“मैं जन्मा माँ तेरी गोद से”

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मैं जन्मा माँ तेरी गोद से
तुझमें ही समा जाऊंगा
मेरी प्रीत तुझसे ही है माँ
यह गीत मैं हर पल गाता चला जाऊंगा
जो मिले समन आगंतुकों का मुझे
माँ, मैं इस भय से निवृत तुझे कराऊंगा।।

क्षति में ना समाए मेरा युग
इस पर मैं ध्यान लगाऊंगा।
खड़ा रहूंगा मैं हर क्षण, अपने तिरंगे की शान में
चाहता हूं मैं माँ तुम्हे, अपने दिलों-जान से
ना रह पाऊंगा मैं, बिन तेरे प्रदान के
देना तुम साथ मेरा हर पल
इसी में मैं जी लूंगा अखिन जीवन।।

ना कोख तेरी कभी सुनी रहेगी
हर बार अपने वतन की ही जीत होगी
अगर मेरी आँखें नम भी हो जाएगी
अनेकों कलाईयां अपने वतन के परचम
इस धरा पर लहरायेगी।।

गर्व है माँ मुझे तेरे होने पर
ना सहने देंगे तुझे कभी कोई भी सितम
आओ करे नमन, अपनी धरती माँ को
मिलकर दिखा दे इस पूरे जहान को
है शिद्धत हमारे दिलों में
और बाजुओं में दम हैं
ना किसी से कम थे
और ना किसी से कम हैं।।

“जय हिंद”

लेखिका, हर्षिता शर्मा