रिश्ते कभी भी “कुदरती” मौत नही मरते इनको हमेशा ‘इंसान’ ही कत्ल करता हैं

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गीतांजलि पोस्ट… रिश्ते कभी भी “कुदरती” मौत नही मरते इनका हमेशा ‘इंसान’ ही कत्ल करता हैं ‘नफ़रत’ से‘ नजरअंदाजी’ से तो कभी ‘गलतफ़हमी’ से… हर रोज बिखरते रिश्ते…कृष्ण कुमार वर्मा, मनोहरपुर
कोई टूटे तो उसे सजाना सीखो,
कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो,
रिश्ते तो मिलते है ‘मुक्कदर’ से,
बस उन्हें खूबसूरती से निभाना सीखो।
रोजाना आप भी ज्योहीं अखबार के पन्ने पलटते हैं पाते हैं, अख़बार घरेलू हिंसा की खबरों से पटा रहता है, कहीं पति ने पत्नी का क़त्ल किया, कहीं पत्नी ने पति का, कहीं दोनों परिवार एक दूसरे पर केस डाल दिया, तो कहीं पत्नीं अपने बच्चों समेत ट्रेन से कट गई, कहि अवैध संबंधों के चलते पति या पत्नी की हत्या,
प्रेमिका संग मिलकर प्रेमी ने की हत्या। ज्यादातर मामले पति -पत्नी के संबंधों से जुडे रहते है, चाहे कारण प्रेम-प्रसंग का, दहेज हो या अन्य, टीवी न्यूज चैनल भी इसी तरह की ख़बरें दिखाते हैं।
दोस्तों, जीवन में अकेला रहना नामुमकिन हैं। इसलिए भगवान् ने हमें कुछ रिश्ते हमारे जन्म से पहले ही मिले होते है और कुछ बाद में, लेकिन इन रिश्तों को निभाना ये हमारे हाथ में है।
आजकल समाज में रिश्तों की अहमियत खोती जा रही है सयुक्त परिवार की परंपरा धूमिल हो रही है..रिश्ते सिर्फ मतलब के लिए रह गए है। आजकल बच्चे दादी,नानी की कहानियों से ज्यादा गूगल बाबा में दिलचस्पी दिखाते है उन्हें सबकुछ गूगल से जानना होता है। उन्हें टेक्नोलॉजी के साथ रिश्तों से भी जोड़ना पड़ेगा। दादी-नानी, मामी-मामा, भाई-भाभी, चाचा-चाची और उनके कजिन भाई-बहन भी उनके जीवन के जरुरी रिश्ते है। माता-पिता बच्चों की पहली पाठशाला होते है जो आप उन्हें सिखाएंगे वो ऑब्जर्व करेंगे।
पारिवारिक चर्चा कर बच्चों को खुद के सकारात्मक सोच से अवगत कराये।
कभी भी अपने बच्चों के सामने रिश्तेदारों, व्यक्ति विशेष की बुराई नहीं करे, इससे उनके अंदर नकरात्मक भाव पैदा होंगे। जो उनके भविष्य के लिए घातक होगा। रिश्तें एक दुसरे के प्रति विश्वास को बढाते हैं और विश्वास से आत्म विश्वास बढ़ता हैं और जब किसी को आत्मविश्वास या खुद पर विश्वास हो जाए तो वह कुछ भी कर सकता हैं। जीवन के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता हैं। रिश्तें मनुष्य के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिश्तें हमें त्याग करना सिखाते हैं, प्रेम करना सीखते हैं और एक दुसरे के दुखो में भी शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन रिश्तों में मजबूत विश्वास की डोर धीरे-धीरे टूटती जा रही है..आजकल लोग किसी भी हद तक रिश्तों को शर्मशार करने पर नही हिचकिचाते है।
जब से क़ानून में बेटियो को पिता की सम्पति में अधिकार दिया गया है तब से भाई-बहन के रिश्तो में भी खटास आ रही है | रिश्ता प्रेम से होता है ,ना की परिवार में मतभेद पैदा कर के ,इसलिए लड़कियो को इस ओर ध्यान देना चाहिए रिश्ते जरुरी है..सम्पति नही…। सरकार को बालको के पाठ्यक्रम में रिश्तों की अहमियत को लेकर विशेष पाठ्योजना तैयार करनी चाहिए जिससे बालको में रिश्तों के प्रति रूचि जागृत हो।
जब तक एक-दूसरे में दिखावे से हटकर मजबूत विश्वास और अपनाना होगा तभी रिश्तों की अहमियत खोने से बच पायेगी।
कृष्ण कुमार वर्मा,
मनोहरपुर