कैसे माने मोदीजी आपकी बात कि हमारी सरकारों की योजनाएं न अटकती हैं न भटकती हैं और न लटकती हैं

0
27

रेणु शर्मा (संपादक-गीतांजलि पोस्ट ) जयपुर

शनिवार को जयपुर के अमरूदों के बाग में लाभार्थी जनसंवाद कार्यक्रम में हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने कहां की हमारी सरकारों की योजनाएं न अटकती हैं न भटकती हैं और न लटकती हैं। ये योजनाएं बिना देरी और रूकावट के जन-जन तक पहुंचती हैं। मोदीजी ने सही कहा लेकिन एक बात हम मोदीजी को बताना चाहेगें कि यदी उनकी सारी योजनाएं जनता तक पहुंच रही हैं उनको लाभान्वित कर रही हैं तो फिर वे कौन लोग हैं जो सडकों पर जीवन-यापन कर रहे हैं, मुख्य चौराहों पर भीख मांग रहे हैं, चौराहों एंव सडकों पर टपरी बनाकर परिवार के साथ रह गुजर-बसर कर रहे हैं। मासूम बच्चे अपनी पढने-खेलने की उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझा उठाते हुए बाल मजदूरी कर रहे हैं, तो कही भीख मांग रहे हैं तो कहीं पीढ पर झोला लटकाए कचरे के ढेर में से कचरा निकाल रहे हैं।
आखिर क्या कमी है जिसके कारण ऐसा देखने को मिल रहा हैं। केन्द्र और राज्य सरकार अरबों रूपया खर्च कर जन-विकास के लिये बहुत सारी योजनाए बना रहे हैं और उन्हे कार्यान्वित भी कर रहे हैं लेकिन हमारे देश की विडम्बना है कि सही मायने में योजनाए पूर्ण रूप से जरूरतमन्दों तक नही पहुंच रही हैं। इसका क्या कारण हैं? इसके लिये सरकार जिम्मेदार हैं या प्रशासन जिम्मेदार हैं या जिनके लिये योजनाए बनायी गयी हैं वे जिम्मेदार हैं या योजनाओं में कमी हैं जिसके कारण वह जरूरतमन्दों तक नही पहुंच रही हैं ? यह सवाल कुछ दिनों पूर्व मेने जयपुर में किसी कार्यक्रम में केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल , केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला, महिला और बाल विकास की मंत्री मनन चतुर्वेदी, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी की उपस्थिति में उठाया था जिस पर मेघवालजी ने कहा इस मामले पर गंभीरता से देखगे लेकिन अभी तक हालात वैसे ही हैं जैसे पहले थे।

महिलाओं से संबधित योजनाओं की बात करे तो जरूरतमंदों तक योजनाए नहीं पहुंच रही हैं कही जानकारी का अभाव हैं तो कही साधनों का अभाव हैं । हांलाकि जनता की सुविधा के लिए , जनता तक योजनाओं को पहुंचाने के लिये सारी योजनाए ऑनलाइन हैं जहां से योजनाओं की जानकारी मिल सकती हैं लेकिन अफसोस के साथ बताना पड़ रहा है आज 21वीं सदी में भी हमारे बहुत सारे गांव में इंटरनेट नहीं हैं, कम्प्यूटर नहीं हैं , बिजली भी 7-8 घण्टे के लिये ही आती हैं । ऐसे में हम यह नही कह सकते कि जनता को ऑनलाइन योजनाओं की जानकारी मिलती हैं।

ऐसे में हम मोदीजी की बात कैसे मान सकते हैं कि हमारी सरकारों की योजनाएं न अटकती हैं, न भटकती हैं और न लटकती हैं।
रेणु शर्माआखिर क्या कमी है जिसके कारण ऐसा देखने को मिल रहा हैं। केन्द्र और राज्य सरकार अरबों रूपया खर्च कर जन-विकास के लिये बहुत सारी योजनाए बना रहे हैं और उन्हे कार्यान्वित भी कर रहे हैं लेकिन हमारे देश की विडम्बना है कि सही मायने में योजनाए पूर्ण रूप से जरूरतमन्दों तक नही पहुंच रही हैं। इसका क्या कारण हैं? इसके लिये सरकार जिम्मेदार हैं या प्रशासन जिम्मेदार हैं या जिनके लिये योजनाए बनायी गयी हैं वे जिम्मेदार हैं या योजनाओं में कमी हैं जिसके कारण वह जरूरतमन्दों तक नही पहुंच रही हैं ? यह सवाल कुछ दिनों पूर्व मेने जयपुर में किसी कार्यक्रम में केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल , केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला, महिला और बाल विकास की मंत्री मनन चतुर्वेदी, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी की उपस्थिति में उठाया था जिस पर मेघवालजी ने कहा इस मामले पर गंभीरता से देखगे लेकिन अभी तक हालात वैसे ही हैं जैसे पहले थे।

महिलाओं से संबधित योजनाओं की बात करे तो जरूरतमंदों तक योजनाए नहीं पहुंच रही हैं कही जानकारी का अभाव हैं तो कही साधनों का अभाव हैं । हांलाकि जनता की सुविधा के लिए , जनता तक योजनाओं को पहुंचाने के लिये सारी योजनाए ऑनलाइन हैं जहां से योजनाओं की जानकारी मिल सकती हैं लेकिन अफसोस के साथ बताना पड़ रहा है आज 21वीं सदी में भी हमारे बहुत सारे गांव में इंटरनेट नहीं हैं, कम्प्यूटर नहीं हैं , बिजली भी 7-8 घण्टे के लिये ही आती हैं । ऐसे में हम यह नही कह सकते कि जनता को ऑनलाइन योजनाओं की जानकारी मिलती हैं।

ऐसे में हम मोदीजी की बात कैसे मान सकते हैं कि हमारी सरकारों की योजनाएं न अटकती हैं, न भटकती हैं और न लटकती हैं।