अब मीडिया को राजनीति के बजाय यूथ पर फ़ोकस होना चाहिए

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गीतांजलि पोस्ट… जयपुर जैसा विदित है पिछले काफ़ी समय से लगभग-लगभग सभी मीडिया हाउस अपनी खबरों में राजनीति को सबसे ज़्यादा समय दे रहे हैं या यूँ कहें अधिकांश टीवी चैनल पर सिर्फ़ राजनीतिक चर्चा हो रही है जो देश के करोड़ों युवा व न्यू जेनरेशन के लिए ठीक नहीं है।हाल यूथ को रोज़गार चाहिए ,भारत के यूथ को मोटिवेशन चाहिए ,यूथ को कैरीअर को लेकर मार्गदर्शन चाहिए पर जिसप्रकार से समस्त मीडिया का अधिकांश समय सकारात्मक पहल की बजाय व्यर्थ की बहस में ज़ाया हो रहा है।इसका दुष्परिणाम यह है को अधिकांश लोगों ने टीवी देखना बंद कर दिया है,मेरे जैसा व्यक्ति भी पिछले 1 वर्ष से टीवी से दूरी बना चुका है ।

आज कोरोना काल में जव स्कूल, कॉलेज , विश्वविद्यालय सभी बंद है , शिक्षा -दीक्षा सब बुरी तरह प्रभावित है ।ऑनलाइन क्लास से छोटे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है ऐसे वक्त में मीडिया एक देशव्यापी पहल करते हुए शिक्षा के आयाम को गति व दिशा दे सकता है ।इसके लिए सामाजिक सरोकार व देश के बेहतर भविष्य के लिए राजनीतिक चर्चा का समय कम करते हुए यूथ पर ध्यान दे और टीवी के माध्यम से एजुकेशन पर कम से कम प्रतिदिन 6 घंटे समय दे जबतक कोरोना आपदा से देश को राहत नहीं मिल जाती या यूँ कहें *2020* के अंत तक टीवी को देश के करोड़ों बच्चों के लिए केंद्रित हो जाना चाहिए ।क्योंकि मेरा मानना है आज का यूथ ही देश का भविष्य है सो ज़ाहिर सी बात है समस्त राजनीतिक दलों , समस्त मीडिया हाउस , समस्त लोकतांत्रिक स्तंभों को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए और मीडिया को लेकर एक व्यापक मार्गदर्शन विशेषकर अगले 6 माह के लिए अवश्य जारी करना चाहिए ।

मेरा व मेरे जैसे विचार रखने वाले लोगों की भी यही सोच है कि समस्त मीडिया के लिए ये समय अपनी छवि को सुधारने का भी है क्योंकि प्रायः देखा जा रहा है की देश की जनता द्वारा मीडिया को अब गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है । लोगों के मन में ये बात बैठ गयी है की जो कुछ भी हम देख या सुन रहे हैं सब कुछ पैड है और ख़रीदा जा चुका है और एक ख़ास अजेंडा के तहत चीजें परोसी जा रही हैं । एक IPS अधिकारी होने के नाते जैसे मुझे यह कहने में गुरेज़ नहीं है की पुलिस की छवि देश में बेहतर नहीं है इसमें आमूलचूल परिवर्तन व व्यापक बदलाव की ज़रूरत है ठीक इसी प्रकार अब मीडिया को पब्लिक के लिए विशेषकर यूथ के लिए फ़ोकस होना चाहिए और यूथ को अपने कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी और आकर्षित करना चाहिए ।

लेखक- पंकज चौधरी (आईपीएस )

पंकज चौधरी (आई.पी.एस)