जरूरी हैं अविश्वास प्रस्ताव…

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लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका भी महत्तवपूर्ण होती हैं, सरकार में विश्वास नहीं होने पर वह अविश्वास प्रस्ताव द्वारा सरकार को हरा सकता हैं, उसे कमजोर बना सकता हैं। इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिस पर शुक्रवार को लोकसभा में गरमा-गरम बहस हुई, जिसमें विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर विभिन्न आरोप लगाये, उनकी कमियों को उजागर किया तो सत्ता पक्ष ने अपने पर लगे आरोपों का खंडन कर उनका जवाब दिया हांलाकि इस बहस से सदन की गरीमा, संसदीय मर्यादा को भी ठेस पहुंची। अंत में मतदान हुआ जिसमें विपक्ष को 126 और सत्ता पक्ष को 325 मत मिले।

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई बहस ने संसदीय मर्यादा को भी ठेस पहुंचाई हैं, देश के चुने हुए प्रतिनिधि संदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस करने गये थे या वक्त बर्बाद करने गये थे जो वहां ठहाके मार रहे है, आँखे मार रहे हैं, गले लग रहे हैं। अपनी बात कहने के बाद अचानक विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट से उठकर मोदीजी के पास जाकर गले लगे फिर वापस अपनी सीट पर आकर किसी की ओर देखते हुए आंख मारी उनकी इन हरकतों का क्या अर्थ था यह तो राहुल गांधी ही बता सकते हैं लेकिन इसके बाद सदन में जो प्रतिक्रिया हुई वह भी उचित नहीं थी। अविश्वास प्रस्ताव पर चलने वाली बहस राहुल गांधी की इन हरकतों पर चलने लगी, राहुल को चाहने वाले लोग इसे पावरफुल बता रहे है, वहीं उनको नापसंद करने वाले इसे पागलपन बता रहे हैं। यह देख देश की जनता भी हैरान हो गयी, परेशान हो गयी क्योकि पहले ही संसद के हल्ले से लोगों के कान बहरे हो गये अब यह देख कर तो जनता ने अपनी आंखे बंद करने का सोच लिया था।

एक बात गौर करने वाली हैं जिसे सदन में पूर्ण बहुमत प्राप्त हैं उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कोई औचित्य नहीं हैं क्योकि सदन में बहुमत होने से वह आसानी से सदन में अपना बहुमत सिद्व कर सकता हैं, यहां भी वही हुआ लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में हुई बहस से सियासत में चल रही वह सारी बाते खुल कर जनता के सामने आ गयी, जिनसे जनता अनजान थी, क्योकि सदन में दोनो ही पक्ष आमने-सामने थेे जो अकसर राजनितिक पार्टिया विभिन्न सामाजिक और राजनितिक मंच पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगती रहती हैं लेकिन वहां एक समय में एक पक्ष ही होता हैं,  एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष पर लगाये गये आरोप सही हैं या गलत इसके बारे में जनता अनजान रहती हैं और यही कहती थी की यह राजनीति हैं इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं लेकिन अविश्वास प्रस्ताव की बहस में पक्ष-विपक्ष दोनों होते हैं जो उसी समय अपने ऊपर लगाये गये आरोपों का जवाब दे सकते हैं, उनका खंडन कर जनता के सामने सच्चाई ला सकते हैं।  शुक्रवार को सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस में सत्ता पक्ष ने विपक्ष द्वारा लगाये गये आरोपों का खंडन तो किया ही साथ ही जनता में आपनी लोकप्रियता बना कर अपने को ओर मजबूत किया, जिसका परिणाम उसे आने वाले चुनावों में मिल सकता हैं।

रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र

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