महिला अपराध के बढ़ते मामलों पर काबू पाना है जरूरी!

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हम सभी जानते है कि हमारा देश भारत पूरे विश्व में अपनी अलग रीति रिवाज़ तथा संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। भारत में प्राचीन काल से ही यह परंपरा रही है की यहां महिलाओं को समाज में विशिष्ट आदर एवं सम्मान दिया जाता है। भारत वह देश है जहां महिलाओं की सुरक्षा और इज्ज़त का खास ख्याल रखा जाता है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है। अगर हम 21वीं सदी की बात करें तो महिलाएं हर कार्यक्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला काम कर रही है चाहे वो राजनीति, बैंक, विद्यालय, खेल, पुलिस, रक्षा क्षेत्र, खुद का कारोबार हो या आसमान में उड़ने की अभिलाषा हो।

हम यह तो नहीं कह सकते की हमारे देश में महिला सुरक्षा को लेकर कोई मुद्दा नहीं है लेकिन हम कुछ सकारात्मक बिंदुओं को अनदेखा भी नहीं कर सकते। अगर हम अपने इतिहास पर नज़र डाले तो हम देखते हैं कि उस ज़माने में पांचाली प्रथा होती थी जिसके तहत एक महिला (द्रौपदी) को पांच पुरुषों (पांडव) से विवाह करने की अनुमति दी गई थी। ये तो वो तथ्य है जो हम सब जानते है लेकिन अगर पर्दे के पीछे की बात की जाए तो दफ्तरों, घरों, सड़कों आदि पर महिलाओं पर किये गए अत्याचारों से अनजान हैं। पिछले कुछ समय में ही महिलाओं पर तेज़ाब फेंकना, बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसी वारदातों में एकाएक वृद्धि आई है। इन घटनाओं को देखने के बाद तो लगता है की महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है।

पिछले कुछ सालों में दिल्ली के अंदर महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ने सारी हदें पर कर दी हैं। अगर आंकड़ों पर भरोसा किया जाए इससे यही पता चलता है कि अमूमन हर तीन में से दो महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं। यही मुख्य कारण है जिस वजह से पुलिस महिलाओं में अपना विश्वास खोती जा रही है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के करवाये गए सर्वेक्षण में यह पाया गया कि औसतन 100 में से 80 महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

यह जरुरी नहीं कि महिला उत्पीड़न सिर्फ देर शाम या रात्रि में ही हो बल्कि घर पर किसी परिजन के द्वारा या दफ्तर में साथ काम करने वाले सहभागी द्वारा भी ऐसे चकित करने वाले मामले उजागर हुए हैं। एक गैर सरकारी संस्था की ओर से किए गए सर्वे में यह पाया गया कि इन बढ़ते अपराधों के पीछे मुख्य कारण था काम करने वाली जगह में आपसी सहयोग की कमी, ना के बराबर पुलिस सेवा, खुलेआम शराब का सेवन, नशे की लत एवं शौचालयों की कमी।

अब अगर महिलाओं की बात की जाए तो उनकी संख्या का एक बड़ा हिस्सा इस तर्क पर ना के बराबर विश्वास करता है कि पुलिस इन बढ़ते हुए अपराधों पर लगाम लगा पाएगी। इसलिए इस तरफ अब ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे महिला अपराध के बढ़ते मामलों पर काबू पाया जा सके और महिलाएं भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर देश को विकसित एवं समृद्ध बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें।

रेणु शर्मा

(लेखिका गीतांजलि पोस्ट की प्रधान सम्पादक हैं)