तीज तीवाराँ बावड़ी ले डूबी गणगौर श्रावणी तीज आती है अपने साथ त्योंहारों की शुरुवात लेकर

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योगेश शर्मा जयपुर

 

गोरे कंचन गात पर अंगिया रंग अनार।
लैंगो सोहे लचकतो, लहरियो लफादार।।

तीज तीवाराँ बावड़ी ले डूबी गणगौर ……………… राजस्थान में यह कहावत प्रचलित है, जिसका मतलब है की श्रावणी तीज अपने साथ त्योंहारों की शुरुवात लेकर आती है, तो छै महीने बाद आने वाली गणगौर के साथ यह श्रृंखला पूरी होती है. सारे बड़े त्योंहार तीज के बाद ही आते हैं …….. रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, श्राद्ध-पर्व, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली का पञ्च-दिवसीय महापर्व जैसे सारे बड़े त्योंहार इसी बीच आतें है.

वैसे तो रंगीला राजस्थान हमेशा से ही तीज-त्यौहारों, रंग-बिरंगे परिधानों, मेलों, उत्सवों और अपनी जीवन्तता के लिए प्रसिद्ध रहा है, फिर भी तीज का त्यौहार राजस्थान के लिए एक अलग ही उमंग लेकर आता है, नयी नयी उमीदें लेकर आता है. बरसात का महत्व यूँ तो सभी के लिए है चाहे वह कोई भी देश हो या कोई भी प्राणी. परंतु मरुभूमि के लिए तो पानी अमृत के समान है. ऐसे में जब महीनों से तपती हुई मरुभूमि में रिमझिम करता सावन आता है तो वह निश्चित ही किसी उत्सव से कम नहीं होता. सावन का यह मुद्दा जब पूरे प्रदेश की सुख समृद्धि से जुड़ा हो तब सावन की ऋतु मरू प्रदेश के लिए और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाना स्वाभाविक ही है. सावन की इस बरसात पे ही तो टिकी होती है मरू प्रदेश की हर आस, फिर चाहे बात खेती-बाड़ी की हो या रोजमर्रा की जरूरतों और पीने के पानी की. तभी तो सावन के आगाज़ के साथ ही शुरू होती है विभिन्न देवी देवताओं से अच्छी बरसात और अच्छी फसल की प्रार्थनाएं. तभी तो आसमान से टपकती हर एक बूँद आनंद और मस्ती की हिलोरों से सराबोर कर देती है मरुभूमि के जन सामान्य से लेकर पशु-पक्षी और पेड़-पौधों तक को. तभी तो पूरा सावन ही एक पर्व, एक उत्सव, एक त्यौंहार बन पड़ता है. पानी के रूप में आसमान से बरसता ये अमृत जैसे ही रेत के धोरों को स्पर्श करता है तो गीली मिटटी की सौंधी गंध के साथ साथ रेतीले धोरे पुकार उठते हैं… केसरिया बालम, आवो नी पधारो म्हारे देस.
पहले पंद्रह पंद्रह दिन पहले पेड़ों पर झूले डल जाते थे, पर अब तो कहीं देखने में भी नहीं आते. ना तो वह उमंग बची है ना समय …………… खैर फिर भी एक दिन के लिए ही सही जब स्त्रियाँ लहरिया पहन कर सजतीं है और घर में पकवानों विशेषकर खीर और घेवर का स्वाद लिया जाता है तो सावन मन के अन्दर गहरे तक उतर आता है.