गैंगरेप में पुलिस की जांच संदेह के घेरे में !

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गीतांजलिपोस्ट…( रेणु शर्मा)

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में अजमेर रोड़ स्थित स्टारडम रिसॉर्ट्स में 18 नवंबर को हुए सामुहिक बलात्कार ( गैंगरेप ) के मामले में पीड़िता द्वारा दर्ज एफ आई आर पर 46 दिनों बाद भी पुलिस कोई ठोस कारवाही नही कर पायी।

गौरतलब है कि 18 नवंबर को पीड़िता  ने भांकरोटा थाने में 376 D का मुकदमा दर्ज करवाया था , पीड़िता के 164 के बयान हो चुके हैं ।

पीड़िता ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए बताया कि घटना में शामिल नामजद आरोपित सचिन गुप्ता, निखिल गुप्ता, पंकज चटवानी को गिरफ्तार नही किया गया, पुलिस द्वारा उनके बचाव के प्रयास किये जा रहे है और जिससे मुकदमे की जांच ढीली चल रही हैं। आरोपित सचिन गुप्ता, निखिल गुप्ता, पंकज चटवानी बहुत बार पुलिस के सम्पर्क में आ चुके है उसके बाद भी पुलिस उनको गिरफ्तार करने में आनाकानी कर रही है।

पीड़िता के वकील डॉ सुनील शर्मा ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपितों को खुले छोड़ने से वे घटना से सम्बंधित सबूत मिटाने ओर मामले में सेटिंगबाजी करने में लगे है, पीड़िता को खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे है। पीड़िता को साथ लेकर उन्होंने पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग को मामला बताया तब गर्ग ने 40 दिन से इस घटना की जांच कर रहे अधिकारी dysp रामवतार सोनी से जांच बदलवा कर ACP रतन सिंह को दिलाई गई हैं लेकिन अभी तक इस मामले में कारवाही लंबित ही हैं।

पीड़िता द्वारा पुलिस की करवाही को लेकर लगाए गए आरोप जो पुलिस की जांच को शक के घेरे में लाते हैं…

– बलात्कार पीड़िता के रिसोर्ट से निकालते ही तीनो आरोपी भी रिसोर्ट से फरार हो गए।

– पुलिस के आने से पहले आरोपितों के इशारे पर उस कमरे की सफाई हो गयी थी जिसमे बलात्कार हुआ था।

 – घटना स्थल से बरामद बेडशीट, कंडोम, नेपकिन और अन्य कपड़ों को fsl में जांच के लिए भेजा गया इस घटना को आज 46 दिन हो गए लेकिन आज तक केस की जांच रिपोर्ट नही आई।

– पुलिस द्वारा पीड़िता का मेडिकल घटना के करीब 30 घंटे बाद करवाया गया था। मेडिकल रिपोटर्स आने के बावजूद आरोपियों को गिरफ्तार नही किया गया।

– पीड़िता द्वारा दर्ज करवाई गई FIR सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी। जिस मोबाइल से FIR वायरल की गई उसके नंबर पुलिस को देने के बाद भी कोई कारवाही नही की गई।

 – पीड़िता के न्यायालय में 164 के बयान में आरोपितों के नाम स्पष्ट देने के बावजूद भी आरोपितों को गिरफ्तार नही किया गया।

– जिस टेबलेट से पीड़िता को उसके साथ दुष्कर्म होते हुए दिखाया गया वह टेबलेट मौका ए वारदात पर जब्त नही हुआ था साथ ही पीड़िता से टेबलेट की पहचान करवाये बिना ही उसे एफ एस एल की जांच के लिए भिजवा दिया गया।

– आरोपितों से पुलिस के मिलने पर भी पुलिस ने उनको गिरफ्तार नहीं किया।

पीड़िता के बयान अकेले में ना लेकर समूह में खुले में लिए गए

पुलिस पर आरोप लगाते हुए पीड़िता ने बताया कि उसके बयान महिला पुलिसकर्मी ने जांच अधिकारी राम अवतार सोनी सहित अन्य कई लोगों के बीच में लिए थे।

उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार धारा 376 D के बयान महिला पुलिस कर्मी द्वारा बंद कमरे में लिए जाते हैं साथ ही पीड़िता की पहचान गुप्त रखी जाती हैं।

पीड़िता को दी जान से मारने की धमकी

पीड़िता ने बताया कि इस घटना के बाद उसका भविष्य खराब हो चुका हैं क्योंकि आरोपितों द्वारा उनके द्वारा दर्ज करवाई गई FIR को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया हैं जिसके कारण पीड़िता को उसके परिजनों और समाज के लोगों के कटाक्षों का सामना करना पड़ रहा हैं साथ ही आरोपित उसे मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बना रहे है उसे पैसों का लालच दे रहे है कि किसी प्रकार वह मुकदमा वापस कर ले साथ ही पीड़िता को यह कहते हुए धमकियां दे रहे है कि यदि वह मुकदमा वापस नहीं लेगी तो उसे मरवा देंगे क्योंकि मर्डर के केस में जमानत मिल जाती हैं लेकिन बलात्कार के केस में जमानत मिलना मुश्किल हैं। जिसकी शिकायत पुलिस को लिखित में करने के बावजूद पुलिस ने आज दिन तक आरोपितों के खिलाफ कोई ठोस कायर्वाही नही की गयी ना ही उसे पुलिस द्वारा कोई सुरक्षा उपलब्ध नही करवाई गई है जबकि उसको जान का खतरा है।

पुलिस कमीश्नर आनन्द श्रीवास्तव ने बताया कि वह इस मामले को खुद अपने स्तर पर देखेगे और पीड़िता को न्याय दिलवाएंगे।