क्यों पड़ते है श्री जगन्नाथ भगवान प्रत्येक वर्ष बीमार…

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(रेणु शर्मा, जयपुर) भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए है और अब 15 दिनों तक आराम करेंगे, 15 दिन तक तक मंदिरों पट भी बंद कर दिए जाते है और उनकी सेवा की जाती है, ताकि वे जल्दी ठीक हो जाएं यह कोई कहानी नहीं हैं यह सच हैं। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को बिमार होते हैं इस दिन से अगले 15 दिनों तक जगन्नाथ भगवान बिमार रहते हैं उस दौरान 15 दिन के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है उनकी रसोई बंद कर दी जाती है, भगवान को 56 भोग नही खिलाया जाता 15 दिनों तक जगन्नाथ भगवान को काढ़ो का भोग लगया जाता हैं। 15 दिन बाद जिस दिन वे पूरी तरह से ठीक होते है उस दिन जगन्नाथ रथ यात्रा होती हैं, जिसके दर्शन हेतु असंख्य भक्त उमड़ते है। इस बार 14 जुलाई को जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होगी।

भगवान जगन्नाथ के बिमार होने का कारण- उड़ीसा प्रान्त में जगन्नाथ पूरी में एक भक्त रहते थे , श्रीमाधव दास जी अकेले रहते थे, कोई संसार से इनका लेना देना नही। अकेले बैठे बैठे भजन किया करते थे, नित्य प्रति श्री जगन्नाथ प्रभु का दर्शन करते थे और उन्ही को अपना सखा मानते थे, प्रभु के साथ खेलते थे, माधव दास जी अपनी मस्ती में मग्न रहते थे। एक बार माधव जी को उलटी-दस्त का रोग हो गया। वह इतने दुर्बल हो गए कि उठ-बैठ नहीं सकते थे, पर जब तक इनसे बना ये अपना कार्य स्वयं करते थे और सेवा किसी से लेते भी नही थे। कोई कहे महाराजजी हम कर दे आपकी सेवा तो कहते नही मेरे तो एक जगन्नाथ ही है वही मेरी रक्षा करेंगे । ऐसी दशा में जब उनका रोग बढ़ गया वो उठने बेठने में भी असमर्थ हो गये , तब श्री जगन्नाथजी स्वयं सेवक बनकर इनके घर पहुचे और माधवदासजी को कहा की हम आपकी सेवा कर दे।

क्यूंकि उनका इतना रोग बढ़ गया था की उन्हें होश भी नही था की कब मल मूत्र त्याग देते थे, उन्के गंदे वस्त्रो को भगवान अपने हाथो से साफ करते थे, उनके पुरे शरीर को साफ करते थे। जब माधवदासजी को होश आया,तब उन्होंने तुरंत पहचान लिया की यह प्रभु ही हैं।

एक दिन श्री माधवदासजी ने पूछा प्रभु आप तो त्रिभुवन के मालिक हो, स्वामी हो, आप मेरी सेवा कर रहे हो आप चाहते तो मेरा ये रोग भी तो दूर कर सकते थे, रोग दूर कर देते तो ये सब करना नही पड़ता। ठाकुरजी ने कहां मुझसे भक्तों का कष्ट नहीं सहा जाता,इसी कारण तुम्हारी सेवा मैंने स्वयं की। जो प्रारब्द्ध होता है उसे तो भोगना ही पड़ता है। अगर उसको काटोगे तो इस जन्म में नही पर उसको भोगने के लिए फिर तुम्हे अगला जन्म लेना पड़ेगा और मै नही चाहता की मेरे भक्त को प्रारब्द्ध के कारण अगला जन्म फिर लेना पड़े, इसलिए मैंने तुम्हारी सेवा की लेकिन अगर फिर भी तुम कह रहे हो तो भक्त की बात भी नही टाल सकता,अब तुम्हारे प्रारब्द्ध में ये 15 दिन का रोग और बचा है, इसलिए 15 दिन का रोग तू मुझे दे दे 15 दिन का वो रोग जगन्नाथ प्रभु ने माधवदास जी से ले लिया।

प्रभु को लगाया जाता है काढ़ो का भोग- इस दौरान भगवान को आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है। जगन्नाथ धाम मंदिर में तो भगवान की बीमारी की जांच करने के लिए हर दिन वैद्य भी आते हैं। काढ़े के अलावा फलों का रस भी दिया जाता है। वहीं रोज शीतल लेप भी लगया जाता है। बीमार के दौरान उन्हें फलों का रस, छेना का भोग लगाया जाता है और रात में सोने से पहले मीठा दूध अर्पित किया जाता है।