अब क्या औचित्य हैं चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाने का

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गीतांजलि पोस्ट(रेणु शर्मा) प्रदेश स्तर पर चाइनीज माँजे की बिक्री को लेकर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस सीआईडी (अपराध शाखा) भगवान लाल सोनी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को जिला मजिस्ट्रेट से समन्वय स्थापित करते हुये उनके जिलों में धातु मिश्रित चायनीज मांझे के क्रय-विक्रय, भंडारण एवं उपयोग पर रोक लगाने के लिये धारा 144 के तहत निषेधात्मक आदेश जारी करने के निर्देश दिये हैं जो सही हैं ऐसा होना भी चाहिए लेकिन मकर सक्रांति से मात्र 5 दिन पहले चाइनीज मांझे की बिक्री पर करवाही करने के आदेश देने का ओचित्य नही नहीं लग रहा क्योंकि जैसा कि सब जानते है की हमारे यहां मकर सक्रांति पर क़रीब 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक पतंगबाजी चलती रहती हैं ऐसे में जिसे चायनीज मांझा बेचना होता हैं उसने चायनीज मांझे का भण्डार मकर सक्रांति से एक से डेढ़ माह पहले ही कर लिया हैं साथ ही अधिकतर पतंगबाजी करने वाले भी अपनी पतंगबाजी के लिये पतंग और मांझा लेकर आ चुके हैं ।

अब जिन्होंने चायनीज मांझे का भंडार कर लिया वह कैसे भी इसकी बिक्री करेंगे और जिन्होंने खरीद लिया वह चायनीज मांझे का प्रयोग करेंगे। पुलिस प्रशासन कितने लोगों को चाइनीज़ मांझे का प्रयोग करने से रोकेगी और किस प्रकार रोकेगी यह समझ से बाहर हैं। यदि प्रशासन को इस कानून को अमल में लाना ही था तो इस आदेश को मकर सक्रांति के एक से डेढ़ माह पहले जारी किया जाना था जिससे इसका सही रूप में क्रियान्वयन हो पाता।