लोकतंत्र का रखों मान तो करो जमकर मतदान

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गीतांजलि पोस्ट…जयपुर के शैलेन्द्र अवस्थी ‘शिल्पी’ , राजनीतिज्ञ, कवि और लेखक हैं ।

सुनो भाई सब देकर ध्यान
अब जल्दी ही है मतदान
छोड-छाड कर सारे काम
पहले करना है मतदान ।

देना वोट डंके की चोट
खुल जायै हर झूँठ-लँगोट
कर देना उन सबको नंगा
जिनको भाता है बस दंगा ।

जोड-तोड साजिश में माहिर
बन जाते दंगौ में *माहिर*
भाई – चारा बच पायेगा
जब इनको बदला जायेगा

आज गये जो इसमें चूक
बचा रह गया इनका भूत
सिर चढ नाचेगा हर दूत
लगा लगा मानव भभूत ।

दबे टैटूआ कवि-लेखक का
ऐसी बंदिश लगवायेगा
अभिव्यक्ति पर रोक लगे
यह पहला आर्डर लायेगा ।

लोकतंत्र की रक्षा वाले
सब संस्थान मिटायेगा
लगा मुखौटा लोकतंत्र का
हिटलर-शाही लायेगा ।

संविधान की रक्षा करने
सिर पर लेना कफन बाँध
लोकतंत्र का रक्खो मान
तो कर दो जमकर मतदान ।
©✍ *शैलेन्द्र अवस्थी ‘शिल्पी’*