महर्षि दधीचि जयंती पर अनेक प्रतिभाएं हुई सम्मानित,दाधीच समाज डीडवाना के तत्वाधान में हुआ कार्यक्रम

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गीतांजलि पोस्ट…. डीडवाना:- डीडवाना में दाधीच समाज का महर्षि दधीचि जयंती महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। महर्षि दधीचि जयंती पर सुबह दधिमती माता मंदिर से प्रमुख मार्गो से होते हुए प्रभात फेरी पुनः दधिमती माता मंदिर पहुंची इसके बाद राजोपचार द्वारा कुलदेवी मां दधिमती की आरती की गई व महर्षि दधीचि का पूजन किया गया।प्रातः 9 बजे से दधिमती माता मंदिर परिसर में हवन प्रारम्भ हुआ।कोट मोहल्ला स्थित दाधीच भवन में दोपहर 3:00 बजे से रंगोली प्रतियोगिता,म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता,नृत्य प्रतियोगिता,गायन प्रतियोगिता,रंगोली व मेहंदी प्रतियोगिता सहित अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित हुई जिसमें अनेक प्रतियोगियों ने भाग लिया इसके बाद प्रतियोगियों को सम्मानित किया गया साथ ही समाज में प्रतिभावान छात्र छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया इनमें 60% व 60% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया कार्यक्रम का संचालन विजय आसोपा ने किया तत्पश्चात शाम को समाज द्वारा सामूहिक प्रसादी का कार्यक्रम हुआ।कार्यक्रम के दौरान सभी समाज के व्यक्तियों ने भाग लिया।

महर्षि दधीचि ने जग कल्याण हेतु किया था अस्थियों का दान
कहा जाता है कि एक बार इन्द्रलोक पर ‘वृत्रासुर’ नामक राक्षस ने अधिकार कर लिया तथा इन्द्र सहित देवताओं को देवलोक से निकाल दिया। सभी देवता अपनी व्यथा लेकर ब्रह्मा, विष्णु व महेश के पास गए, लेकिन कोई भी उनकी समस्या का निदान न कर सका। बाद में ब्रह्मा जी ने देवताओं को एक उपाय बताया कि पृथ्वी लोक में ‘दधीचि’ नाम के एक महर्षि रहते हैं। यदि वे अपनी अस्थियों का दान कर दें तो उन अस्थियों से एक वज्र बनाया जाये। उस वज्र से वृत्रासुर मारा जा सकता है, क्योंकि वृत्रासुर को किसी भी अस्त्र-शस्त्र से नहीं मारा जा सकता। महर्षि दधीचि की अस्थियों में ही वह ब्रह्म तेज़ है, जिससे वृत्रासुर राक्षस मारा जा सकता है। इसके अतिरिक्त और कोई दूसरा उपाय नहीं है।