लाचार हुआ प्रशासन , न्याय के लिए भटकते पीड़ित

0
30

शर्म से सिर झुक जाता, खून खोलने लगता हैं, जब ऐसे अपराधों के बारे ख़बर बनाते हैं या इस पर कोई लेख लिखते हैं या इस प्रकार के विषय पर डिबेट करवाते हैं। समझ नहीं आता आख़िर ऐसा क्या कारण हैं जिसके कारण अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो जाते हैं कि क्राइम करने से पहले उन्हें समाज, कानून किसी का भी डर नहीं होता यही नहीं साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ प्रशासन भी कार्यवाही करने से पहले सोचता हैं।

ऐसा ही एक मामला अलवर जिले के थानागनजी में हुआ जानकारी के अनुसार “थानागनजी के दंपति मोटरसाइकिल पर कही जा रहे थे रास्ते में 20-25 साल के पांच युवक 2 मोटरसाइकिल पर आकर उनका रास्ता रोकते हैं और उनको डराकर रेत के टीलों के पीछे  सुनसान जगह पर रोकते हैं और पति-पत्नी दोनों को निवस्त्र कर बंधक बनाते हैं और पति के सामने ही बारी-बारी से पांचो युवक महिला के साथ बलात्कार करते हैं साथ ही इस दरिंदगी का वीडियो बनाते हैं, पति-पत्नि चिल्लाते रहते हैं लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता, इसके  बाद उन्हें इसी हालत में छोड़ कर चले जाते हैं”।

इतना ही नहीं वारदात को अंजाम देने के बाद उक्त घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं साथ ही पीड़ित के घर जाकर उनको ब्लैकमेल करते हैं कि वो उनका विडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे ऐसी धमकी देकर पीड़ित से पैसा ऐंठते हैं।

26 अप्रैल को हुई वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता के पति को फोन पर वारदात का वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए पैसे मांगे जिसके बाद वह 30 अप्रैल को एसपी के पास गए , एसपी ने उनके परिवाद पर मार्क करके SHO के पास जाने को बोला। 2 मई को पीड़ित को FIR की कॉपी दी गयी , अफ़सोस 4 मई तक पुलिस की कोई कारवाही नहीं हुई वही दूसरी और आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने दम्पति के अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया उसके बाद भी 6 मई तक पुलिस की ओर से कोई कारवाही नहीं हुई ।
जब 7 मई को मीडिया में मामला आ गया तब पुलिस को होश आया, हालांकि 7 से 9 मई की अवधि में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन पुलिस द्वारा की गई कारवाही की तब तक बहुत देर हो चुकी थी पीड़ित परिवार की आबरू तार-तार हो चुकी थी क्योंकि आरोपितों ने दुष्कर्म का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।
गौरतलब हैं अलवर के ही थानागनजी थाने इलाके में दलित नाबालिग से हुए गैंग रेप में पुलिस ने आरोपित को थाने ले जाकर छोड़ दिया और पीड़िता को तीन माह से कहा जा रहा था की जांच चल रही हैं, इसी थाने का एक ओर मामला 27 अप्रैल को हुआ जब भृतहरि के दर्शन करने गई युवती  का अपहरण कर गैंग रेप कर डाला जिसकी रिपोर्ट 4 मई को दर्ज की गई।

यह थानागनजी का मामला नहीं हैं जिसमे कार्यवाही करने में पुलिस द्वारा लापरवाही बरती गई राजस्थान के बहुत सारे थानों के यही हाल हैं। अलवर गैंग रेप जैसा दूसरा मामला राजस्थान के बाड़मेर से आया जिसमे एक दलित महिला से घर मे दुष्कर्म के 18 दिन होने के बाद भी पुलिस ने पीड़िता के बयान नहीं लिए और ना ही पीड़िता का मेडिकल करवाया, इसी प्रकार गुड़ामालानी में एएनएम से दुष्कर्म का 29 अप्रैल को दुष्कर्म का प्रयास किया गया पीड़िता ने को 30 अप्रैल को रिपोर्ट लिखवा दी 164 के बयान ले लिए लेकिन 9 दिन तक भी पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर पायी। इसी प्रकार जोधपुर के तिंवरी मे एक युवती को पत्थरो से पीट पीट कर मार डाला और युवती की माँ पर बोलेरो चढ़ा कर मार डाला बाद में अपराधी ख़ुद नहर में कूद गया। सीकर जिले के उदयपुरवाटी में मात्र एक माह में 9 दुष्कर्म की वारदात हो चुकी हैं। भरतपुर के बयान में पानी पीने के बहाने घर मे घुसे दो सगे भाइयों ने घर मे दिव्यांग को अकेली देख जंगल मे ले गए और रेप कर डाला, चित्तौड़ में पांच साल की बालिका घर के पास की दुकान पर माचिस लाने गई जहा से उसे कोई व्यक्ति बहला कर ले गया और दुष्कर्म कर डाला, नागौर के मकराना में फ्री में गैस कनेक्सन दिलवाने के बहाने दो युवक एक महिला को ले गए और नशीला पेय पिलाकर सामुहिक दुष्कर्म कर डाला इस प्रकार किसी विशेष जगह नही बल्कि पूरे राजस्थान में महिला, बालिका की इज्ज़त तार-तार हो रही हैं।

इसके अलावा आजकल दुल्हनों का अपहरण करने का नया अपराध सामने आ रहा हैं सबसे पहले राजस्थान के सीकर में उसके बाद उदयपुर, जोधपुर में दुल्हन अपहरण किया गया और दो दिन पूर्व अलवर में शादी समारोह में युवती का अपहरण कर लिया।

ऐसे ना जाने कितने अपराध हो रहे हैं जिनसे हमारी मा, बेटी, बहन का जीना हराम हो गया हैं वही दूसरी और महिला और बालिका सुरक्षा का दभ भरने वाले कानून अपराधियों ओर हमारी लाचार प्रशासनिक कार्यप्रणाली के सामने बेबस होते दिख रहे हैं।

अपराध के बाद होने वाली वारदातों पर राजनीति की जाती हैं पीड़ितों को राहत दिलवाना तो दूर की बात हैं बार बार पीड़िता से घटना के बारे में सवाल करके उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा हैं साथ ही अपने को सच्चा नेता बनाने के लिए पीड़ित और पीड़ित परिवार के साथ फोटोज़ क्लिक करके उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर किया जाता हैं।

जहा पीड़ित और दुःखी होता हैं वही अपराध करने वाले अपने द्वारा किये गए अपराध को अंजाम देने की खुशी में पार्टियां मनाते हैं क्योंकि अपराधी जानते हैं कि उनकी ऊंची पहुँच और पैसों के कारण कोई उनका कुछ नहीं कर सकता।

सवाल यह हैं कि क्या हमारी व्यवस्था इतनी लाचार हो गयी हैं कि पीड़ित न्याय के लिए भटकता रहता हैं और आरोपियों द्वारा अपराध को इस प्रकार के करने की खुशी में पार्टी की जाती हैं पीड़ित घर मे कैद होने को मजबूर हो जाते हैं और अपराधी बेखौफ घूमते हैं।

ऐसी घटनाओं पर राजनीति खेली जाती हैं एक पार्टी दूसरी पार्टी पर आरोप लगाती हैं कि इस पार्टी के समय मे ऐसे अपराध ज्यादा होते हैं जबकि ऐसा नहीं हैं सरकार चाहे बीजेपी की रही हो या कांग्रेस की रही हो अपराध तो इसी प्रकार होते आये हैं, इन सबका कारण हमारा लचीला कानून की है, समाजिक संस्कार हैं क्योंकि इंसान को जैसी शिक्षा मिलती हैं वह वैसा ही करता हैं। अपराध करने वाला भी जनता हैं कि कानून की गिरफ्त में आ गए तब वह जेल चले जाएंगे लेकिन कुछ ही समय बाद वह जमानत पर बाहर आ जायेंगे मुकदमा चलता रहेगा जैसा कि सब जानते हैं हमारे यहां की न्याय प्रणाली के बारे में की न्याय का इंतजार करते करते उसका जवानी से बुढापा आ जाता हैं कभी तो पीड़ित मर भी जाता हैं उसके बाद उसे न्याय मिलता हैं ऐसे में क्या फायदा हैं न्याय का।

राजस्थान को जरूरत हैं जनता को सामाजिक संस्कार देेंेेनेनेकी , न्याय व्यवस्था में बदलाव लाने की, पुलिस को जरूरत हैं निष्पक्ष रह कर पीड़ित का समय पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर अपराध करने वाले को सज़ा दिलवाने की, नेताओं को चाहिए कि अपने स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि जनता के हितों के लिए निस्वार्थ काम करे। यदि ऐसा नहीं हो सकता तो मजबूर होकर जनता को ख़ुद कानून हाथ मे लेकर अपराध करने वालो को सज़ा देने के लिए आगे आना होगा और इस प्रकार के अपराध की सज़ा होगी अपराधी को चौराहे पर खड़ा करके जूतों से पिट-पिट कर प्राण लेने की। क्योंकि जनता जनार्दन होती हैं जिद पर आ जाये तो कुछ भी कर सकती हैं।