वाणी का महत्व …

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वाणी पल में अपनो को पराया और परायों को अपना कर दे। यही बात राजकपूर ने अपनी फिल्म में एक गाने के माध्यम से कही है ।
इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल , जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल…
राजकपूर की फ़िल्म धरम करम का यह सुंदर गाना जो इंसान के बोले गए बोल , इंसान के शब्दों के बारे में बताता है कि किसी के द्वारा बोले गए शब्द , उसकी वाणी इस ब्रह्मांड में घूमती रहती है और अपना प्रभाव छोड़ती रहती है ।
यह भी शाश्वत सत्य है की जिसने जन्म लिया है एक दिन वह मरेगा। इंसान मर जाता है लेकिन उसके द्वारा बोली गयी वाणी, शब्द हमेशा के लिये दुनिया के पटल पर अंकित हो जाते हैं ।

अपनी बात, अपने विचारों को दूसरों तक पहुचने के लिए हम वाणी का प्रयोग करते हैं , लिख कर अपनी बात बताते है जिसके लिए शब्दों का प्रयोग करते हैं । अक़्सर हम जाने अनजाने में अपने परिवार , अपने दोस्तों , अपने सहकर्मी , पड़ोसी इत्यादि को ऐसा कुछ कह जाते है जिसके कारण बहुत कुछ बदल जाता हैं। यह इंसान की बोली ही है जिसके कारण रिश्ते बन जाते है तो कभी रिश्तों में दरार आ जाती हैं। इंसान की बोली ही उसे आबाद या बर्बाद कर देती है ।

कहते है तलवार के घाव भर जाते है लेकिन वाणी, शब्दों के घाव नही भरते , यह शब्द ही होते हैं जो हमारे व्यक्तिव , हमारे संस्कार के बारे में बताते हैं क्योंकि इंसान जिस वातावरण में रहता है उसका असर उस को प्रभावित किए बिना नही रहता यही वजह है कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाने से पहले स्कूल के बारे में जानकारी लेने लगे है ।

सही कहा गया हैं की बोलने से पहले सोचना चाहिए कि हमारे द्वारा बोले गए शब्दों का उसे सुनने वाले पर क्या असर हो सकता है क्योंकि जुबान से बोला गया शब्द और धनुष से निकला हुआ बाण कभी वापस नही आ सकते । एक शब्द मन को दुखी कर जाता है तो दूसरा शब्द मन में खुशी भर जाता है। एक शब्द दवा की तरह काम करता है तो दूसरा शब्द जलन पैदा कर देता है बोलने को तो सभी कुछ ना कुछ बोलते है लेकिन सोच-विचार कर बोलने वाले बहुत कम होते है ।

शब्द बहुत ही शक्तिशाली होते है , शब्द के समान कोई धन नही होता यदि कोई बोलना जनता हो तो । जिसने अपने शब्दों, अपनी जुबान पर काबू कर लिया उसने संसार को जीत लिया।क्योंकि शब्द एक क्रिया की तरह काम करते हैं आपने जो भी बोला हैं उसका प्रभाव जरूर पड़ता हैं यह प्रभाव कैसा होगा यह आपके द्वारा बोले गए शब्दों पर निर्भर करता हैं ।

कबीर का दोहा-

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय |

औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय ||

यानि मान और अहंकार का त्याग करके ऐसी वाणी में बात करनी चाहिए कि औरों के साथ-साथ स्वयं को भी खुशी मिले अर्थात मीठी वाणी से ही दिल जीते जाते हैं ।

(रेणु शर्मा, संपादक गीतांजलि पोस्ट)