अमृतसर रेल हादसा जिम्मेदार कौन … ?

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गीतांजलि पोस्ट (रेणु शर्मा)
प्रशासनिक लापरवाही का नमूना अमृतसर हादसा… रावण दहन के दौरान पंजाब के अमृतसर में होने वाले ट्रेन हादसे के बारे में सोचते हुए भी रूह कांप जाती है कि कैसे सज-धज कर तैयार होकर परिवार के साथ तो कोई दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के लिए , तो कोई बच्चों को घुमाने के लिए तो कोई मनोरंजन के लिए जिस रावण दहन के आयेजन में शामिल होने के लिए जा रहे है उन्होंने यह नही सोचा था कि जिस रावण का दहन देखने जा रहे हैं वही रावण उनकी मौत का कारण बनने वाला है।

रेलवे ट्रेक के पास रावण दहन के दौरान किसी को कैसे मालूम चल सकता हैं कि ट्रेन आ रही हैं क्योंकि रावण दहन में होने वाली आतिशबाजी, पटाखों की आवाज़ इतनी ज्यादा होती हैं कि रेल की आवाज़ सुन पाना मुश्किल होता हैं साथ ही आयोजन स्थल की रोशनी के सामने दूर से आती हुई रेल की रोशनी भी दिखाई नहीं देती।

रेलवे ट्रेक पर आयोजन होने के दौरान अचानक ट्रेन के आने की सूचना मिलने पर भी भगदड़ मच जाती हैं और समझ नही आता क्या करे ? किधर जाए ? ऐसा ही अमृतसर में हुआ होगा ? लेकिन इसके लिए जिम्मेदार जनता नहीं हैं बल्कि यह आयोजन करवाने वाले हैं जिन्होंने रावण दहन के लिए रेलवे ट्रेक के पास की जगह का चयन किया । इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार हैं जिसने इस जगह आयोजन करवाने की इजाज़त दी । इसके लिए रेलवे विभाग जिम्मेदार हैं जिसे यह मालूम था कि इस ट्रेक के पास सालों से रावण दहन होता आ रहा हैं फिर भी उसने उस समय ट्रेन को उस ट्रेक से निकलने की इजाज़त दी।

इतना बड़ा हादसा हो गया सैकड़ो बेकसूर लोंगो की मौत हो गयी उसके बाद सरकार मुआवजा देने की घोषणा कर रही हैं और दुर्घटना होने के कारणों की जांच करने को कह रही हैं ,पीड़ितों को संवेदना दे रही है आख़िर उससे क्या होगा ? क्या उससे उन परिवारों को उनके परिजन मिल जाएंगे जो इस दुर्घटना के शिकार हुए इस दुर्घटना का वीडियो देखने से लगता है इसमें करीब 200 से ज्यादा हादसे का शिकार हो सकते है ।

सैकड़ो सवाल छोड़ गया अमृतसर ट्रेन हादसा –

रेलवे ट्रेक के पास स्थानीय प्रशासन ने रावण दहन की इजाजत कैसे दे दी ? जब यह मालूम था कि रावण दहन के दौरान होने वाले आयोजन में हज़ारों की सख्यां में लोग जाते हैं ऐसे में प्रशासन द्वारा भीड़ को समायोजित करने के लिए पुख्ता बंदोबस्त क्यों नही किया गया ? जब रेलवे विभाग को मालूम था कि इस ट्रेक के पास सालों से रावण दहन होता आ रहा है तो रेलवे को रावण दहन के आयोजन के दौरान ट्रेन को रुकवाना चाहिए था या ट्रेन का रास्ता बदल देना चाहिए था।

इस हादसे के कुछ देर बाद ही राजनीति शुरू हो गई जिम्मेदार लोग अपनी-अपनी सफाई देने में लग गया तो कोई आरोप लगाने में लग गया।

खेर यह समय किसी को हादसे का जिम्मेदार ठहराने का नहीं हैं बल्कि हादसे में घायल हुए घायलों की सहायता करने का है जो अभी भी घटना-स्थल पर सहायता की राह देख रहे है और उन परिवार वालों को दिलासा दिलाने का हैं जिन्होंने इस हादसे में अपने परिजनों को खो दिया ।


© रेणु शर्मा संपादक गीतांजलि पोस्ट
प्रदेश कार्यकरणी सदस्या जार
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