मोदी के नेतृत्व में भारत उदय

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गीतांजलि पोस्ट … ( चन्द्रपाल प्रजापति नोएडा )

14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमला एक घिनौनी एवं कायरतापूर्ण घटना थी जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान में सक्रिय (समर्थित कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी) आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद ने ली थी। पाकिस्तान एक दुष्ट देश है, वो वही भाषा समझेगा जो वो जानता है, वो भाषा मारकाट की है। 2 सालों में, 2 सर्जिकल स्ट्राइक ने जो कर दिखाया वो इमरान खान या आसिफ गफूर का चेहरा पढ़ कर जान सकते हैं।
आतंकवाद को लेकर उसके बाद उसका समर्थन भारतवासियों द्वारा, से भारत के नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सभी जगह सिर्फ बदला,पड़ोसी देश को सबक सिखाने और आतंकियों को जड़ से ख़त्म होने की चर्चा। पान ठेलों पर रक्षा विशेषज्ञ अचानक उग आए हैं। फेसबुक, ट्विटर और वाट्सएप आदि सोशल मीडिया पर अचानक युद्ध की मांग उठी है। ललकार,हूंकार,तलवार सब एक साथ खिंच गए हैं इस मैदान में। लोगों को आज प्रतिशोध चाहिए। बस मोदी टैंक लेके घुसे, और सब पाकिस्तानियों को ख़त्म कर दें। वो चाहते हैं, रातोंरात भारत इजराइल मोड में आ जाये। परन्तु उनको इस बात की जानकारी नहीं है कि इजराइल जैसी सरकार तो आ गयी, इजराइल जैसी देशभक्त जनता कहाँ से लाओगे,यहाँ तो गद्दारो की भी अपनी ही एक फ़ौज है।
परन्तु भारत को इजराइल बनने में समय लगेगा क्योंकि इजराइल में कोई जेएनयू नहीं है जहां इजराइल के युवा ‘इजराइल, तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगा सकें। क्योंकि इजराइल जब ऑपेरशन म्यूनिख करता है तो वहां का विपक्ष सबूत मांग कर देश व सेना को अपमानित नहीं करता। क्योंकि वहां ना तो आतंकवादियों के लिए रात दो बजे कोर्ट खुलते हैं और ना ही वहां के पत्रकार आतंकियों की लिए मानवाधिकार का रोना रोते हैं l इजराइल में कोई जाट, गुर्जर, मराठा इत्यादि जाति के लोग इजराइल की पब्लिक प्रोपर्टी को नहीं जलाते हैं। वहां देश सर्वोपरि होता है, जाति या धर्म नहीं। क्योंकि वहां के नेता, सेनाध्यक्ष को कुत्ता, गुंडा नहीं कहते। टैक्सपेयर्स के पैसों पे पढ़ने वाले शेला रशीद या कन्हैया कुमार जैसे जोंक नहीं है वहाँ जो आर्मी को रेपिस्ट बताते फिरे। क्योंकि वहां के अभिनेता अपनी धरती पर जहां वो पैदा हुए हैं, जहां वो सफल हुए हैं, उस पर शर्मिंदा नहीं होते। असहिष्णुता का नाटक नहीं करते। क्योंकि वहां लोग नेतन्याहू या उसकी पार्टी का विरोध करते करते इजराइल विरोधी नहीं होते हैं।
परन्तु अब, “भारत का ही खा कर भारत पर ही फुफकार रहे नागो के फनो” को कुचलने के लिए मोदी सरकार द्वारा कमर कस ली गयी है। फिलहाल ये कहना गलत नहीं होगा कि देश के अन्दर छिपे गद्दारों पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू हो चुकी है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पहली बार मुस्लिम बहुल देशों के संगठन ‘ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (ओआईसी) की बैठक में बतौर ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ शामिल हुई थीं। यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक विजय है जब पाकिस्तान भारत को संगठन से बाहर रखने का दबाव बना रहा हो। देश हित में जनता जब एकजुट होती है तो रिजल्ट निकलता है जो विश्व में देश की ताकत का एहसास कराता है और तभी एक सम्प्रभु भारत का निर्माण होता है।

चन्द्रपाल प्रजापति, नोएडा I