कोरोना महामारी के समय गर्भवती महिलाओं के लिए आयोजित की गयी ऑनलाइन गर्भसंस्कार वर्कशॉप

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निःशुल्क वैज्ञानिक गर्भसंस्कार ऑनलाइन वर्कशॉप में 1500 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया

गीतांजलि पोस्ट… (रेणु शर्मा) अहमदाबाद । विश्व अभिभावक दिवस के भाग के रूप में, अहमदाबाद में तथास्तु संस्था द्वारा दो दिवसीय नि: शुल्क वैज्ञानिक गर्भसंस्कार प्रवृत्ति की ऑनलाइन वर्कशॉप का आयोजन 7/8 जुलाई को किया गया था।

गौरतलब हैं वेदों में मानव के लिए सोलह संस्कार जरूरी बताये गए हैं जिसमे गर्भ-संस्कार सबसे पहला संस्कार होता है जो बच्चे के जन्म से पूर्व गर्भ में ही होता था लेकिन पाश्चात्य सभ्यता के चलते हमने अपने संस्कारो को ही भुला दिया जिसका असर आज की सन्तति पर दिखाई दे रहा हैं।  वर्तमान समय में वेदों की हर बात को विज्ञान से तुलना करके ही समाज अपना रहा है ऐसे में तथास्तु संस्था द्वारा लोगोंं को अपनी संंस्कृति के ओर वापस लाने ओर गर्भ में संस्कार  विज्ञान के दृष्टिकोण से महत्तत्व बताया हैं।

यह वैज्ञानिक गर्भसंस्कार हमारी प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित है और गर्भाधान के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रोसेस से भ्रूण के विकास की सबसे अच्छी विधि है । स्वस्थ और प्रतिभाशाली प्रतिभाओं के साथ वांछित संतानों को प्राप्त करने के लिए इस पद्धति पर कई वैज्ञानिक शोध भी विश्व प्रसिद्ध संस्थानों द्वारा किए गए हैं। विज्ञान और वेदों ने साबित किया है कि बच्चे का 80% शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास गर्भ में होता है। इसलिए, एक उत्कृष्ट संतान होने के लिए गर्भावस्था एक अच्छा समय है। यदि वर्तमान महामारी की अवधि में गर्भवती माँ तनाव में हैं, तो इससे संतान पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. मेघा शाह ने कहा कि इस तनाव से गर्भवती माताओं को राहत देने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई, साथ ही बच्चों, परिवार के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के साथ-साथ स्वास्थ्य, बुद्धि, प्रेम और संस्कृति की विरासत को सुनिश्चित किया गया। । जबकि पारस परमार ने कहा कि बच्चे पैदा करने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक दंपत्ति द्वारा भ्रूण के पालन की विधि आने वाली संतानों को सक्षम और उत्कृष्ट बनाएगी।

दो दिवसीय वर्कशॉप में गर्भवती महिलाओं के स्वस्थ गर्भ और गर्भ में बच्चे के विकास के विषय पर 1500 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया । पिछले दस वर्षों से, तथास्तु संस्थान इस वैज्ञानिक गर्भसंस्कार पर पूरे भारत और विदेशों में मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, और हजारों जोड़े इस भारतीय वैज्ञानिक पद्धति का पालन करके प्रतिभाशाली और प्रतिभाशाली संतानों के माता-पिता बन गए हैं।