सांभर झील में पक्षियों के मरने की संख्या में इजाफा, 15-20 हजार हो सकते है मृत पक्षी

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गीतांजलि पोस्ट……..(विनय शर्मा) सांभर लेक:- विश्व प्रसिद्ध नमक झील में लगातार देशी व विदेशी पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। पक्षियों के मरने का कारण अभी भी पहेली बना हुआ है। हजारों पक्षी तड़प-तड़प कर दम तोड़ चुके हैं और हजारों की तादाद में पक्षी मरने के कगार पर है। शीतकाल के प्रवास को देश-विदेश से लाखों पक्षी सांभर झील पहुंचते हैं, जिनमें विभिन्न दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी भी पाए जाते हैं

पक्षियों के मरने की सूचना के बाद वन विभाग के अधिकारी झील क्षेत्र से मृत पक्षियों को हटवाने के काम मे लगे रहे। सांभर साल्ट कंपनी के कर्मचारियों की मदद से मृत पक्षियों को झील किनारे गड्ढा खोदकर डिस्पोज किया गया।

सांभर साल्ट के अधिकारी रहे नदारद:
वही सांभर साल्ट के जिम्मेदार अधिकारी इतनी बड़ी घटना के बाद भी मौके से नदारद नजर आए। इतनी बड़ी घटना के बाद भी सांभर साल्ट कंपनी के किसी बड़े अधिकारी ने मौके पर आने की जरूरत नहीं समझी, जबकि सालाना पक्षी प्रेमियों से पर्यटन के रूप में लाखों रुपए साल्ट कंपनी कमा रही है। सांभर साल्ट के रिटायर्ड जीएम डीडी मीणा ने मौके पर कहा मैं कुछ भी बताने में असमर्थ हूं और मैं तो यहां सिर्फ पानी लेकर आया हूँ।

वन विभाग  के अधिकारी लगातार जीवित पक्षियों पर नजर बनाये हुयें है। पशु पालन विभाग के जॉइंट डायरेक्टर उम्मेद सिंह ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। सिंह ने बताया झील के पानी व मृत पक्षियों का सेम्पल एसडीबीसी पालिक्लिनिक लुधियाना व भोपाल जांच हेतु भेजे गये है, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पक्षियों के  मरने का कारण पता चल पायेगा।

जीवित पक्षियों को बचाने के नहीं है कोई इंतजाम:
नमक झील में कई किलोमीटर तक अभी भी फैले हैं पक्षियों के शव व कई पक्षी मरने की कगार पर है। वन विभाग के पास सबसे बड़ा चैलेंज जीवित अधमरे पक्षियों को बचाने का है, परंतु देखने मे आ रहा है कि अपने जीवन के लिए जूझ रहे पक्षियों को बचाने के कोई भी इंतजाम नहीं हैं। पक्षी प्रेमियों में इस घटना को लेकर चिंता बनी हुई है।

WCO एनजीओ के सदस्य जुटे पक्षियों की जान बचाने में:
जहां पक्षियों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है, वहीं WCO एनजीओ के सदस्यों ने पक्षियों की जान बचाने का बीड़ा उठाया हैं। एनजीओ के सदस्य अधमरे पक्षियों को ढूंढकर उनका इलाज करते देखे जा रहे हैं।

कई गुना बढ़ सकती है मृत पक्षियों की तादाद:
घटना के दो दिन बाद भी वन विभाग के अधिकारी मृत पक्षियों की संख्या के बारे में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं, वहीं पक्षी प्रेमियों का कहना है कि मृत पक्षियों की संख्या 10-15 हजार पार कर सकती हैं। पक्षियों के शव पानी के बीच में भी हैं, इसके साथ साथ झील के करीब 10-15 किलोमीटर तक मृत पक्षियों को देखा जा सकता हैं।

 

जनमानस तक पहुंच सकता है खतरा:
सांभर क्षेत्र में इस प्रकार की यह पहली घटना हैं। यदि इन पक्षियों में इस प्रकार के कोई कीटाणु पाए जाते है जो आसपास में फैलते है तो उनका असर मनुष्यों पर भी हो सकता हैं। यदि ऐसा हुआ तो बहुत बड़ी चिंता का विषय हैं।

वन विभाग की चौकी लगाने की उठी मांग:
सांभर झील में इतनी बड़ी संख्या में पक्षी के मरने की झकझोर देने वाली घटना के बाद पक्षी प्रेमियों में काफी रोष देखने को मिल रहा हैं। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि सांभर में लाखों की संख्या में देश विदेश से पक्षी यहां आते है और यहाँ वन विभाग की एक चौकी नही होना भी काफी आश्चर्यचकित करता हैं। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि हमारी सरकार से मांग है कि जितनी जल्दी हो सके यहां एक चौकी खोली जाए।

इस मामले में फुलेरा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विद्याधर चौधरी ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। घायल पक्षियों को तुरंत उपचार की व्यवस्था भी होनी चाहिए। हमारे द्वारा इसके लिए सरकार को चिट्ठी भी लिखी जाएगी।