साहित्य से बचेगा समाज व संस्कृति – आशावादी

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गीतांजलि पोस्ट…….    लूनकरनसर:- आज के अर्थकेन्द्रित युग में संवेदना का सागर सूखता जा रहा है, साहित्य ही समाज में भाव व विचार की सत्ता को बचा सकता है। ये उद्गार साहित्य अकादमी के राजस्थानी परामर्श मंडल के संयोजक व वरिष्ठ कवि-कहानीकार मधु आचार्य “आशावादी” ने व्यक्त किए। आशावादी रविवार को समीपवर्ती कालू कस्बे के जगदम्बा यात्री घर में नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान समारोह में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मायड़ राजस्थानी भाषा के संरक्षण से राजस्थानी संस्कृति बच पाएगी। समारोह में नैनवां, बूंदी के कवि जयसिंह आशावत को उनके उपन्यास ‘अब पाती कांई लिखा’ पर नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जोधपुर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर व वरिष्ठ कवि विजयसिंह नाहटा ने कहा कि नानूराम संस्कर्ता ने आधुनिक कहानी की शुरुआत करने का यशस्वी कार्य किया। वे सही अर्थों में राजस्थानी के पुरोधा थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि आलोचक डॉ. नीरज दइया ने कहा कि संस्कर्ता जी के अवदान पर गहन शोध व समुचित मूल्यांकन की जरूरत है। वरिष्ठ बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने संस्कर्ता जी के साहित्यिक अवदान को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरक बताया। कवि जय सिंह आशावत ने नानूराम संस्कर्ता के नाम पर सम्मान को गौरव का विषय बताया।  डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने संस्कर्ता के व्यक्तित्व व कृतित्व पर पत्रवाचन किया। युवा कवि राजूराम बिजारणियां ने कवि आशावत के काव्य सरोकार पर टिप्पणी करते हुए कवि परिचय प्रस्तुत किया। इससे पूर्व बाल साहित्यकार रामजीलाल घोड़ेला ने आगंतुकों का स्वागत किया। सम्मान के तहत कवि जयसिंह आशावत को श्रीफल, शॉल, साहित्य, प्रतीक चिह्न, सम्मान पत्र व पत्रम पुष्पम से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हनुमानगढ़ की युवा बाल साहित्यकार मानसी शर्मा के बाल कहानी संग्रह “च्युइंग गम” का मंचासीन अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में कालू उपसरपंच हजारी महाराज, शिवराज संस्कर्ता आदि ने विचार प्रकट किए। युवा कवि राजूराम बिजारणियां ने मंच संयोजन करते हुए कळायण से दोहों का सस्वर वाचन किया। तीर्थराज संस्कर्ता ने आभार जताया।

काव्य गोष्ठी में बही काव्य सरिता

कार्यक्रम में कवि गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें विजयसिंह नाहटा, डॉ. नीरज दइया, दीनदयाल शर्मा, जगदीश नाथ भादू, राजूराम बिजारणिया, रामजीलाल घोड़ेला, कमल किशोर पिंपलवा, मदन गोपाल लढ़ा, गोविंद शर्मा ने कविता पाठ किया।

ये रहे उपस्थित
शिक्षाविद मोटाराम चौधरी, रामकुमार सारस्वत, दुर्गाराम पड़िहार, मनोज कुमार, दुष्यंत जोशी, सुशील संस्कर्ता, प्रकाशदान चारण, कैलाश शर्मा,जगदीश प्रसाद सोनी, जंवरीमल बोथरा, सुरेश डूढाणी, पेमाराम डोगीवाल, सुभाष डूढाणी, बाबूलाल लेघा, जगदीश प्रसाद सोनी, संतदास स्वामी, शिवलाल राघानी आदि।