दिल जीत ही लेंगे

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हुस्न उनका देख
खुश हो गया हूँ
जुल्फ बिखरी देख
उनमें खो गया हूँ
काश ! दिल का रास्ता
मिल जाता वहीं
तो ठहर उम्र भर
रह जाते वहीं
बक्त ने किस कदर
हैं ढाये सितम
ठिठक गये यह सोच
वहीं मेरे कदम ।।
उसने दी चुनौती
दिल जीतने की
दिल जीत लेंगे
भले करने पड़े
कितने जतन ।
शैलेन्द्र अवस्थी “शिल्पी”