हैं। यहां प्रदर्शित चित्र समूचे परिवेश की प्रकृति पर आधारित एवं मोहक हैं। यहां लाम्बा विद्यार्थियों के लिए एक स्कूल का संचालन भी किया जाता है।

लेह मस्जिद
राजा सिंगे नामग्याल ने अपनी माता की स्मृति में 1594 ई. में इस मस्जिद का निर्माण कराया था। मुख्य बाजार में स्थित यह मस्जिद ईरानी और तुर्की वास्तुकला एवं बारिक कारीगरी का अनुपम उदाहरण है।
लेह मेें बना पारिस्थितिक केन्द्र पूर्व मोरोबिन, पूर्व तामकार भवन एवं खांग का आधुनिक सर्वोदशीय मंदिर भी यहां के दर्शनीय स्थल हैं। लेह के लिए दिल्ली, चण्डीगढ़, जम्मू एवं श्रीनगर से इण्डियन एयर लाइन्स की नियमित सेवाएं उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग से लेह श्रीनगर से 434 कि.मी. तथा मनाली से 475 कि.मी. दूरी पर स्थित है। दोनों ही जगह रात्री विश्राम करना होता है। दिल्ली से वाया मनाली, लेह 1030 कि.मी. दूरी पर है, इस यात्रा में 36 घण्टे लगते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन चण्डीगढ़ एवं जम्मू में हैं।