विधान सभा चुनाव 2018- सत्ता का सेमीफाइनल, किसको मिलेगा ताज

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गीतांजलि पोस्ट … अशोक लोढा (वरिष्ठ पत्रकार) नसीराबाद

पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के परिणाम को जानने की बेसब्री न केवल राजनीतिक दलो को है, बल्कि आम जनता में भी है । राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में वोटिंग का दौर खत्म हो चूका है और वहां के उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीनों में कैद है । इस चुनाव में 3 हिन्दी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर है । लोकसभा चुनाव 2019 से पूर्व लगातार राज्य दर राज्य हार का मुंह देख रही कांग्रेस के लिए जीत का स्वाद चखने का समय है, वहीं दूसरी और भाजपा अपनी जीत को अजेय बनाये रखना चाहती है । इन पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में जीत के लिए राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी ने दिन रात एक कर पूरी ताकत झोंकी और अपनी-अपनी पार्टियों के पक्ष में वोट जुटाने के लिए पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 32 एवं राहुल गांधी ने 77 जनसभाओं को संबोधित किया ।

हमने इन विधान सभा चुनावो पर तीनो हिन्दी भाषी राज्यों के कई वरिष्ठ पत्रकारों से चुनावो के दौरान लगातार बातचीत जारी रखी और मतदाताओं का रूझान जानने की कोशिश की । तीनो हिन्दी राज्यों से वरिष्ठ पत्रकार सुबोध खंडेलवाल, मुकेश मिश्रा, अभिमनोज, प्रकाश त्रिवेदी, रजनी खैतान, प्रीतिश सरकार, अरविन्द तिवारी, मज़हर हुसैन बन्दूकवाला, नीरज श्रीवास्तव, शिव अनुराग पटेरिया, दीपक कांकेर रायसेन एवं वेदप्रकाश शर्मा विदिशा, दिल्ली से पंकज शुक्ला, श्वेता आर रश्मि, विपिन गुप्ता, विपिन हरित, छत्तीसगढ़ से पीयूष मिश्रा, रूपेश गुप्ता, कमल शर्मा, प्रफुल्ल पारे, प्रियंका कौशल एंव रजत बाजपेयी जगदलपुर राजस्थान से वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप लोढ़ा, हेमन्त साहु, नीलिमा शर्मा, रेणु शर्मा, तेजवानी गिरधर, सुमित कलसी एवं उनके सहयोगी अधिकांश पत्रकारों का मानना है कि तीनों हिन्दी भाषी प्रदेश राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बदलाव की बयार चले तो चकित करने वाली कोई बात नहीं होगी । क्योंकि तीनो ही राज्यों में वर्तमान सरकारों के खिलाफ आम जनता में गुस्सा नजर आ रहा हैं । तीनो राज्यों में हमने जिन वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत की उनमे से करीबन सभी पत्रकारों का मानना हैं इस बार इन तीनो राज्यों में से राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिलने के पुरे पुरे आसार हैं ।

इस बारे में मतदाताओं से बातचीत में भाजपा से लोगों का मोह भंग होने का प्रमुख कारण किसानो द्वारा आत्महत्या एवं कांग्रेस द्वारा कर्ज माफी का वायदा, युवाओ को रोजगार नहीं मिलना, महिला सुरक्षा के मामले, पैट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस के कीमतों में बढ़ती दरे, केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून को लेकर स्वर्ण समाज की नाराजगी, नोटबंदी, जीएसटी को लेकर सरकार की नीतियों पर किसान और छोटे व मझौले कारोबारी का सबसे ज्यादा परेशान होना आदि कारण हावी रहे हैं ।

चुनावो के दौरान कई व्यापारियों से बातचीत करने पर हमें बताया कि नोटबंदी ने हमारी कमर ही तोड़कर रख दी है । इस दौरान नोटबंदी, जीएसटी को लेकर सरकार की नीतियों पर भी व्यापारियों की नाराजगी साफ़ नजर आई । सबसे बड़ी बात इन चुनावों में यह देखने को मिली है कि जिस तरहा से सोनिया गांधी ने मोदी को मौत का सौदागर बता अपनी पार्टी को गर्त में डाल दिया था अब वहीं काम भाजपा राहुल गांधी की बात बात में हंसी उड़ा कर अपनी ही पार्टी का नुकसान कर रही है । भाजपा द्वारा राहुल गांधी को बार बार निशाना बनाने से राहुल गांधी राजनीति में मजबूती से परिपक्त हो रहे है ।

पहली बार इस चुनावों में मीडिया से लोगो का भरोसा टुटा हैं। आम जन हमेशा से ही मीडिया पर विश्वास करता आया हैं । आम-जन को पूरा भरोसा है कि मीडिया किसी पक्ष से नहीं जुड़ेगा एवं सच्चाई से हर बात को उजागर करता रहेगा । लेकिन इस बार कई फैक खबर सोशियल मीडिया, न्यूज़ पेपर एवं चेनलो में दिखाई गई । जिससे मीडिया एवं सोशल मीडिया की खूब किरकिरी हुई ।

राजस्थान विधान सभा चुनावो के दौरान पूर्व क्रिकेटर और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू चुनावी सभा करने अलवर आये । नवजोत सिंह सिद्धू की चुनावी सभा में किसी ने नारा लगाया ”पाकिस्तान मुर्दाबाद” । लेकिन एक चैनल पर बताया गया ”पाकिस्तान जिंदाबाद” । बबाल होना ही था । सबके निशाने पर नवजोत सिंह सिद्धू को आना ही था। लेकिन जैसे ही सिद्धू ने असलियत बता कर मानहानि के मुकदमे की धमकी दी, चेंनल द्वारा तुरंत सुधार किया गया। इसी तरह की एक मनगढ़ंत खबर सट्टा बाजार के सर्वे की आई। पूरी तरह फेक, सच्चाई से कोसो दूर । लेकिन उस पर मोनोग्राम बीबीसी का लगा दिया गया । ऐसी एक नहीं, कई खबरे चली जिनका कोई हाथ पैर नहीं था । आम इंसान इस तरह की खबरों पर विश्वास कर लेता हैं । परन्तु जब तक असलियत सामने आती है, खबर हजारो लोगो के दिमाग में जगह बना लेता है । जब सच्चाई सामने आई तो सोशल मीडिया के साथ मीडिया की भी जबरदस्त किरकिरी हुई एवं मीडिया को इधर उधर बगले झाकना पड़ा । अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ अविश्वसनीय हो जायेगा । अब भी समय है मीडिया कर्मियों एवं सोशियल मीडिया को इस तरह की खबरों से बचकर अपनी विश्वसनीयता कायम रखनी चाहिये ।

अशोक लोढ़ा