कुंभकार के दीपक से दमकती है दीपावली

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गीतांजलि पोस्ट……… (कृष्ण कुमार) मनोहरपुर:- बदलाव की बयार भले ही प्राचीन रीति-रिवाजों को पीछे छोड़ने पर आमादा हो मगर आज भी माटी के एक छोटे से दीपक की लौ के आगे इलेक्ट्रानिक उपकरणों की चकाचौंध के बाजार की चमक फीकी ही है। सभ्यता के उद्धम को विकास की पटरी पर सरपट दौड़ाने वाला कुंभकार का चाक परंपरा की मशाल को प्रज्ज्वलित किए सरपट घूम रहा है। दीपावली की जगमग में परंपरागत मिट्टी के दीयों की माँग बरकरार है। मिट्टी के दीये में दीपक का विश्व में प्रभावशाली महत्व है। मिट्टी का दीया पाच तत्वों से मिलकर बनता है जिसकी तुलना मनुष्य के शरीर से की जाती है। जिन पाच तत्वों से मानव का शरीर निर्मित होता है उन्हीं पाच तत्वों से ही मिट्टी के दिए का निर्माण कुम्हार के हाथों द्वारा होता है। पानी, आग, मिट्टी, हवा तथा आकाश तत्व ही मनुष्य व मिट्टी के दिए में मौजूद होते हैं। इस दीये का दीपक जलाने से ही समस्त अनुष्ठान कर्म आदि होते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर मिट्टी के दीयों का ही अत्यंत महत्व है। वास्तु शास्त्र में इसका महत्व इस बात से है कि यदि घर में अखंड दीपक की व्यवस्था की जाए तो वास्तु दोष समाप्त होता है।

– माता लक्ष्मी के पूजन के लिए खरीदे जाते हैं दीये

दीपावली के अवसर पर धन-धान्य की देवी माता लक्ष्मी के पूजन की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माटी के दीपक में सरसों को तेल डालकर देवी का पूजन किया जाता है। यह दीपक पूरी रात जलाए रखा जाता है ताकि रात्रि में दीये की रोशनी में देवी के आगमन का मार्ग प्रशस्त रहे।

– दिव्यलोक का एहसास कराते हैं कतारबद्ध दीये

इस समय बाजार एक से बढ़कर एक डिजाइनर लाइटों और इलेक्ट्रानिक झालरों से सजा है। हर छोटे-बड़े घरों के बाहर लटकती रंग-बिरंगी लाइटों की झालरें उसकी आभा में चार-चाद लगा रही है। लेकिन दीये के मुकाबले में ये कहीं नहीं ठहरती। दीपों के त्योहार में जब कतारबद्ध जलते दीयों की महफिल सजती है तो दिव्यलोक का एहसास होता है।

इनका कहना है:-

1. मिट्टी का दिया पंच तत्व का प्रतीक है, दीपावली महापर्व पर सभी को मिट्टी के दीपक जलाना चाहिए।

– सम्पूर्णानद शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
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2. दीपावली पर मिट्टी के दीपक को पानी में भिगोकर सुखाने के बाद जो खुश्बू आती है, बहुत ही अच्छी लगती है। घर में दीपक जलाना अच्छा लगता है।

– दीपिका वर्मा, कॉलेज छात्रा,

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3. भले ही बाजार में मिलने वाले आर्टिफिशयल लाइटों एवं उपकरणों से घर जगमग हो जाये, लेकिन मिट्टी से बने दिपक की रौशनी अलग ही होती है।

– महीपाल सिंह गुर्जर, ग्रामीण
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4. दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने के बाद थाली में रखे हुए एवं उनके साथ सेल्फी लेना बहुत अच्छा लगता है।

जान्हवी एवं साहिल नैनावत, विद्यार्थी

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5. मिट्टी के दीपक खरीदने से बनाने वालों का भी उत्शाह बढ़ेगा।

हेमराज बधाला, ग्रामीण