रोक लगाना कोई समाधान नही , वैकल्पिक रास्ते तलाशने होंगे…

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एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजीटल इंडिया की बात करते हैं वही दूसरी ओर महज एक कांस्टेबल परीक्षा में नकल रोकने के लिये पुलिस प्रशासन ने 14-15 जुलाई को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक राजस्थान भर में इंटरनेट सेवाओं को बंद रखा। हम मानते हैं कि परीक्षा के  दौरान परिक्षार्थियों द्वारा इंन्टरनेट के द्वारा नकल की जाती हैं लेकिन परिक्षार्थियों द्वारा नकल करना कोई नई बात नही है जब इंन्टरनेट नही था तब भी नकल की जाती थी, नकल के लिये मात्र इंटरनेट को जिम्मेदार कैसे मान सकते हैं ? यह ओर बात हैं कि इंटरनेट के आ जाने से परिक्षार्थियों द्वारा नकल किये जाने के साधनों में बदलाव आया हैं। लेकिन इंटरनेट बन्द करने के बाद परीक्षा में नकल नही हुई होगी इसकी शत प्रतिशत गांरटी क्या कोई ले सकता हैं?

यदी इंटरनेट बन्द करने से ही नकल पर रोक लगती हैं तो सिर्फ कांस्टेबल परीक्षा के लिए ही नहीं बल्कि जितनी भी परिक्षाए होती हैं चाहे वह स्कूल स्तर कि हो या कॉलेज स्तर की हो या कोई प्रतियोगी परीक्षा हो उस दौरान भी इंटरनेट बन्द कर देना चाहिये क्योंकि परीक्षा कोई भी हो सभी महत्तवपूर्ण होती हैं, वह ईमानदारी से होनी चाहिये, मात्र कांस्टेबल परीक्षा के लिए दो दिनों तक इंटरनेट बंद करना बुद्वीमत्ता का काम नहीं हैं यह तो अपनी नाकामी को दर्शाना हैं कि हम परीक्षा में नकल रोकने में असमर्थ हैं इसलिये मात्र इंटरनेट को नकल करवाने का जिम्मेदार मानते हुए राज्यभर में इंटरनेट पर रोक लगवा दो। अब जो प्रशासन नकल रोकने में  असमर्थ हो जाये उससे और क्या अपेक्षा कर सकते हैं यह सोचने का विषय हैं।

आज हम डिजीटल देश में रह रहे हैं जहां घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से अपने रोजमर्या के काम जैसे शोपिंग, पैसों का लेन-देन, पढाई, मंनोरजन, रेल या बस की बुकिंग इत्यादी करते हैं, टैक्सी चालक पर्यटक इंटरनेट के माध्यम से रास्ते तलाशते हुए अपना काम करते रहते हैं, व्यापारी इंटरनेट से अपना व्यापार करते हैं इसके लिये जरूरी नहीं की सभी के पास केबल वाली लाईन से इंटरनेट हो, जिसे जो अच्छा और सस्ता लगता हैं वहीं इंटरनेट काम में लेता हैं। अब राज्यभर में इंटरनेट बन्द के दौरान सामान्यजन को हुए शारीरिक, मानसिक, आर्थिक नुकसान का खामियाजा कौन भुगतेगा सरकार या पुलिस प्रशासन ?

क्योकि इंटरनेट बन्द करने में सरकार की भी मौन स्वीकृति हैं तभी उसने पुलिस प्रशासन को ऐसा करने से मना नहीं किया वहीं दूसरी ओर विपक्ष जो हमेशा सरकार और प्रशासन की गलत नीतियों का विरोध करता आया हैं इस मामले में उसका चुप रहना अचंभित करता हैं।

हम मानते हैं कि परीक्षा में परिक्षार्थियों द्वारा की जाने वाली नकल को रोकने के हर संभव उपाय किये जाने चाहिए जैसे परीक्षार्थियों की तलाशी लेना, नोट्स, पुस्तक, मोबाईल या ब्लूटूथ जैसा उपकरण ले जाने पर रोक लगाना इत्यादी लेकिन तलाशी के बहाने परीक्षा केन्द्रों पर परिक्षार्थियों को सरेआम बेइज्जत करना क्या सही हैं जैसा परीक्षा से पूर्व महिला अभ्यर्थियों के दुप्ट्टे, मंगलसूत्र, पायल,टॉप्स और बालियां उतरवाना वहीं जिन महिला एंव पुरुष अभ्यर्थियों के शर्ट और कुरते के लम्बी आस्तीन थी उसे कैंची से काट देना।

एक बात ओर गौर करने वाली हैं जब परीक्षार्थियों की पूरी तलाशी लेकर परीक्षा केन्द्र में बैठाया गया तो फिर नकल कैसे की जा सकती थी जिसे रोकने के लिये राजस्थान भर में नेट बंदी की गई। यदी किसी पर पांबदी या बैन लगाना से ही किसी काम को रोका जा सकता हैं तो सरकार को जहर या नींद की गोली पर भी पाबंदी लगानी चाहिये जिससे कोई आत्महत्या ना कर सके क्योकिं जिस प्रकार इंटरनेट को परीक्षा में नकल करने का जिम्मेदार मानते हुए इंटरनेट की सेवाओंं को बन्द कर दिया तो जहर या नींद की गोली खाकर तो लोग आत्म हत्या कर लेते हैं।

किसी चीज पर रोक लगाना या बैन करना किसी समस्या का समाधान नहीं हैं, उसके लिये दूसरे वैकल्पिक रास्ते तलाश करने चाहिये, सख्ती करनी चाहिये, डर बैठाना चाहिये, परीक्षा केन्द्रों पर पॉवर फुल जैमर लगाने चाहिये इत्यादी जिससे नकल नहीं हो सके।

रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र

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