गंदी राजनीति के साथ दुबे की मौत ने दिया ज्ञानवर्धक संदेश

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विकास दुबे की मौत ने गंदी राजनीति के साथ एक ज्ञानवर्धक संदेश भी दिया है जिसकी हम सबको सख्त जरूरत है अगर हम इसपर अमल कर पाए तो।

कोई भी मनुष्य अपने बाहुबल या राजनीतिक संरक्षण के दम पर कितना भी अकूत धन और संपत्ति जमा करले। लेकिन जब बुरे दिन शुरू हो जाते हैं तो इनमें से कोई भी या फिर सगे संबंधी और नजदीकी रिश्तेदार भी काम नहीं आते तो फिर किसी पर जुल्म कर या किसी गरीब और कमजोर लोगों की आत्मा दुखा कर अनैतिक रूप से जमा किया अकूत धन भी साथ नहीं देता। इतना करने के बाद भी मनुष्य को अपनी चिता पर अकेले ही लेटना पड़ता है.याद रखें चिता पर आलमारी और कफ़न में जेब नहीं होती। तो फिर हम किसलिए गरीबों और कमजोरों पर अन्याय व जुल्म कर उनका हक- अधिकार छीनकर खुश रह सकते हैं। जो भी मनुष्य ईश्वर को पूजता और मानता है वो कभी भी अपने से गरीब और कमजोर लोगों पर अन्याय नहीं करेगा वो इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि ईश्वर गरीबों की पुकार को जरूर सुनता है।

राजनीति का एक ही धर्म है किसी भी तरह से कामयाबी हासिल कर अपने लक्ष्य तक पहुंचना फिर चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। अगर उसके रास्ते में उसके अपने रिश्तेदार भी रोक लगाए तो वह उन्हें भी पीछे धकेल कर आगे बढ़ जाता है, उसे तो सिर्फ किसी भी तरह अपना लक्ष्य प्राप्त करना है इसलिए वह अपने काम में रोक लगाने वाले को रास्ते का पत्थर समझता है।क्यों कि कामयाबी ही उसका धर्म है। इसीलिए वह ईश्वर को नहीं मानता है. वो अकूत धन और कामयाबी को ही ईश्वर समझता है। यही उसका धर्म और ईश्वर है। कटु सत्य। हर मनुष्य को चाहिए कि वे अपने से कमजोर ईश्वर की प्रजा के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करे और खुद भी प्रेम के साथ जिए दूसरों को भी प्रेम के साथ जीने दे।

सूफी ताहीर अली शाह

लेखक – सूफी ताहिर अली शाह (लल्लू बाबा) नक्शबंदी अबुल उलाई. मानव मित्र. जयपुर।