प्राकृतिक सौन्दर्य के उपहार से सजी देव भूमि हिमाचल

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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल – लेखक एवं पत्रकार, कोटा
खूबसूरत प्राकृतिक सौन्दर्य, वनस्पति एवं फूलों से महकती रमणिक घाटियां, अलबेले और अनूठे पहाड़ी स्टेशन, मंदिरों के कारण पहचान बनाने वाली देवताओं की भूमि पर अब आपको ले चलते हैं, हिमाचल प्रदेश की अविस्मरणीय एवं अतुल्यनीय यात्रा पर। बहुसांस्कृतिक, विशाल भौगोलिक विविधता एवं लुभावनी प्राचीन प्रकृति से सम्पन्न इस प्रदेश की कालका-शिमला रेलवे लाइन तथा कुल्लू का ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की विश्व विरासत धरोहर सूची में शामिल किया गया है। यह सौन्दर्यमयी स्थल देवी देवताओं के मंदिर, मठ, चर्च एवं गुरूद्वारे होने से ”देव भूमि“ के नाम से विभूषित किया गया है। जहां माँ दुर्गा के सात अवतारों के पहाड़ी मंदिर हिन्दू धर्म के पवित्र पावन स्थल हैं। प्रदेश में अनेक इतिहासिक किले भी देखने को मिलते हैं। ट्रेकिंग, पर्वातारोहण, स्कीइंग, हाइकिंग, हैली-स्कीइंग और आइस स्केटिंग जैसे सहासिक खेलों के लिए भी यहां वातावरण अनुकूल है। शिमला एशिया का एक मात्र प्राकृतिक आइस स्केटिंग का लोकप्रिय स्थल है। अपनी आकर्षक दृश्यावली के कारण आज यह प्रदेश सेल्यूलाईड के पर्द पर चमक रहा हैं। यहां रोज़्ाा, हीना, वीर-ज़्ाारा तथा जब वी मेट आदि अनेक फिल्मों के दृश्य फिल्माये जा चुके हैं।
हिमाचल की समृद्ध,सांस्कृतिक परम्पराऐं हैं। कुल्लू का दशहरा उत्सव न केवल देश में वरन् विदेशों में भी अपनी विशेष पहचान बनाता है। यहां के नृत्य व संगीत स्थानीय त्यौहारों एवं धार्मिक अवसरों पर देखने को मिलते हैं। शिक्षा की दृष्टि से यहां अनेक विश्वविद्यालय हैं। चित्रकार सोभा सिंह, पेशेवर पहलवान ग्रेट खली, अभिनेता अनुपम खेर, प्रेम चौपड़ा, अभिनेत्री प्रिति जिंटा, कंगना राणावत एवं यामी गौतम, स्वतंत्र फिल्म निर्माता सिद्धार्थ चौहान, भारतीय गायक मोहित चौहान, राज्य के ब्राण्ड एम्बेसेडर प्रीतम सिंह, सेव फल को पहचान देने वाले सत्यनन्द, लेखक-सूफी शिक्षक-)षि, इडरिज शाह, परवीर चक्र प्राप्त मेजर सोमनाथ शर्मा ;पीवीसीद्ध, नायब सूबेदार संजय कुमार ;पीवीसीद्ध तथा एशियायी खेलों और विश्व कप में स्वर्ण पदक विजेता अजय ठाकुर ने इस धरती का गौरव बढ़ाया है।
राज्य में नाभिकीय, जल, सौर्य ऊर्जा, कोयले एवं पेट्रोलियम आदि पर आधारित विद्युत उत्पादन परियोजनाऐं हैं। यहां कि नदियों पर पन बिजलीघरों का ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। कांगड़ा जिले में व्यास नदी पर पौंग बांध परियोजना तथा बिलासपुर जिले में सतलज नदी पर भाखड़ा बांध परियोजना सबसे बड़ी विद्युत उत्पादन परियोजनाऐं हैं। राज्य से अतिरिक्त बिजली अन्य राज्य को उपलब्ध कराई जाती है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को सम्बल मिलता है। खनिज सम्पदा के क्षेत्र में घनी इस प्रदेश में चूना पत्थर, डोलोमाइट युक्त चूना पत्थर, तांबा, चांदी, शीशा, यूरेनियम, लौह अयस्क तथा प्राकृतिक गैस के भण्डार पाये जाते है। प्रदेश में स्लेट की खाने बड़ी मात्रा में पाई जाती है तथा मण्डी में स्लेट से टाइल्स बनाने का बड़ा कारखाना है। हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत ऊनी और पश्मीना, शॉल, कालीन, चांदी और धातु के बर्तन, कशीदाकारी चप्पल, लकड़ी का काम, लकड़ी और धातु के बर्तन बनाने की रूप में देखने को मिलती हैं। पहाड़ी चित्रकला की प्रदेश के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मैटकाफ प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने पुराने महलों में चित्रों की खोज की और आज कांगड़ा शैली के चित्र विश्व में अपनी पहचान बनाते हैं। कांगड़ा के साथ-साथ गोम्पा शैली के चित्र भी बनाये जाते हैं। यहां बनी हस्तशिल्प वस्तुओं को देश एवं देश के बाहर विदेशों में भी भेजा जाता है। हस्तशिल्प राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार बनता हैं।
हिमाचल प्रदेश 1971 में स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह प्रदेश उत्तर में जम्मू और कश्मीर, पश्चिम में पंजाब और चण्डीगढ़, दक्षिण-पश्चिम में हरियाणा, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व की और तिब्बत स्वायत क्षेत्र की सीमाओं से घिरा हुआ है। प्रदेश का सबसे बड़ा शहर शिमला यहां की राजस्थानी है। राज्य का क्षेत्रफल 55673 वर्ग किमी एवं जनसंख्या 688462 हैं। यहां कि साक्षरता दर 82.80 प्रतिशत हैं। राज्य को 3 संभागों एवं 12 जिलों में बांटा गया है। प्रदेश में यमुना, सतलज, व्यास, रावि, चिनाब एवं हिमरूजा प्रमुख नदियां बहती हैं। राज्य में 66.52 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। यहां के वन हिमालय पर्वत माला की श्रंृखलाओं से अच्छादित है जिनमें गहरी हरी-भरी सुनहरी घाटियां, फूलों की महक, तेज बहने वाली नदियां, झरने तथा पिघलते ग्लेसियरों का पानी देखने का अपना ही आनन्द है। यहां 90 प्रतिशत लोगों को कृषि पर रोजगार उपलब्ध है। गेहूँ, मक्का, चावल, जौ, फसलों की खेती, प्रमुख रूप से की जाती है। साथ ही यहां सेव, बहुतायत में उगाये जाते हैं। यहां हिन्दी एवं अंग्रेजी के साथ-साथ पहाड़ी, कुल्वी, मण्डीली, कांगड़ी, किन्नोरी, चाम्बोली आदि स्थानीय भाषाऐं बोली जाती हैं। यहां सभी धर्मों के लोग निवास करते हैं। राज्य में गादी, किन्नर, गुज्जर, पनवाल एवं लाहौसिस प्रमुख जन-जाति के लोग पाये जाते हैं। इनकी अपनी अलग ही संस्कृति है।