सच्चा जननायक कौन …

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गीतांजलि पोस्ट…(रेणु शर्मा, जयपुर)

किसी पर हुकूमत कोई भी कर सकता है लेकिन दिलों पर हुकूमत करना आसान नही होता । आजादी के बाद देश के साथ-साथ राजस्थान में भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था शुरू हुई , जनता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करने लगी । राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बात करें तो अब तक राजस्थान में 14 व्यक्ति मुख्यमंत्री बन चुके है जिनको राजस्थान की जनता ने खुद चुना था लेकिन जनता द्वारा चुने जाने के बाद कितने मुख्यमंत्री जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे है इस संबंध में विभिन्न न्यूज़ चेंनल , समाचार-पत्र अपने अनुसार अलग-अलग राय बताते हैं या हो सकता हैं किसी पार्टी विशेष के बारे में बताए।

राजस्थान के मुख्यमंत्रियों का इतिहास देखे तो अभी तक चार बार लगातार सबसे ज्यादा समय 13 नवम्बर 1954 से 9 जुलाई 1967 तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले मोहनलाल सुखाड़िया थे इसके कार्यकाल में पहली बार 13 मार्च 67 से 26 अप्रैल 67 यानी करीब 44 दिनों तक राष्ट्रपति शासन रहा फिर भी सबसे ज्यादा समय तक जनता के दिलों पर राज किया इसी कारण जनता ने हमेशा उन्ही को मुख्यमंत्री के लिए चुना।

हर देव जोशी, भेरो सिंह शेखावत को भी जनता ने एक बार नही बल्कि तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बनवाया इसका कारण भी यही था कि वह मात्र मुख्यमंत्री पद पर नही नही बल्कि जनता के साथ जमीनी स्तर से जुड़े हुए रह कर जनता की हर संभव सहायता करते रहे यह जनता का लगाव ही था कि जनता भेरोसिंह शेखावत को प्यार से बाबोसा कहती थी और उनको अपनी परेशानियां बताती थी क्योंकि उन्हें विश्वास था कि उनके बाबोसा उनकी समस्या का समाधान जरूर करेंगे। लेकिन आज हालात यह है कि हर तबके के लोग अपनी मांगे मनवाने के लिए भूख हड़ताल, कार्य का बहिस्कार हड़ताल , राजस्थान बंद का सहारा ले रहे हैं फिर भी उनकी सुनवाई नही हो रही।

10वीं विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान में नई परम्परा आ गयी कि एक बार बीजेपी तो दूसरी बार कांग्रेस की सरकार बनती आ रही हैं । 10वीं विधानसभा में बीजेपी ने चुनाव जीत कर तीसरी बार भेरो सिंह शेखावत को मुख्यमंत्री बनाया इसके बाद 11वीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई और अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया, 12वीं विधानसभा चुनाव में वापस बीजेपी आयी और वसुंधरा राजे सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाया , 13वीं विधानसभा चुनाव में फ़िर कांग्रेस आयी जिसने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया 14वीं विधानसभा चुनाव में वापस बीजेपी आयी एवं वसुंधरा राजे सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाया ।

10वीं विधानसभा चुनाव के बाद की राजनीति को देखकर ऐसा लगने लगा जैसे राजस्थान में जनता के पास कोई और विकल्प नही है और वह मजबूरन अपना मुख्यमंत्री बदल रही है क्योंकि यदि राजे या गहलोत में से कोई जनता में लोकप्रिय मुख्यमंत्री होता तो राजस्थान की जनता दूसरी बार भी उसे ही मुख्यमंत्री के लिए चुनती लेकिन ऐसा नही हुआ।

अब तो राजस्थान के चुनावी क्षेत्र में परम्परा बन गयी है कि एक बार कांग्रेस तो दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनने लगी है। राजस्थान की जनता भी क्या करे उसके पास कोई और विकल्प ही नही होता । वेसे तो शिवचंद्र माथुर, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी दो-दो बार निर्वाचित होकर मुख्यमंत्री का कार्यभाल सम्भाल लेकिन मोहन लाल सुखाड़िया और भेरोसिंह के जैसे नहीं जनता के दिलों पर राज नही किया बल्कि उन्होंने प्रदेश की राजनीति पर राज किया है ।

लोकप्रियता के आधार पर मुख्यमंत्री के बारे में जानने के लिए हमने राजस्थान के विभिन्न तबके के लोगो के अलावा हमने फेसबुक पर खुली चर्चा की ओर पूछा कि राजस्थान के इतिहास में अब तक मुख्यमंत्री रहे उनमें से सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री कोन रहा ? इसके जवाब में 46% ने अशोक गहलोत, 15% भेरोसिंह शेखावत, 11% वसुंधरा राजे को लोकप्रिय मुख्यमंत्री बताया। जिसे आप निम्न लिंक पर देख सकते हैं।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1874473639326893&id=100002928267048

फेसबुक पर आए कॉमेंट्स के अनुसार जनता के लोकप्रिय मुख्यमंत्री में हरदेव जोशी, मोहन लाल सुखाड़िया, भेरोसिंह शेखावत , अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे रहे है लेकिन राजस्थान की जनता के अनुसार सबसे ज्यादा लोकप्रिय , लोगो के दिलों पर राज करने वाले मुख्यमंत्री भेरोसिंह शेखावत रहे जिनके पास कोई भी व्यक्ति सहायता के लिए किसी भी समय गया उन्होंने उसे निराश नही किया साथ ही प्रदेश के विकाश के लिए हमेशा आगे रहे ,शेखावत के बाद प्रदेश की जनता के दिलों पर राज करने वाले कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रहे जो जनता की उम्मीदों पर कुछ खरा उतरे उसके बाद नाम आता है वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ।

देखा जाए तो सत्ता की चाहत सभी राजनीतिज्ञों को होती है लेकिन सत्ता मिल जाने के बाद कुछ राजनेता तो चुनाव से पहले किये गए अपने वायदों को पूरा करते है तो कुछ सत्ता के घमंड सब कुछ भूल कर सिर्फ अपना स्वार्थ साधने में लग जाते है , जिसका खमियाजा उन्हें आगामी चुनावों में भुगतना पड़ता हैं यही राजस्थान में हुआ है ।

शैलेन्द्र अवस्थी(कवि व राजनीतिज्ञ)जयपुर

समाजवादी पार्टी के नेता शैलेंद्र अवस्थी कहते है कि जननायक वह होता है जिसे जनता मन से नायक समझती है , ऐसे नायक के लिये सत्ता और उसके किसी पद की जरुरत नहीं होती । यदि सच में देखा जाय तो आज जननायक ढूढने से भी नहीं मिल पाते , सत्ता , पद व प्रचार से कोई जननायक नहीं हो सकता । आज की स्थिति में जन प्रतिनिधि का तमगा लगे हुये लोग तो बहुत है पर जननायक कहा जा सके मुझे तो ऐसा कोई नजर नहीं आता । आज जन नायक की बहुत आवश्यकता है और आज के युवाओं में से ही कोई न कोई जननायक जरुर निकलेगा । मुझे तो ऐसे नायक का बेसब्री से इंतजार है ।