ज़ंग में कभी इश्क खोज कर तो देखिये

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ज़ंग में कभी इश्क
खोज कर तो देखिये
अदावत मोहब्बत में
बदल कर तो देखिए
एक बार उसमें दिल
खोल कर भी देखिये ।

ज़न्नत का लुफ्त
मिल जाएगा यहीं
दुश्मनी को ज़मीदोज़
यहीं करके तो देखिये
वाह वाह हो जायगी
आपकी हर तरफ
इस हुनर को कभी
आज़मा कर तो देखिये ।

दूसरा पहलू

मोहब्बत ज़ंग
समझ कर न कीजिये
दिल तोड जीत का
कभी ख्वाब न देखिए
शर्मिंदा खुद को ही
कर पायैगे आप
शिल्पी की बात मानिए
इसे आज़मा के न देखिए ।
✍© *शैलेन्द्र अवस्थी ‘शिल्पी’*