जैविक खेती की ओर लौटें किसान  सब्जियों को जहरीली होने से बचाये

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गीतांजलिपोस्ट…

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल,कोटा

पंजाब नेशनल बैंक के कृषक प्रशिक्षण केन्द्र झालरापाटन में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत पतंजलि बायो रिसर्च इंस्टिट्यूट हरिद्वार द्वारा पतंजलि कृषक समृद्धि कार्यक्रम के तहत भारतीय कृषि कौशल परिषद् एवं राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद् के संयुक्त तत्वाधान में जैविक खेती के अंतर्गत कोटा, बारां, झालावाड़, नागौर आदि जिलों के किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देकर जैविक किसान संगठन तैयार करना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में शनिवार को सहायक निदेशक सूचना एवं जनसम्पर्क हेमन्त सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि अन्नदाता कृषक को प्राणिमात्र के कल्याण के लिए रासायनिक खेती से जैव खेती की ओर पुनः लौटना होगा। कई वर्षों से निरन्तर रासायनिक खाद, पैस्टीसाइड्स के इस्तेमाल से मिट्टी में जहरीले केमिकल मिल गए हैं। मिट्टी में पैदा होने वाले अन्न, फल एवं सब्जियां भी दूषित एवं जहरीले होने के कारण प्राणिमात्र के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गए हैं। पंजाब, हरियाणा में निरन्तर रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से कैंसर एवं अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियां हो गई हैं। जैविक खाद केचुआ खाद, गोबर खाद, कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल कर किसान अन्नदाता की सार्थकता को बनाए रख सकता है। जैविक ज्ञान से ही देश स्वस्थ एवं खुशहाल बन सकता है। मिट्टी के स्वास्थ्य के ज्ञान के बगैर हम उचित मात्रा में खाद का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।

पीएनबी एफसीटी निदेशक संजय शर्मा ने कहा कि किसान बगैर सोचे समझे अपने खेतों की पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग कर रहा है। जिससे उसके खेत की मिट्टी जहरीले रसायनों से युक्त होने के कारण उसमें उगने वाले अन्न, फल एवं सब्जियां भी जहरीले रसायनों से युक्त होती हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस दौरान पंतजलि बायो रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा तैयार मृदा स्वास्थ्य प्रशिक्षण किट का भी प्रदर्शन पंतजलि के राज्य समन्वयक जुझार सिंह नागर द्वारा किया गया। जिसके द्वारा एमपीके व पीएच लेवल की जांच के लिए प्रयोगशाला में जाने के बजाए खेत पर ही जाकर जांच की जा सकेगी।