ऑनलाइन वीडियो गेम और स्मार्टफोन से हो चुकी हैं कई बच्चों की  मौत

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एक समय वह भी था जब बच्चों को घर से बाहर खेलने जाने के लिए मना किया जाता था। दिनभर घर से बाहर रहकर खेलने के लिए उन्हें डांट भी पड़ती थी लेकिन अब समय बदल गया है। अब माता पिता के नौकरीपेशा होने  के कारण भी हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे खेलने के लिए घर से बाहर ही नहीं निकल पाते हैं  हैं। इसलिए बच्चों ने एसका भी तोड़ निकाल लिया जिनमे ऑनलाइन वीडियो गेम और स्मार्टफोन है। इसलिए ही, ऑनलाइन वीडियो गेमिंग का बाजार भी बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है इसी के साथ बढ़ रहें है इस के दुष्परिणाम। इन वीडियो गेम्स मे कुछ तो  बच्चों के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो रहे हैं।…उन्हें हिंसक बना रहे हैं और यहां तक की जान देने के लिए भी उकसा रहे हैं। ब्लू व्हेल जैसे गेम्स की वजह से भी    ऐसे ही एक गेम का असर फिरसे  देखने को मिला जब एक 10वी की छात्रा ने अकेले ही 9 शहर मे घूम रही थी ।… आइये जानते है पूरी घटना…..

बताया जाता है कि 18 दिन पहले पंतनगर थाना क्षेत्र के झा कॉलोनी से एक किशोरी कहीं गायब हो गई थी. किशोरी के अभिभावकों ने उसे ढूंढने का काफी प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिली. खबर है कि किशोरी चलते-चलते जब दिल्ली पहुंची तो एक पुलिस वाले ने उसे रोक लिया. पूछताछ में लड़की ने बताया कि उसने अपने फोन में टैक्सी ड्राइवर-2 गेम डाउनलोड किया था. लड़की ने बताया कि उसे गेम इतना पसंद आया कि वह उसे बीच में छोड़ना नहीं चाहती थी. लड़की के मुताबिक, उसने 18 दिनों तक लगातार एक शहर से दूसरे शहर का चक्कर लगाया. एक शहर में पहुंचकर वह फिर दूसरे शहर के लिए निकल जाती थी घर से निकलने के बाद वह किच्छा से बरेली होते हुए लखनऊ, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, पूना, दिल्ली आदि शहरों में घूमती रही. दिल्ली पुलिस ने बताया कि किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस के अनुसार एक दक्षिण कोरियाई 3डी मोबाइल ड्राइविंग गेम ‘टैक्सी ड्राइवर-2’ खेलने के चलते लड़की ने यह कदम उठाया। गेम में खिलाड़ी एक टैक्सी के पहियों के पीछे निकलते हैं और अपने ग्राहकों के साथ एक बड़े महानगर तक दौड़ लगाते हैं। लड़की इसे अपनी मां के मोबाइल फोन पर खेला करती थी। मोबाइल की लत कितनी खतरनाक हो सकती है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक लड़की गेम खेलते-खेलते नौ शहरों का चक्कर काट आई। वीडियो गेम खेलने वाले स्मार्टफोन सात-आठ हजार रुपये तक में आसानी से मिल रहे हैं। वहीं गूगल प्ले-स्टोर पर मुफ्त मोबाइल गेम भी मिल जाते हैं इसमे सिर्फ बच्चों का ही दोष नहीं माता पिता भी बराबर के दोषी हैं अपनी व्यवस्तता के चलते वो इतना भी वक़्त नहीं निकाल प रहे की आखिर उनका बच्चा असली दुनिया को छोड़कर कब इस वर्चुअल दुनिया मैं घुस गए

विशेषज्ञ बोले- ऐसे बच्चों पर ध्यान दें जो ज्यादातर किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं : माता-पिता को चाहिए कि वह ऐसे बच्चों पर ध्यान दें जो लोगों या परिवार वालों से ज्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं। ऐसे बच्चों को अपनी ही दुनिया की तुलना में वास्तविक दुनिया में मिलने-जुलने का अधिक मौका दिया जाना चाहिए।’